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चालान की मार-पब्लिक परेशान

11036420_830169833731839_5518825921134179089_nनई दिल्ली। ( संदीप ठाकुर ) सरकार के विभिन्न विभागाें में आपसी तालमेल नहीं हाेने का खामियाजा सड़क पर वाहन चलाने वाले कराेड़ाें चालकाें काे उठाना पड़ रहा है। केंद्र सरकार के परिवहन मंत्रालय ने डिजिलॉकर ऐप बनाया है। मंत्रालय का साफ साफ कहना है कि डिजिलॉकर और एमपरिवहन ऐप पर मौजूद दस्तावेज की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी को वैध माना जाएगा। अधिकारी को इसे मान्‍यता देना ही होगा, क्योंकि सरकार इसे मान्य करार दे चुकी है। केंद्र सरकार ने राज्यों के परिवहन विभागों और ट्रैफिक पुलिस को इस संबंध में निर्देश देते हुए कहा है कि डिजिलॉकर में रखे गए गाड़ी के कागजात दिखाने के बाद पुलिस काे सत्यापन के लिए दस्तावेजों की ऑरिजिनल कॉपी दिखाना जरूरी नहीं हाेगा। लेकिन पुलिस है कि इसे मानती ही नहीं। पुलिस का दाे टूक कहना है कि डिजिलॉकर में कागजात हाेने के बावजूद ऑरिजनल कागजात खास ताैर से आरसी या डीएल रखना और दिखाना जरूरी है। नहीं हाेने पर चालान कटेगा। और माेटा चालान कटा भी जा रहा है।

गत 1 सितंबर से दिल्ली में ट्रैफिक नियमाें का उल्लंघन करने पर वाहन चालकाें का माेटा काेर्ट चालान काटा जा रहा है। काेर्ट चालान इसलिए कि अभी दिल्ली सरकार ने इस बावत नाेटिफिकेशन जारी नहीं किया है। इसलिए ट्रैफिक पुलिस काे ऑन द स्पॉट जुर्माने की रकम लेने का अधिकार नहीं मिल पाया है। यह जानना जरूरी है कि डिजिलॉकर या एमपरिवहन ऐप है क्या बला ? इस ऐप की सुविधा का लाभ उठाने के लिए वाहन चालकों को अपने स्मार्टफोन में सबसे पहले डिजिलॉकर और एमपरिवहन एप  को डाउनलोड करना होता है । इसके बाद आगे की प्रक्रिया के तहत साइनअप करने के लिए अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है । इस प्रक्रिया के पूरा होते ही आपके मोबाइल फोन पर एक ओटीपी आएगा। इस ओटीपी को एंटर करके सत्यापित करना होगा। फिर इसके अगले चरण में लॉगिन करने के लिए अपना यूजर नेम और पासवर्ड सेट करना होगा। इसके बाद आपका डिजिलॉकर अकाउंट बन जाएगा।

इसके बाद तय नियम के तहत आपको अपने आधार नंबर को प्रमाणित करना होगा। इसके बाद आधार डेटाबेस में दर्ज मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। ओटीपी को एंटर करने के बाद आधार से लिंक करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और आपका डिजिलॉकर अकाउंट बन जाएगा। डिजिलॉकर बनते ही आप अपनी आरसी, लाइसेंस,और इंश्योरेंस की कॉपी उसमें रख सकते हैं। ऐसा करने के बाद आपको कागजात साथ रखने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। यह दावा सरकार का है।इतना ही नहीं, कहीं भी ट्रैफिक पुलिस को आप जरूरत पढ़ने पर ये सभी कागजात डिजिलॉकर की मदद से दिखा सकते हैं। इसके अलावा, अन्य स्थानों पर भी जरूरत पढ़ने पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस सुविधा को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार साल पहले जुलाई 2015 में लॉन्‍च किया था। यह अलग बात है कि इससे जुड़े नियमों को 2017 में नोटिफिाई किया गया था। ट्रैफिक पुलिस के अपने तर्क हैं। उनका कहना है  कि यदि किसी वाहन के कागजात माेबाइल ऐप में हैं और वह ट्रैफिक रूल ताेड़ते हुए पकड़ा जाता है ताे ऐसे में उनके कागजात जब्त हाे नहीं पाएंगे। ऐसे में पुलिस काे उसकी गाड़ी जब्त करनी पड़ेगी और काेर्ट में चालान जमा करने के बाद ही गाड़ी मिलेगी। पुलिस का कहना है कि नियम ताेड़ने की स्थिति में वाहन चालक काे बताैर जमानत काेई न काेई कागजात ताे रखना ही हाेगा । कागजात नहीं ताे वाहन छाेड़ना पड़ेगा और यह चालक के लिए और भी परेशानी का सबब बनेगा।

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