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इश्क कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है……..निदा फाज़ली

VG5A0612अकारो एसोसिएशन फॉर एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर और संप्रेषण मल्टीमीडिया की ओर से देश के लोकप्रिय लेखक एवं शायर पद्मश्री स्व. श्री निदा फाज़ली की याद में  दिल्ली के मावलंकर ऑडिटोरियम, रफी मार्ग पर एक ग़ज़ल संध्या का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की शुरूआत केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्री संतोष गंगवार ने स्व. निदा फाज़ली जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके की. अपने उद्बोधन में श्री संतोष गंगवार ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उन्हें कभी निदा साहेब को प्रत्यक्ष सुनने का अवसर नही मिला लेकिन उन्होंने उनकी रचनाओं को पढ़ा है और महसूस किया कि श्री निदा फाज़ली भाषा और विचार की दृष्टि से आम आदमी के शायर थे. उनके बात को कहने का अंदाज़ इतना सीधा सच्चा था कि वो सुनने और पढ़ने वाले के दिलों पर सीधी छाप छोड़ जाता था. वे देश के एक ऐसे शायर थे जो सदा साम्प्रायिक सौहार्द के लिए लिखते रहे. अगर उन्हे आधुनिक युग का कबीर कहा जाये तो ग़लत नही होगा.

VG5A0564इस कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध अभिनेता पद्मश्री श्री टॉम ऑल्टर ने किया. उन्होंने निदा साहेब के साथ काम के पलों की यादों को श्रोताओं के साथ सांझा किया. उन्होंने कहा निदा साहेब जितने बड़े लेखक थे उतने ही बड़े इंसान. उन्होंने निदा साहेब की लिखी ‘वालिद की वफात’ और ‘मां’ रचनाएं पढ़ीं.स्व. निदा साहेब की पत्नी सुश्री मालती जोशी फाजली ने निदा साहेब के साथ गुज़ारे वक्त को याद किया और श्रोताओं को अपनी मधुर आवाज़ में उनकी लिखी गज़ले सुनाई. उन्होंने कहा निदा साहेब ने जिस तरह से संघर्ष किया और जीवन में सफलता हासिल की वही संघर्ष उनकी शायरी में भी झलकता है.

कहीं छत थी, दीवारोदर थे कहीं  मिला मुझको घर का पता देर से

VG5A0566दिया तो बहुत ज़िन्दगी ने मुझे मगर जो दिया वो दिया देर से.,

तनहा तनहा हम जी लेंगे, महफ़िल महफ़िल गायेंगे

जब तक आँसू पास रहेंगे, तब तक गीत सुनायेंगे

मालती जी ने निदा साहेब के लिखे दोहे सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया.

बच्चा बोला देख के मस्ज़िद आलीशान

एक तेरे को अल्लाह इतना बड़ा मकान

VG5A0578गंगा जी के घाट पे करे जुलाहा बात

वादा करके क्यूं सो गए अच्छे दिन रात

झूठी सारी सरहदें धोखा हर तक्सीम

दिल्ली से लाहौर तक कड़वे सारे नीम

सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक श्री अमरीश मिश्रा ने निदा साहेब और जगजीत सिंह की दोस्ती की मिसाल देते हुए बताया कि जिस दिन जगजीत सिंह जी का जन्मदिन था उसी दिन निदा साहेब का निधन हुआ. और ये भी एक इत्तफाक है कि 12 अक्तूबर को निदा साहेब VG5A0588का जन्मदिन है और 10 अक्तूबर जगजीत सिंह जी की पुण्य तिथि. श्री अमरीश मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज़ में निदा साहेब की लिखी ग़ज़ले सुनाई.

कभी किसी को मुकम्मल जहां नही मिलता, कहीं जमीं तो कहीं आसमां नही मिलता.

चांद से फूल से या मेरी जुबां से सुनिए हर तरफ आपका किस्सा है जहा से सुनिए होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है,  इश्क कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है.

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलोना है, मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है.

देखा गया हूं मैं कभी सोचा गया हूं मैं, अपनी नज़र में आप तमाशा रहा हूं मैं. गरज बरस प्यासी धरती को फिर पानी दे मौला, चिड़ियों को दाने बच्चों को गुड़ धानी दे मौला.

VG5A0620कार्यक्रम के संयोजक अतुल गंगवार ने बताया कि 14 जून 2015 के दिन निदा साहेब की नयी अल्बम सुनो तुम का लांच यहीं मावलंकर हाल में होना था. निदा साहेब चोट लगने के कारण नही आ पाये थे. उन्होनें वादा किया था कि वो इस कार्यक्रम में ठीक होने के बाद ज़रूर आयेंगे लेकिन वक्त ने उन्हें हम से जुदा कर दिया. निदा साहेब की इच्छा का सम्मान करते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन उसी जगह पर किया गया है. आज वो जहा भी होंगे वहीं से देश, समाज और बच्चों की चिंता कर रहे होंगे. इस कार्यक्रम के आयोजन में बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था अकारो एसोसिएशन फॉर एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर को जोड़कर हम आगे भी निदा साहेब के सपनों को पूरा करने की दिशा में काम करते रहेंगे. कार्यक्रम के अंत में टॉम ऑल्टर ने वहां मौजूद लोगों से वादा लिया कि वो निदा साहेब के बताये रास्ते पर चलें और एक खुशहाल हिंदुस्तान बनाये जहां हर आदमी खुशहाल हो, उसका एक घर हो, घर में खाना हो, पहनने के कपड़े हों और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान हो.

अपनी मर्ज़ी से कहां अपने सफर के हम हैं

रूख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

 

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