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मुस्लिम वोटों को लेकर ममता और ओवैसी में ठनी

mamata_650x_2019111915201190कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच विवाद शुरू हो गया है। ममता बनर्जी ने सोमवार को कूचबिहार में एक कार्यक्रम में कहा था कि अल्पसंख्यक समुदाय में कुछ लोग चरमपंथी है। ऐसे लोगों को सुनने से बचें। मंगलवार को पटलवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि ममता का बयान उनका डर और निराशा दिखा रहा है।ममता ने कहा था कि जैसे हिन्दूओं में चरमपंथी हैं, उसी तरह अल्पसंख्यकों में भी चरमपंथी सामने आ रहे हैं। एक राजनीतिक पार्टी है, जो भाजपा से पैसे ले रही है। वह पार्टी हैदराबाद से है, पश्चिम बंगाल से नहीं है। ममता ने कहा- हैदराबाद वाले चरमपंथियों को नहीं सुनें। ऐसी ताकतों का विश्वास नहीं करें। उनके इस बयान पर ओवैसी ने कहा- ममता का बयान उनकी निराशा और हताशा दिखाता है। इससे पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में एआईएमआईएम बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।पश्चिम बंगाल की राजनीति पर नज़र रखने वालों का कहना है कि ममता ने पहली बार अल्पसंख्यक या साफ़ कहा जाए तो मुसलमानों के कथित कट्टरता के बारे में सार्वजनिक मंच से कोई बयान दिया है.कूच विहार बांग्लादेश से सटा हुआ ज़िला है जहां पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए बंगाली आप्रवासियों का मामला एक बड़ा मुद्दा है.

कूच विहार एक हिंदू बहुल क्षेत्र है और वहां पर अल्पसंख्यक कट्टरता की बात करना निश्चित तौर पर बहुसंख्यक हिंदुओं को ध्यान में रखकर दिया गया बयान है.लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सफलता ने ये साबित कर दिया है कि उसने पश्चिम बंगाल और ख़ासकर उसके सीमावर्ती ज़िलों में गहरी पैठ बना ली है.ममता की अब तक छवि कथित मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली नेता की रही है. उन्हें ये डर सता रहा है कि अगर बहुसंख्यक हिंदुओं में ये छवि बढ़ गई तो विधान सभा चुनाव में उनको मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.दूसरी तरफ़ ओवैसी की पार्टी धीरे-धीरे अपना विस्तार कर रही है. लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने महाराष्ट्र से एक सीट जीती है. उसके इलावा महाराष्ट्र में उनको दो विधायक भी हैं. बिहार में हुए उपचुनाव में भी उनकी पार्टी ने विधानसभा की एक सीट जीत ली है.ममता को ये डर भी है कि अगर ओवैसी ने विधानसभा चुनाव में बंगाल का रुख़ कर लिया तो उन्हें मुस्लिम वोटों का नुक़सान हो सकता है. ख़ासकर मालदा, मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ओवैसी कुछ परेशानी खड़ी कर सकते हैं.

ओवैसी ने कहा, ”ममता अपने डर और हताशा का प्रदर्शन कर रही हैं. मुसलमान अब बदल चुका है. आपका जो नाटक है न सिर पर आंचल ओढ़ लिए, टोपी पहन लिए, दुआ के लिए हाथ उठा लिए. हम इसके मोहताज नहीं हैं. हम सशक्तिकरण चाहते हैं. उसके लिए आपने क्या किया.”उन्होंने कहा कि उनपर आरोप लगाकर ममता बनर्जी बंगाल के मुसलमानों को ये संदेश दे रही हैं कि उनकी पार्टी (एमआईएम) बंगाल में एक सशक्त पार्टी बन रही है.क्या ममता को ओवैसी से ख़तरा नज़र आ रहा है, ये पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा, ”मेरा एक प्रोग्राम नहीं हुआ बंगाल में और आपके पेट में दर्द शुरू हो गया. मेरे लिए तो ये इज़्ज़त की बात है कि चीफ़ मिनिस्टर की ज़ुबान से हमारा नाम आ गया.”ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘यह कहना कि बंगाल के मुसलमानों का किसी भी अल्पसंख्यक के मानव विकास सूचकांकों में सबसे खराब में से एक होना धार्मिक कट्टरता नहीं है।’ उन्होंने ममता को मई में आए लोकसभा चुनाव नतीजों में बंगाल में बीजेपी को मिली बड़ी सफलता की भी याद दिलाई और पूछा, ‘अगर दीदी हम कुछ ‘हैदराबादियों’ से चिंतित हैं तो उन्हें हमें यह बताना चाहिए कि बीजेपी बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में 18 पर जीत कैसे गई?’

ममता मुझे गाली देकर मुसलमानों का अपमान कर रहीं : ओवैसी
ओवैसी ने कहा, ‘‘ हम न्याय और अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। अगर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री इसे चरमपंथ के तौर पर देखती हैं, तो मैं कुछ नहीं कर सकता। चरमपंथ तब है जब आप (ममता) भाजपा को 18 सीटें जीतने देती हैं। चरमपंथ तब है, जब 100 % मुसलमानों के वोट देने के बाद भी आप भाजपा को नहीं रोक पाती हैं और मुझे गाली देकर राज्य के मुसलमानों का अपमान करती हैं।’’

ओवैसी की अपील- मुसलमानों को सशक्त बनाएं ममता
एआईएमआईए प्रमुख ने कहा, ‘‘ मैं ममता बनर्जी से अपील करता हूं कि मुसलमानों को सशक्त बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरु करें। जो इस प्रकार की तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के खिलाफ खड़े होते हैं, उन्हें चरमपंथी कहा जाता है। जो लोग भाजपा के खिलाफ बोलते हैं, उन्हें जिन्ना-2 और राष्ट्रविरोधी करार दे दिया जाता है।

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