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पाकिस्तानी हिंदुओं का दर्द…..

pakistan-the-hell-4विभाजन के 7 दशक बीत जाने के बावजूद इस्लामिक देश पाकिस्तान से हिंदुओं का भारत में पलायन जारी है. कुछ दशक पहले जोगदास पाकिस्तान में होने वाले अत्याचारों से बचने और बेहतर जिंदगी की तलाश में भारत में आए थे.लेकिन जीवन की तंगहाली ने सीमा के इस ओर भी उनका पीछा नहीं छोड़ा. आज भी करीब 10 हजार हिंदुओं ने भारत में शरण ले रखी है और वे सीमा के पास बने कैंपों में बिना किसी कानूनी अधिकार के रह रहे हैं.इनमें से कई परिवार नजदीकी पत्थर की खदानों में गैर-कानूनी तरीके से काम करके अपना पेट पाल रहे हैं. इन लोगों की गतिविधियों पर अधिकारियों की कड़ी निगाह रहती है और ये कहीं आ जा नहीं सकते. हिंदू-बहुल भारत में इन शरणार्थी पाकिस्तानी हिंदुओं का इस हालत में होना शर्मनाक कहा जा सकता है.

pak hinduभारत को आजादी भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के रूप में मिली थी.इस बंटवारे की वजह से करीब 15 लाख लोग भारत से पाकिस्तान गए और पाकिस्तान से भारत आए. हिंदू और सिख परिवारों ने भारत का रुख लिया और मुसलमानों ने पाकिस्तान का. इतने बड़े पलायन के बावजूद आज भी पाकिस्तान में करीब 2 करोड़ हिंदू रहते हैं.पाकिस्तान से भारत आने वाले हिंदुओं का कहना है कि पाकिस्तान में उन्हें और उनकी लड़कियों को अपहरण, बलात्कार और जबरन विवाह जैसे जुल्मों का सामना करना पड़ता है.

सबसे ज्यादा सिंध से हो रहा है हिंदुओं का पलायन 

पाकिस्तान से आने वाले अधिकतर हिंदू सिंध प्रांत के हैं. राजस्थान से बोली और संस्कृति में समानता होने के नाते यहां की नागरिकता लेकर आम भारतीयों की तरह रहना चाहते हैं. वैसे भारत सरकार ने यह नियम बना रखा है कि पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं को 7 साल रहने के बाद भारत की नागरिकता दी जाएगी लेकिन सरकारी लालफीताशाही की वजह से इसमें और भी देरी होती है.हाल ही में भारत सरकार ने पाकिस्तान से पलायन करने वाले हिंदुओं के लिए यह भी नियम बना दिया है कि वे अब नागरिकता के लिए राज्य सरकार के पास भी आवेदन कर सकते हैं. सरकार के प्रावधानों के बावजूद सुरक्षा एजेसियां और नौकरशाही इन्हें कई बार प्रताड़ित करती है.खानारामजी 1997 में पाकिस्तान से भारत आए थे और उन्हें 2005 में भारत की नागरिकता मिली. वे कहते हैं कि हमें भारत सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिलती है. हमारे साथ जानवरों जैसा सलूक किया जाता है और जिनके पास भारत की नागरिकता नहीं होती है उन्हें सुरक्षा एजेसियां पाकिस्तानी एजेंट कहकर परेशान करती हैं.

पाकिस्तान से बेहतर जिंदगी की तलाश में भारत आए हिंदुओं का दर्द छलका है। सीमा पार से भारत आए हिंदुओं की हालात काफी pakistan-hindus-in-new-delhiदयनीय है। मुस्लिम आबादी वाले पाकिस्तान में हिंदू होने का उत्पीड़न सह रहे लाखों लोगों ने भारत जाने का सपना देखा था।इन्हीं में एक है पाकिस्तान से भारत आए जोगदास, लेकिन बॉर्डर के इस पार भी हकीकत उनके लिए किसी दर्द भरे सपने से कम नहीं है। बंटवारे के दौरान बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान से भारत आएं। 70 साल बाद भी ये जारी है और बेहतर जीवन की चाहत लेकर पाकिस्तान से लोग अभी भारत आ रहे हैं। उस समय कई हजार लोगों को बॉर्डर के पास स्थित कैंपों में शिफ्ट किया गया लेकिन उन्हें काम करने का अधिकार नहीं दिया गया।

इन कैंपों में रह रहे 81 साल के जोगदास की कहानी वास्तविक हालात दर्शाती है। जोगदास का कहना है कि यहां भारत में उनके पास न तो नौकरी है, ना घर, ना पैसा और ना खाना। वहां (पाकिस्तान) हम खेतों में काम करते थे। हम सब किसान थे। लेकिन यह हम जिंदगी जीने के लिए पत्थर तोड़ने को मजूबर है।जोधपुर कैंप में रह रहे जोगदास ने न्यूज एजेंसी एएफपी से कहा कि हमारे के लिए बंटवारा अभी भी खत्म नहीं हुआ। पाकिस्तान में रह रहे हिंदू अपने देश (भारत) आने की कोशिश कर रहे हैं और यहां हमारे लिए कुछ भी नहीं है।

hindu-in-pakistan-e1336041162137पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं का कहना है कि उन्हें आए दिन भेदभाव यहां तक कि अगवा, रेप और जबरन शादी जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। जोगदास बताते हैं कि विभाजन के बाद से उत्पीड़न शुरू हो गया था। वहां पर एक दिन भी ऐसा नहीं जाता था जब हम शांति से जिंदगी गुजार पाते हो। मैं वापस आकर अपने हिंदू भाइयों के साथ रहना चाहता था।ज्यादा प्रवासी पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हकीकत में वह लोग अलग शिविरों में स्थानीय लोगों से दूर रहते हैं और प्रशासन द्वारा उन्हें संदेह की नजरों से देखा जाता है और बर्ताव किया जाता है।

64 साल के खनारामजी साल 1997 में पाकिस्तान से भारत आए और साल 2005 में उन्हें भारतीय नागरिकता मिली। उन्होंने कहा कि भारत में जीवन से मोहभंग होने के बहुत से लोगों ने सदस्यता की उम्मीद छोड़ दी और पाकिस्तान वापस चले गए।उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से हमें कोई सहायता नहीं मिली। हम सिर्फ मवेशी की तरह है, जिसका कोई मालिक नहीं है। हम खुद से जीवित हैं। हमारी गरीबी से भी बदतर अधिकारियों द्वारा हम पर किया जाने वाला संदेह है।

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