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धामी पर दांव खेल बीजेपी ने साधे कई समीकरण

pusker dharmaniनई दिल्ली दो बार के विधायक पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री चुनकर बीजेपी ने न सिर्फ राज्य की राजनीति के कई फैक्टर्स का ध्यान रखा है बल्कि पार्टी के अंदर भी कई चीजों को बैलेंस करने की कोशिश की है। 45 साल के धामी को सीएम बनाकर बीजेपी ने पार्टी के लंबे वक्त की राजनीति के लिए एक चेहरा भी आगे किया है।

कुमाऊं को बैलेंस
बीजेपी के लिए कुमाऊं कमजोर कड़ी माना जाता है। गढ़वाल में बीजेपी की जो पकड़ है वह कुमाऊं में नहीं है। बीजेपी अब तक गढ़वाल को ही ज्यादा तवज्जो देती रही। जब त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया गया उस वक्त भी कुमाऊं रीजन में बीजेपी के फैसले को लेकर नाराजगी थी। इसे लेकर कई जोक्स भी बने।एक रावत के जाने और दूसरे रावत के आने पर भी बीजेपी की आलोचना की गई। साथ ही यह कांग्रेस के लिए एक मुद्दा भी बन रहा था। कुमाऊं से आने वाले कांग्रेस नेता हरीश रावत इसे न भुनाएं इसलिए भी बीजेपी ने कुमाऊं को बैलेंस करने की कोशिश की है। हालांकि बीजेपी ने गढ़वाल रीजन के ठाकुर को हटाकर कुमाऊं रीजन के ठाकुर को ही नेता चुना है। पुष्कर सिंह धामी कुमाऊं की खटीमा सीट से विधायक हैं और मूल रूप से कुमाऊं के पिथौरागढ़ जिले के हैं।

पहाड़ और मैदान दोनों का संतुलन
उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में से 29 सीटें कुमाऊं रीजन में हैं। इनमें 20 सीटें पहाड़ी हैं। उत्तराखंड में कई ऐसी सीटें भी हैं जो हैं तो मैदानी इलाके में लेकिन वह पहाड़ी बहुल हैं और वहां बड़ी संख्या में पहाड़ी मतदाता हैं। धामी की सीट खटीमा के अलावा हल्द्वानी, लालकुआं, कालाढूंगी, रामनगर, कोटद्वार, डोइवाल ऐसी ही सीटें हैं। स्थानीय बीजेपी नेता के मुताबिक धामी को आगे करने का फायदा मैदान के अलावा पहाड़ में भी होगा।

किसान आंदोलन का असर
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का असर उत्तराखंड के हरिद्वार के अलावा उधमसिंह नगर में भी है। खटीमा सीट उधमसिंह नगर जिले में ही आती है। किसान आंदोलन से बन रहे माहौल से बीजेपी असहज भी थी और पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाना उसे बैलेंस करने की कोशिश भी है।

लंबी पारी की तैयारी
युवा विधायक को सीएम बनाकर बीजेपी ने पार्टी के सीनियर नेताओं के बीच की गुटबाजी और आपसी खींचतान को भी जवाब दिया है। धामी के चुने जाने से कई सीनियर नेता खुश नहीं हैं लेकिन बीजेपी ने एक तरह से संदेश दिया है कि गुटबाजी करने वालों को पार्टी में तवज्जो नहीं मिलेगी। धामी संघ के छात्र संगठन एबीवीपी में रहे हैं और बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। राजनीति की उम्र अगर 75 साल तक मानी जाए तो 45 साल के धामी के पास राजनीति के लिए अभी 30 साल हैं। बीजेपी ने ऐसे नेता को चुना है जो लंबी पारी खेल सकता है। पार्टी ने युवा नेता को आगे बढ़ाकर 30 साल की राजनीति के लिए तैयार किया है।

बीजेपी ने की देर
उत्तराखंड में यह भी चर्चा है कि अगर बीजेपी को धामी को ही सीएम बनाना था तो यह फैसला पहले ही लिया जाता तो बेहतर होता। बीजेपी के एक स्थानीय नेता ने कहा कि धामी के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने भी बैटिंग की थी। हालांकि एक दूसरे नेता ने कहा कि बलूनी खुद उत्तराखंड में अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं, ऐसे में वह किसी युवा नेता को आगे बढ़ाकर अपने लिए कॉम्पिटिशन पैदा क्यों करेंगे। वैसे पुष्कर सिंह धामी पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी के बेहद खास हैं। धामी को संघ नेताओं के भी करीबी माना जाता है। धामी की इमेज अपने इलाके में अच्छी है और उन्होंने युवाओं के बीच काफी काम भी किया है।

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