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पुलवामा हमला:हमलावर को पनाह देने वाला जैश आतंकी गिरफ्तार

pulwamaनई दिल्लीजम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ी सफलता मिली है। एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाकिर बशीर मागरे को गिरफ्तार किया है। शाकिर जैश का ओवरग्राउंड वर्कर है और इसी ने पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को पनाह दी थी।एनआईए ने एक बयान जारी कर बताया कि शाकिर की पुलवामा हमले में सक्रिय भूमिका थी। शाकिर ने आदिल अहमद डार को पनाह देने के अलावा उसे हमले के लिए जरूरी सामान भी मुहैया कराया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सामने अब तक चुनौती बनी हुई है कि आखिर इस हमले का असली मास्टरमाइंड कौन था। एनआईए के पास इस हमले के मुख्य आरोपी के बारे में अब तक कोई ठोस सूचना या साक्ष्य नहीं है। हालांकि शाकिर की गिरफ्तारी एनआईए के लिए बड़ी सफलता है और एजेंसी को इससे काफी अहम जानकारी मिल सकती हैं।

‘हमले से पहले अपने घर में रखा, आईईडी बनवाने में की मदद’
शाकिर की गिरफ्तारी पर एनआईए ने एक बयान जारी कर कहा, ‘पूछताछ में शाकिर ने खुलासा किया है कि वही आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमर फारूक को 2018 के आखिर में अपने घर लाया था। फरवरी 2019 में हमले को अंजाम देने तक ये दोनों इसी के घर पर रुके। इसी ने आईईडी बनाने में दोनों की मदद की। आगे की पूछताछ के लिए शाकिर को 15 दिन की हिरासत में लिया गया है।’

एनआईए ने गुरुवार को ही दिए थे बड़ी कामयाबी के संकेत
गुरुवार को ही कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया था कि एनआईए की विशेष अदालत ने पुलवामा हमले के एक आरोपी को सबूतों के अभाव में जमानत दे दी। हालांकि एनआईए ने साफ किया था कि आरोपी का पुलवामा हमले से कोई संबंध नहीं था। एनआईए ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा, ‘एनआईए निष्पक्षतम जांच की नीति पर चलती है। पुलवामा के जिस आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे, उससे जुड़े मामले में हमारे हाथ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं और जल्द ही बड़ी सफलता की संभावना है।’

अब तक चार्जशीट दाखिल न होने से उठ रहे थे सवाल

बता दें कि पुलवामा हमले की 14 फरवरी को ही पहली बरसी थी। आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के बाद सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में पांच संदिग्धों को मार गिराया था। माना जाता है कि ये पांचों हमले के षड्यंत्रकारी थे। सभी संदिग्ध आतंकियों की मौत के बाद पुलवामा अटैक से जुड़े कई सवाल आज भी अनसुलझे हैं। संदिग्‍धों की मौत के कारण पूरी साजिश का पता नहीं चल पा रहा है। एनआईए अब तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है जबकि इतने बड़े मामले में 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल हो जानी चाहिए थी।

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