Pages Navigation Menu

Breaking News

सीबीआई कोर्ट ;बाबरी विध्वंस पूर्व नियोजित घटना नहीं थी सभी 32 आरोपी बरी

कृष्ण जन्मभूमि विवाद- ईदगाह हटाने की याचिका खारिज

सिनेमा हॉल, मल्टीप्लैक्स, इंटरटेनमेंट पार्क 15 अक्टूबर से खोलने की इजाजत

मोदी सरकार में सहयोगी दल के रूप में अब सिर्फ अठावले

Modi-cabinetjpgनई दिल्ली शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय कैबिनेट में महज बीजेपी का प्रतिनिधित्व रह गया है। हालांकि केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में बीजेपी के अलावा एनडीए के अन्य घटक दल में से सिर्फ एक आरपीआई का प्रतिनिधित्व है। मंत्री परिषद में सहयोगी दलों के एकमात्र नेता के रूप में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के रामदास आठवले हैं। वह सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री हैं।

 हरसिमरत कौर बादल ने दिया था इस्तीफा
लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) नेता पासवान के निधन से कुछ दिनों पहले ही हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। कृषि सुधार कानूनों के विरोध में एनडीए के सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल ने गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। बीजेपी का एक अन्य प्रमुख सहयोगी दल शिव सेना भी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर उभरे विवाद के मद्देनजर एनडीए से अलग हो चुका है। इस अलगाव के बाद शिव सेना कोटे से केंद्रीय मंत्री रहे अरविंद सावंत ने इस्तीफा दे दिया था।

मोदी 2.0 के 2 मंत्रियों की मौत, अब कैबिनेट में सिर्फ 21 सदस्य
पिछले महीने कनार्टक से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी का भी निधन हो गया था। अब दो मंत्रियों के निधन और दो सहयोगी दलों के एनडीए से अलग होने के बाद इस्तीफे से मोदी कैबिनेट के सदस्यों की संख्या 21 हो गई है। सभी बीजेपी के हैं। मंत्रिपरिषद में 9 सदस्य बतौर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं जबकि आठवले सहित 23 राज्यमंत्री हैं। मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या घटकर 53 हो गई है।

ramdas athawaleyअभी तक नहीं हुआ कोई विस्तार या फेरबदल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में जब अपनी मंत्रिपरिषद का गठन किया था उस वक्त उसमें बीजेपी सहित विभिन्न सहयोगी दलों के 57 नेताओं को जगह दी गई थी। पासवान, बादल और सावंत सहित कुल 24 नेताओं को केबिनेट मंत्री बनाया गया था वहीं आठवले को राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। एक साल से अधिक कार्यकाल हो जाने के बावजूद मोदी मंत्रिमंडल में अभी तक कोई विस्तार या फेरबदल नहीं हुआ है।

मंत्रिपरिषद में अभी 27 नेताओं को जगह दे सकते हैं पीएम मोदी
नियमों के मुताबिक केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इस लिहाज से केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या 81 तक हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी चाहें तो अभी भी वह 27 नेताओं को अपनी मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकते हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद हो सकता है मंत्रिपरिषद में विस्तार
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद में विस्तार और फेरबदल के आसार मजबूत हुए हैं। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक बिहार विधानसभा चुनाव के बाद इस बहुप्रतीक्षित विस्तार और बदलाव को मूर्त रूप दिया जा सकता है।हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की घोषणा की थी। उन्होंने राम माधव, मुरलीधर राव, सरोज पांडेय और अनिल जैन को महासचिव पद से हटा दिया था। इसके अलावा ओम माथुर, विनय सहस्रबुद्धे और उमा भारती जैसे कई नेताओं की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से छुट्टी कर दी गई है।

कई मंत्रियों पर  कई मंत्रालयों की  जिम्मेदारी
इसके अलावा केंद्र सरकार में कई मंत्री ऐसे भी हैं जिनके पास कई मंत्रालयों का जिम्मा है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ग्रामीण विकास के साथ पंचायती राज मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। हाल ही में हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे के बाद उन्हें खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।पासवान के निधन के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल को उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। गोयल के पास वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का भी जिम्मा है। इसी तरह केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ वन और पर्यावरण मंत्रालय व भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय की जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।

मंत्रिपरिषद में रिक्त हुए पदों, बीजेपी संगठन में बदलाव से मंत्रिपरिषद विस्तार को मिला बल
बीजेपी संगठन में हुए व्यापक बदलावों, मंत्रिपरिषद में रिक्त हुए पदों और सहयोगियों की लगभग नगण्य मौजूदगी और मंत्रियों के जिम्मे अनेक मंत्रालयों व विभागों के काम के बोझ को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद में विस्तार और फेरबदल की संभावनाओं को बल मिला है।

बिहार में 3 चरणों में होने जा रहे हैं चुनाव
फिलहाल, बिहार में तीन चरणों में चुनाव 28 अक्टूबर से शुरू होंगे। पहले चरण के तहत 28 अक्टूबर को राज्य के 71 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा जबकि तीन नवंबर को दूसरे चरण का मतदान 94 सीटों पर होगा। 7 नवंबर को तीसरे चरण का मतदान 78 विधानसभा सीटों पर होगा। 10 नवंबर को मतगणना होगी। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में एक लोकसभा क्षेत्र और 56 विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव होने हैं।

बिहार चुनाव के नतीजों के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में विस्तार संभव
बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि इन चुनावों के नतीजों के बाद ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बदलाव या फेरबदल देखने को मिल सकता है। बिहार में बीजेपी अपने सहयोगी जनता दल (यूनाईटेड) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। जेडीयू केंद्र में भी एनडीए का हिस्सा है लेकिन वह मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं है। इसके उलट जेडीयू से मतभेदों के चलते बिहार में एनडीए से अलग होकर एलजेपी अकेले चुनाव मैदान में है जबकि पासवान एलजेपी कोटे से केंद्र में मंत्री थी।

एनडीए से कुछ पुराने साथी छूटे तो कुछ नए साथी जुड़े
बिहार में बीजेपी को पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाले हिन्दुतानी अवाम मोर्चा (हम) और मुकेश सहनी के नेतृत्व में बनी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के रूप में दो नए सहयोगी मिले हैं। बड़े सहयोगी दलों के रूप में एनडीए में अब जेडीयू ही है। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी एनडीए से अलग हो गई थी।

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *