galla tdpतेलुगू देशम पार्टी सांसद जयदेव गल्ला ने प्रस्ताव पर पार्टी का समर्थन करने वाले दलों का आभार जताते हुए कहा कि पहली बार सांसद बनने के साथ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करना मेरे लिए गौरव की बात है। जयदेव गल्ला ने लोकसभा में कहा कि चार कारणों से यह अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इसमें विश्वास की कमी, भेदभाव, प्राथमिकता की कमी शामिल हैं। आंध्र की पांच करोड़ जनता के साथ धोखा किया गया। आंध्र प्रदेश का मुद्दा राष्ट्रीय मुद्दा है। ये भाजपा और टीडीपी की लड़ाई नहीं है। आगे उन्‍होंने कहा कि मोदी सरकार ने आंध्र प्रदेश से किया वादा पूरा नहीं किया, हमारे लिए यह भावनात्‍मक मुद्दा है। तेलंगाना नहीं आंध्र नया राज्‍य। आंध्र के समाने ज्‍यादा समस्‍याएं हैं। केंद्र ने आंध्र प्रदेश के साथ न्‍याय नहीं किया। आंध्र प्रदेश पर भारी आर्थिक कर्ज है, जनता के पास ज्‍यादा संसाधन नहीं हैं। मोदी सरकार आने के बाद प्रदेश की चुनौतियां बढ़ गई हैं। आंध्र प्रदेश के विभाजन को लेकर मोदी जी ने कहा था कि कांग्रेस ने मां को मार दिया और बच्चे को बचा लिया। उन्‍होंनेने कहा था कि मैं मां को बचाऊंगा। लेकिन आंध्र प्रदेश के लोग ठगे गए हैं, प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ इस तरह धोखा कैसे कर सकते हैं? अगामी लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश की जनता करारा जवाब देगी, हम धमकी नहीं श्राप दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, लेकिन कर्नाटक चुनाव में जनार्दन रेड्डी और उनके लोगों को टिकट क्यों दिया गया। गल्ला ने लोकसभा में पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि क्या आपके वादों की कोई अहममियत नहीं है। उन्होंने कहा कि 2014 के विधानसभा चुनाव में भी मोदी ने रैली में आंध्र के स्पेशल स्टेटस देने का वादा किया था। ऐसे में क्‍या आपको लगता है कि आंध्र प्रदेश के लोग आप पर भरोसा करेंगे? केंद्र ने हमारे खाते से पैसे वापस लिए जिससे राज्य को काफी वित्तीय नुकसान हुआ है। आंध्र के लिए जो परियोजनाओं लाने की बात की गई थी उसके लिए भी कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। आंध्र प्रदेश के साथ बुंदेलखंड से भी ज्यादा भेदभाव हुआ है। हमें रेवेन्यू डेफिसिट की भरपाई के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं मिला। आंध्र प्रदेश में परियोजनाओं के लिए जितनी पैसे का एलान किया गया था उतना पैसा कभी नहीं दिया गया। पिछड़े इलाकों के लिए दिए जाने वाले पैकेज तक में कटौती की गई। पूरे फंड का सिर्फ 2-3 फीसद हिस्सा ही दिया गया, क्या इसे वादा पूरा करना कहते हैं। गुजरात में सरदार पटेल के लिए जितना पैसा दिया जा रहा है, उससे कम पैसा आंध्र की राजधानी अमरावती के लिए दिया जा रहा है। पीएम ने दिल्ली से भी बड़ी और अच्‍छी राजधानी बनाने का वादा किया था, उस वादे का क्‍या हुआ। मैं प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने का अनुरोध करता हूं।

अविश्वास प्रस्ताव से कुछ घंटे पहले शिवसेना का मोदी सरकार को झटका

sanjay-raut-shiv-sena-mp_650x400_41490868783अविश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले शिवसेना ने मोदी सरकार को समर्थन नहीं करने का फैसला किया है. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का बहिष्कार करेगी. राउत ने कहा कि वोटिंग के दौरान शिवसेना सांसद गैरहाजिर रहेंगे. इससे पहले आज सामना में लिखा गया है कि इस समय देश में तानाशाही चल रही है. इसका समर्थन करने की जगह वो जनता के साथ जाना चाहेगी.543 सांसदों वाली लोकसभा में इस वक्त 11 सीटें खाली हैं. य़ानी लोकसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या 532 है. इस लिहाज से बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 267 सीटों का है. फिलहाल बीजेपी के 272 सांसदों के साथ सरकार के पक्ष में कुल 295 सांसद हैं. ये आंकड़ा 313 का होता, लेकिन शिवसेना ने अपना रुख साफ नहीं किया है.

उधर विरोध में 147 सांसद हैं, जबकि शिवसेना के 18 सांसदों को मिलाकर यह संख्या 165 हो जाएगी. अब तक 90 सांसदअविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या विरोध, ये फिलहाल साफ नहीं हो पाया है.अब तक माना जा रहा था कि शिव सेना सरकार के साथ जाएगी. गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उद्धव को फोन किया था. इसके बाद खबरें आईं थीं कि शिवसेना मोदी सरकार के समर्थन में वोट करेगी. लेकिन आज सामना में पार्टी ने अप्रत्यक्ष रूप से साफ कर दिया है कि वोटिंग में वो मोदी सरकार का समर्थन नहीं करेगी. हालांकि पार्टी ने अभी तक इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया है.एआईएडीएमके ने भी अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. पार्टी के 37 सांसदों का रुख क्या होगा, ये भी अभी तक साफ नहीं है.अविश्वास प्रस्ताव सरकार का इम्तिहान कम बल्कि विपक्ष की परीक्षा ज्यादा है, क्योंकि संख्या बल सरकार के साथ है. बस देखना दिलचस्प ये होगा कि सरकार के खिलाफ विपक्ष कितनी मजबूती से टिक पाता है.