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32 वर्ष पहले भारत ने 1.70 लाख लोगों को को किया था एयरलिफ्ट

air lift india 1090नई दिल्‍ली । 2 अगस्त 1990 को अचानक कुवैत में रह रहे भारतीयों को पता चला कि इराक ने इस मुल्क पर हमला कर दिया है। अपने देश से हजारों मील दूर इस खाड़ी मुल्क में रह रहे भारतीयों पर तो जैसे अचानक पहाड़ टूट गया। इराक से कुवैत की दूरी कुछ ज्यादा नहीं थी और उसकी हैसियत भी इतनी नहीं थी कि वह सद्दाम की सेना के सामने खड़े होने की हिम्मत कर सके।नतीजतन कुछ घंटों में ही कुवैत के सुरक्षाबल भाग खड़े हुए, और वहां के शासक रहे अमीर भी जनता को उनके हाल पर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर निकल गए। शाम होते-होते कुवैत की सड़कों पर इराकी रिपब्लिकन गार्ड दिखाए देने लगे। हर तरफ हथियारबंद इराकी गार्डों को देख कुवैत के स्‍थानीय लोगों में दशहत तारी हो गई, इनमें भारतीय समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में थे। एक अनुमान के मुताबिक उस समय कुवैत में पौने दो लाख के करीब भारतीय रह रहे थे।

 रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी भीषण जंग में वहां फंसे भारतीयों को लाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यूक्रेन से जान बचाने के लिए भारतीय अलग अलग देशों की तरफ रुख कर रहे हैं। वहीं भारत ने भी इन भारतीयों को वापस लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यूक्रेन के पड़ोसी देशों से लगातान विशेष विमानों के जरिए भारतीयों को वापस लाया जा रहा है। सरकार लगातार इनसे संपर्क बनाए हुए है और समय-समय पर पूरी जानकारी भी दे रही है। अब तक करीब दो हजार लोगों को स्‍वदेश वापस लाया जा चुका है। यूक्रेन में करीब बीस से पच्‍चीस हजार भारतीय मौजूद हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने करीब 32 वर्ष पुरानी उस कहानी को भी याद दिला दिया है जब भारत के सामने अपने कुछ हजार नहीं बल्कि लाखों लोगों को सकुशल वापस लाने की चुनौती थी। इराक ने कुवैत पर हमला कर दिया था और वहां पर रहने वाले भारतीय अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। हर तरफ दहशत का माहौल था। हर कोई किसी भी सूरत में वहां से वापस अपने देश आना चाहता था। भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि अपने लोगों को वहां से कैसे वापस लाया जाए। इराक कुवैत पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा था। हर तरफ इराकी लड़ाके पहुंचे हुए थे।

airliftउस वक्‍त भारतीयों को सकुशल निकालने में जिन लोगों ने अहम भूमिका निभाई थी उसमें केरल के मथूनी मैथ्‍यूश्‍ हरभजन सिंह बेदी, अबे वेरिकाड, वीके वैरियर और अली हुसैन का नाम प्रमुख है। इन सभी ने वहां कुवैत में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए जी-जान एक कर दी थी। इन्‍होंने लगातार भारत सरकार से संपर्क बनाए रखा और केंद्र से मिले निर्देश पर काम करते रहे। बसों और गाडि़यों के जरिए पहले इन लोगों को अम्‍मान ले जाया गया था।भारत के सामने समस्‍या थी अमेरिका के आपरेशन डेजर्ट स्‍ट्राम से पहले इन सभी को वहां से निकालना था। भारत ने पहले वहां फंसे 1.70 लाख लोगों को निकालने के लिए सैन्‍य विमान भेजने का विचार किया था। लेकिन इसकी इजाजत न तो यूएन से मिली और न ही कुवैत ने दी। इसके बाद में भारत सरकार ने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस की मदद से जार्डन के अम्‍मान के रास्‍ते इन सभी लोगों को एयरलिफ्ट किया। 8 अगस्‍त को एयर इंडिया ने इन भारतीयों को लाने के लिए पहली उ़ड़ान भरी थी। इसके बाद लगातार 488 फ्लाइट् के जरिए इन लोगों को वहां से निकाला गया था। वहां से एयरलिफ्ट किए लोगों को लेकर आखिरी फ्लाइट 20 अक्‍टूबर 1990 को भारत आई थी। 63 दिनों के अंदर भारत सरकार ने 1 लाख 70 हजार लोगों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला था। भारत का किया गया ये आपरेशन आज तक के इतिहास में सबसे बड़ा एयरलिफ्ट आपरेशन था। इस आपरेशन को गिनीज बुक आफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। इस घटना ऊपर वर्ष 2016 में एयरलिफ्ट नाम से एक फिल्‍म भी बनी थी, जिसमें अक्षय कुमार ने मुख्‍य किरदार निभाया था।

 

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