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अविश्वास प्रस्ताव के बहाने

manoj vermaलोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को बहस के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया है. इसका मतलब है कि 10 दिनों के अंदर अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी और वोटिंग भी.लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मोदी सरकार के खिलाफ साढ़े चार साल में पहला अविश्वास प्रस्ताव मंजूर किया है। मानसून सत्र के पहले दिन बुधवार को कांग्रेस और तेदेपा ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। इस पर शुक्रवार को चर्चा होगी। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा- हम परेशान नहीं हैं। मोदी सरकार के खिलाफ हमारे पास पर्याप्त संख्याबल है। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार भी अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार है। हम आसानी से जीतेंगे, क्योंकि हमारे पास सदन में दो-तिहाई बहुमत है।

सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि सरकार इसके लिए तैयार है. दरअसल सरकार की रणनीति ये है कि हमेशा के लिए इस हथियार को खत्म कर दिया जाए जिसकी धमकी विपक्ष दो बार से दे रहा है. यदि आंकडों को देखें तो लोकसभा में अभी कुल 535 सदस्य हैं. यानि इसका आधे 268 सदस्य चाहिए बहुमत साबित करने के लिए. इसमें लोकसभा अध्यक्ष शामिल नहीं हैं.  मगर 2 मनोनित सदस्य शामिल हैं जो वोट डाल सकते हैं. वहीं 9 जगह खाली हैं. यदि आंकडों को देखें तो बीजेपी के पास अकेले 273 सदस्य हैं और एनडीए के आंकडों को देखें तो वह 358 होती है. यानी सरकार के पास पर्याप्त संख्या है. वहीं विपक्ष के पास 168 के आसपास सदस्य हैं. अब सबसे बड़ी वजह क्या है जो विपक्ष साबित करना चाहता है, जबकि उसे पता है कि उनकी हार निश्चित है. अगले दस दिनों के भीतर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार की भी पूरी तैयारी है.
सरकार सबसे पहले तीन तलाक के बिल को पास कराना चाहेगी. सरकार के लिए यह एजेंडे में सबसे ऊपर है, क्योंकि सरकार चाहती है कि इस बिल को पास कराने के बाद आने वाले लोकसभा चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाया जाए और इसी बहाने बीजेपी की नजर महिला मुस्लिम वोट बैंक पर भी है. जब से सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कानून बनाने की बात कही है तब से मुस्लिम महिलाओं में काफी आस भी बढ़ी है. सरकार इस पर कानून बना कर उनकी उम्मीदें बरकरार रखना चाहती हैं. क्योंकि यदि आप तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में चले मुकदमे को भी देखें तो अधिकतर याचिकाकर्त्ता मुस्लिम महिलाएं ही रही हैं. अब जब दस दिनों के भीतर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी. तब तक विपक्ष के पास संसद की कार्यवाही को रोकने का कोई कारण नहीं होगा.

 विपक्ष को लगता है कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वह उन मुद्दों को संसद में उठा पाएगा जिसकी अमूमन अनुमति नहीं मिलती है. जैसे लिंचिंग या भीड़ के द्वारा की जाने वाली हिंसा का मामला, क्योंकि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है.  जिस पर संसद में चर्चा नहीं होती है नियमों के तहत. साथ ही विपक्ष को लगता है कि 2019 से पहले एकजुटता साबित करने का इससे अच्छा मौका फिर नहीं मिल सकता है. क्योंकि अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि विपक्ष एकजुट कैसे होगा और होगा भी या नहीं. अविश्वास प्रस्ताव के बहाने पूरा विपक्ष सरकार के खिलाफ एकजुट हो कर वोट करेगा और इसका सांकेतिक महत्व  काफी मायने रखेगा. विपक्ष को लगता है कि अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग के बाद विपक्षी एकता की मुहिम तेज होगी और 2019 की राजनीति की दिशा तय करेगी. कुछ ऐसे ही जैसे सोनिया गांधी से संसद में अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर विपक्ष की संख्या के बारे में पूछा गया तो उन्होने पत्रकारों से पलट कर पूछा कि कौन कहता है कि हमारे पास संख्या नहीं है. शायद विपक्ष को लगता है कि अविश्वास प्रस्ताव के बहाने विपक्ष में एक नया विश्वास पैदा होगा. जिसकी विपक्ष को जरूरत है.

आखिरी शीतकालीन सत्र, लंबित पड़े हैं अहम बिल
18 जुलाई से शुरु हुआ संसद का मानसून सत्र सरकार के लिए काफी मायने रखता है। क्योंकि ये मानसून सत्र मोदी सरकार के लिए आखिरी सत्र साबित हो सकता है। केंद्र सरकार के कार्यकाल के अब केवल 10 महीने ही शेष हैं। इस सत्र में कई ऐसे बिल लंबित हैं, जिन्हें मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आने के तुरंत बाद लेकर आई थी, लेकिन उन्हें पारित नहीं करवा पाई। हालांकि सरकार ने लंबित बिलों में से 12 बिल बहुमत वाले सदन लोकसभा में पारित करा लिए हैं, लेकिन वे राज्यसभा में अटके हुए हैं। कई बिल लोकसभा में अटके हुए हैं। जिनमें तीन तलाक और मासूमों से रेप पर फांसी के लिए आपराधिक कानून संशोधन बिल अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

एक नजर अहम बिलों की सूची परः

  • भगोड़ा आर्थिक अपराध अध्यादेश 2018,
  • आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018,
  • उच्च न्यायालयों की कमर्शियल अदालतें, कमर्शियल डिविजन्स और कमर्शियल अपीलीय डिविजन्स (संशोधन) अध्यादेश 2018,
  • होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश 2018,
  • राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश 2018
  • इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2018 शामिल हैं।

इन विधेयकों पर भी होगी चर्चा: 

  • सत्र के दौरान चर्चा के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक, महत्वपूर्ण बंदरगाह प्राधिकार विधेयक 2016,
  • राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक 2017
  • भ्रष्टाचार रोकथाम संशोधन विधेयक 2013 को भी एजेंडे में रखा गया है।
  • सार्वजनिक परिसर अनधिकृत कब्जा को हटाने संबंधी संशोधन विधेयक 2017
  • दंत चिकित्सक संशोधन विधेयक 2017
  • जन प्रतिनिधि संशोधन विधेयक 2017

भ्रष्टाचार रोकथाम संशोधन विधेयक 19 अगस्त 2013 को राज्यसभा में पेश किया गया था। बाद में इसे प्रवर समिति को भेजा गया जिसने 12 अगस्त 2016 को राज्यसभा में रिपोर्ट पेश की थी। यह विधेयक राज्यसभा में पास होने के बाद लोकसभा में पेश किया जा सकता है।

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