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आप पर सबसे बड़ा संकट, 20 विधायकों की सदस्यता रद्द

kejriwal-sadचुनाव आयोग द्वारा लाभ का पद मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश के बाद पार्टी ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट ने इस दौरान पार्टी को फटकार लगाते हुए करारा झटका दिया। कोर्ट ने कहा कि पार्टी को फौरी तौर पर राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इससे पहले कहा कि आप ने खुद से ही तय कर लिया कि चुनाव आयोग के पास जाना है कि नहीं। कोर्ट के मुताबिक, जब पार्टी चुनाव आयोग के पास गई ही नहीं तो वह कैसे कह सकती है कि उसकी इस मामले में सुनवाई नहीं हुई। आम आदमी पार्टी का तर्क है कि इस मामले में चुनाव आयोग को फैसला लेने का अधिकार ही नहीं था। हाईकोर्ट ने इस दौरान चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा। साथ ही यह पूछा कि क्या कोई सलाह दी गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद कहा कि अभी तक के तथ्यों पर राहत दिया जाना मुश्किल है। बीच में 10 मिनट का ब्रेक भी हुआ, जिसके बाद सुनवाई फिर से शुरू हुई। कोर्ट में सोमवार को इस मामले पर अगली सुनवाई होगी। बता दें कि आप के वकीलों ने यह भी कहा कि उनका पक्ष सुने बिना ही आयोग ने इस मामले में फैसला ले लिया। सुनवाई के वक्त अदालत में पार्टी के छह विधायक मौजूद थे। पार्टी का यह भी कहना है कि जब हाईकोर्ट ने काफी पहले यह मान लिया कि उनके विधायक संसदीय सचिव नहीं हैं, ऐसे में इस मामले पर उनपर कैसे कार्रवाई हो सकती है।

उधर, 20 विधायकों की सदस्यता जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस ने भी कमर कसनी शुरू की। पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। पार्टी का एक भी विधायक जीतने में असफल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार शाम कांग्रेस ने बैठक कर पूरे मामले पर राय-मशविरा किया। पार्टी नेताओं का दावा है कि अगर तुरंत चुनाव हुए तो पार्टी 20 में से 13 सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं, भाजपा के कई नेताओं ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि केजरीवाल को इस्तीफा दे देना चाहिए।

चुनाव आयोग ने कुल 21 विधायकों को नोटिस भेजा था लेकिन राजौरी गार्डेन से विधायक जरनैल सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। लिहाजा, अब जिन 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की गई है उनमें केजरीवाल सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत के अलावा तेज-तर्रार महिला नेता अलका लांबा, आदर्श शास्त्री, जरनैल सिंह (तिलक नगर) भी शामिल हैं। जिन सभी 20 विधायकों का नाम शामिल है उनकी लिस्ट नीचे है-

1. आदर्श शास्त्री, द्वारका

2. जरनैल सिंह, तिलक नगर

3. नरेश यादव, मेहरौली

4. अल्का लांबा, चांदनी चौक

5. प्रवीण कुमार, जंगपुरा

6. राजेश ऋषि, जनकपुरी

7. राजेश गुप्ता, वज़ीरपुर

8. मदन लाल, कस्तूरबा नगर

9. विजेंद्र गर्ग, राजिंदर नगर

10. अवतार सिंह कालका, कालकाजी

11. शरद चौहान, नरेला

12. सरिता सिंह, रोहताश नगर

13. संजीव झा, बुराड़ी

14. सोम दत्त, सदर बाज़ार

15. शिव चरण गोयल, मोती नगर

16. अनिल कुमार बाजपेयी, गांधी नगर

17. मनोज कुमार, कोंडली

18. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर

19. सुखबीर दलाल, मुंडका

20. कैलाश गहलोत, नजफ़गढ़

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भी अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार की ओर से उसके 21 विधायकों को संसदीय सचिवों के रूप में नियुक्त करने के आदेश को खारिज कर दिया था। वहीं, केंद्र सरकार ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति का विरोध किया था। केंद्र ने कहा था कि मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव पद के अलावा इस पद का न तो संविधान में कोई स्थान है और न ही दिल्ली विधानसभा (अयोग्यता निवारण) कानून 1997 में।

केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा था कि इस तरह की नियुक्ति कानून सम्मत नहीं है। इसके बाद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे नामंजूर कर दिया था।

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