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नेपाल:ओली ने कुर्सी बचाने के लिए रद्द करवाया संसद सत्र

Oli-faces-unrest-in-Nepal-revolt-in-communist-party-blames-Indiaनेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की बढ़ती मांग के बीच राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद के चल रहे बजट सत्र को रद्द कर दिया है. राष्ट्रपति ऑफिस से जारी बयान में कहा गया है कि संसद के दोनों सदनों के वर्तमान सत्र को रद्द कर दिया गया है. राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा कैबिनेट की मांग पर किया गया है. इससे पहले गुरुवार को कैबिनेट की बैठक हुई थी और इसी बैठक में संसद के बजट सत्र को रद्द करने की सिफारिश की गई थी. कैबिनेट की बैठक से पहले केपी शर्मा ओली ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी. बजट सत्र आठ मई से शुरू हुआ था. हालांकि, इस सत्र में आम बजट पेश किया जा चुका था और कई बिल भी पास हो गए थे.

कुर्सी बचाने के लिए रद्द कराया संसद सत्र?

कहा जा रहा है कि ओली के पास बहुमत नहीं है और उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए संसद के सत्र को रद्द करवा दिया है. ओली पर प्रधानमंत्री और पार्टी प्रमुख दोनों पदों से इस्तीफा देने का दबाव है. पार्टी के ज्यादातर सीनियर नेता, सचिव और स्टैंडिंग कमिटी के लोग पार्टी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ हैं और सब एक स्वर में इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. ओली ने अपने प्रति पार्टी के भीतर बढ़ते अविश्वास को लेकर भारत पर आरोप मढ़ने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ दिल्ली और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास में साजिश चल रही है. हालांकि प्रचंड ने दो टूक कहा था कि उनसे भारत नहीं बल्कि पार्टी इस्तीफा मांग रही है. अगर वे भारत के खिलाफ आरोपों को साबित नहीं कर सकते हैं तो इस्तीफा सौंपे.सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख पुष्प कमल दहल प्रचंड ने गुरुवार को प्रधानमंत्री ओली के करीबियों से मुलाकात की थी. प्रचंड के मीडिया सलाहकार विष्णु सप्कोता ने इस बात की पुष्टि की थी कि प्रचंड ने बैठक की थी. काठमांडू पोस्ट के अनुसार, प्रचंड के खुमालतर स्थित आवास पर गुरुवार सुबह आठ बजे पार्टी महासचिव विष्णु पोउदेल, उपप्रधानमंत्री ईश्वर पोखरेल, विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली, प्रांत पांच के मुख्यमंत्री शंकर पोखरेल, प्रधानमंत्री ओली के प्रधान सलाहकार विष्णु रिमल और संसदीय उपनेता सुभाष नेमबांग पहुंचे थे. इस बैठक में प्रचंड ने कहा कि ओली को पार्टी के सिस्टम और प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.

इस्तीफे से कम पर तैयार नहीं प्रचंड

बुधवार को भी प्रचंड ने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की थी. कहा जा रहा है कि प्रचंड ओली इस्तीफे से कम पर तैयार नहीं हैं. गुरुवार को हुई बैठक भी इसी रणनीति का हिस्सा था. गुरुवार को पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक थी. इस कमिटी में कुल 44 सदस्य हैं और इसमें प्रचंड का दबदबा है. पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक के बीच ही ओली ने कैबिनेट की बैठक बुला ली थी.

ओली को फौरी राहत पर खतरा टला नहीं

संसद के सत्र को रद्द करने के बाद ओली को अविश्वास प्रस्ताव पर तत्काल वोटिंग से राहत मिल गई है. हालांकि ओली पर खतरा अभी टला नहीं है. नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 93 (3) के अनुसार, जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो तो संसद के एक चौथाई सांसद राष्ट्रपति से संसद के सत्र की मांग कर सकते हैं. ऐसे में राष्ट्रपति को संसद का सत्र बुलाना होगा. ओली इस्तीफे पर चौतरफा घिर गए हैं. वो अपनी कुर्सी बचाने के लिए हर रणनीति आजमा रहे हैं लेकिन बिना समर्थन बहुत दिनों तक वो पीएम की कुर्सी नहीं बचा पाएंगे.ओली ने हाल के दिनों कई भारत विरोधी फैसले लिए हैं और चीन से करीबी बढ़ाई है. ओली के कई फैसलों का देश के भीतर भी विरोध हो रहा है. यहां तक कि उन्होंने भारत से लगी सीमा सेना की तैनाती कर दी थी. नेपाली सेना की गोली से एक भारतीय की मौत भी हुई थी. ओली पर अब संविधान के नियमों को धता बताने का आरोप भी लग रहा है. नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने ट्वीट कर कहा है कि ओली को कुर्सी बचाने के लिए संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए.

पार्टी में ही अलग-थलग पड़े ओली, भारत विरोध नहीं आया काम

ओली अपनी पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर कई मुद्दों को लेकर कड़े विरोध का सामना कर रहे हैं. ओली भी पुष्प दहल प्रचंड के साथ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष हैं. भारत विरोध, पार्टी के भीतर तानाशाही, कमजोर अर्थव्यवस्था और कोरोना महामारी को लेकर ओली के खिलाफ पार्टी के भीतर ही गोलबंदी मजबूत होती जा रही थी. पार्टी की 44 सदस्यीय स्टैंडिंग कमिटी पर भी प्रचंड का नियंत्रण मजबूत है जबकि ओली हाशिए पर आ गए हैं. स्टैंडिंग कमिटी की आखिरी बैठक में ओली के प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का 31 सदस्यों ने विरोध किया. यहां तक कि ओली कई बार बैठक में जाने से भी बचते रहे.

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रचंड, माधव कुमार नेपाल, झाला नाथ कनल और बामदेव गौतम ने ओली के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है. नेताओं ने ओली पर आरोप लगाया कि वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए देश, लोकतंत्र और जनता सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं. ओली के लिपुलेख पर भारत के साथ विवाद बढ़ाने से पहले ही उनके इस्तीफे की मांग उठने लगी थी. इसी बीच ओली ने भारत के तीन इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल करते हुए नया नक्शा जारी कर दिया. संसद में इसे राष्ट्रवाद का मुद्दा बनाकर ओली ने अपनी पार्टी के भीतर के विरोधियों और विपक्षी दल के नेताओं को नक्शा पास करने के लिए मजबूर किया. इससे नेपाल में उन्हें तात्कालिक राजनीतिक लाभ जरूर मिला लेकिन कुछ समय बाद फिर से उनके इस्तीफे की मांग तेज होने लगी.

2017 में चुनाव से पहले ओली और प्रचंड ने बनाई थी नई पार्टी

साल 2017 नेपाल की राजनीतिक का टर्निंग पॉइंट था. नेपाल की दो कम्युनिस्ट पार्टियों ने 2017 के चुनाव से पहले एक साथ आने का फैसला किया था. प्रचंड के नेतृत्व वाली माओवादी पार्टी और ओली की मार्कसिस्ट-लेनिनिस्ट ने मर्जर कर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी नाम से एक नई पार्टी बनाई. ओली ने अपने चुनावी कैंपेन के दौरान कुछ समय पहले भारतीय सीमा पर हुई नाकेबंदी का जिक्र कर लोगों में भारत विरोधी भावनाएं भड़काने की कोशिश कीं. भारत विरोधी राष्ट्रवाद और प्रचंड के सहारे ओली चुनाव जीत गए.सत्ता में आने के बाद ओली ने भारत-नेपाल मैत्री संधि का मूल्यांकन करने की मांग उठाई. दूसरी तरफ, ओली चीन के प्रति अपना झुकाव स्पष्ट रूप से जाहिर करते रहे. यहां तक कि चीन की जिस बेल्ट ऐंड रोड परियोजना का भारत विरोध कर रहा है, उसमें नेपाल शामिल हो गया. ओली ने भारत को ताना भी दिया कि भारतीय वायरस चीनी और इटली के वायरस की तुलना में ज्यादा खतरनाक है. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं और विपक्षी दलों को महसूस होने लगा था कि ओली का भारत विरोधी रुख नेपाल के हितों को भारी नुकसान पहुंचाएगा. पार्टी के भीतर और बाहर उनका तानाशाही रवैया ही उनके खिलाफ विरोध का प्रमुख कारण बन गया.

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