Pages Navigation Menu

Breaking News

संघ कार्यालय पर संघी-कांग्रेसियों ने फहराया तिरंगा
पंपोर में मुठभेड़ में तीनों आतंकवादी मारे गए  
वाराणसी में केजरीवाल को दिखाए काले झंडे

काला धन छुपाने वाले कई बेनकाब….

black money blackवाशिंगटन । ‘पनामा पेपर’ के बाद अब ‘पैराडाइज पेपर्स’ में टैक्सचोरी कर विदेश में कालाधन छुपाने के मामलों से जुड़ी फाइलें सामने आई हैं, इसमें विश्व के कई देशों के प्रभावशाली हस्तियों के नाम शामिल हैं। इन निवेशकों में ब्रिटेन की महारानी की निजी जागीर भी शामिल है। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के वाणिज्य मंत्री की भी एक ऐसा कंपनी का पता चला है जो रूस के साथ व्यापार करती है और जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं।ये खुलासा अमेरिका के इंटरनेशनल  कॉन्सोर्टियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) पैराडाइज पेपर्स में किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह कि कि आईसीआईजे ने ही पिछले साल पनामा पेपर्स के जरिए कई अहम खुलासे किए थे। इस बात का भी खुलासा हुआ है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए पैसा जुटाने वाले और सीनियर एडवाइजर स्टीफन ब्रोनफमैन ने पूर्व सीनेटर लियो कोल्बर के साथ भी करीब 60 मिलियन डॉलर का राशि टैक्स हेवन देशों में जमा की की है। हालांकि रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया कि रॉस, ब्रोनफमैन या एलिजाबेथ की प्राइवेट प्रॉपर्टी अवैध तरीके से जुटाई गई। ब्रोनफमैन के नाम सामने आने से ट्रूडो की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दो साल पहले ट्रूडो आर्थिक असमानता और टैक्स खत्म करने के वादे के साथ ही सत्ता में आए थे। वहीं एलिजाबेथ के टैक्स हेवंस देशों में निवेश से ये सवाल उठ सकता है कि क्या ब्रिटेन की प्रमुख होने के नाते उन्हें ऐसा करना चाहिए?

180 देशों की कई प्रमुख हस्तियों ने किया है निवेश

  • लिस्ट में कुल 180 देशों के नाम हैं। कंज़र्वेटिव पार्टी के पूर्व डिप्टी चेयरमैन और बड़े दानदाता, लॉर्ड एश्क्रॉफ्ट ने अपने विदेशी निवेश के प्रबंधन में नियमों की अनदेखी की हो सकती है।
  • ट्रंप के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने एक जहाजरानी कंपनी में निवेश बरक़रार रखा जो रूस की एक ऊर्जा कंपनी के लिए गैस और तेल का परिवहन करके सालाना करोड़ों डॉलर कमाती है।
  • रूस की ऊर्जा फर्म में व्लादिमीर पुतिन के दामाद और अमरीका के प्रतिबंधों का सामना कर रहे दो लोगों का भी निवेश है।

कैसे सामने आए टैक्स चोरी के दस्तावेज?

दुनिया भर के 90 मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम (आईसीआईजे) ने इनकी जांच की। ज़्यादातर दस्तावेज़ बरमुडा स्थित ऐपलबी कंपनी के हैं जो कानूनी सेवाए मुहैया कराती है। कंपनी के दस्तावेज़ और कैरिबियाई क्षेत्र के कार्पोरेट रजिस्टर के दस्तावेज़ जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किए थे। अखबार ने अपने सूत्र सार्वजनिक नहीं किए हैं। लीक के जवाब में ऐपलबी ने कहा है, “हम इस बात को लेकर संतुष्ट हैं कि हमारी ओर से या हमारे क्लाइंट्स की ओर से कुछ भी ग़लत नहीं किया गया है।”

पिछले साल पनामा पेपर्स में भी लीक हुए थे कई दस्तावेज

पिछले वर्ष दुनिया में सबसे अधिक गोपनीयता से काम करने वाली पनामा की कंपनी मोसाक फोंसेका के लाखों कागजात लीक हो गए थे। इसमें लोग ऐसी जगह पर अपना पैसा लगाते हैं जहां टैक्स का कोई चक्कर ही नहीं हो। यानी ‘टैक्स चोरी का स्वर्ग’। खोज करने वाले पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय समूह ने 1 करोड़ 15 लाख गुप्त दस्तावेजों का निर्माण किया था। इसी में इसका भी खुलासा हुआ था कि आठ कंपनियों का नवाज शरीफ के परिवार के साथ रिश्ता है, जिसके चलते उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अपदस्थ कर दिया था। रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खास दोस्त सर्जेई रोल्दुगिन का भी नाम भी इसमें आया था। पैराडाइज की तरह भी पनामा में भी शेल कंपनियों के जरिए लोगों और कंपनियों ने पैसे, संपत्तियां या लाभ कहीं और भेजकर कम टैक्स अदा कर ज़्यादा फ़ायदा उठाया।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताब‌िक ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई मंत्रियों, कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रू़डो के मुख्य फंडरेजर के नाम भी इन दस्तावेजों में हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद और कारोबारी आरके सिन्हा, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन, जिक्वेस्टा हेल्थकेयर ( पहले सचिन पायलट और कार्ति चिदंबरम की स्वामित्व वाली), वाइएसआर कांग्रेस चीफ जगन मोहन रेड्डी, सन टीवी, एस्सार, एसएनसी लवलीन, विजय माल्या, राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत, कांग्रेस नेता सचिन पायलट, मीडिया लॉबिस्ट नीरा राडिया के नाम भी हैं। अभिनेता संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त के पुराने नाम दिलनशीं का भी जिक्र है। जयंत सिन्हा का नाम राजनीति में आने से पहले ओमिड्यार नेटवर्क में साझीदारी को लेकर सामने आया है। सांसद आरके सिन्हा की कंपनी एसआइएस सिक्यॉरिटीज का नाम  सामने आया है। अमिताभ बच्चन के बरमूडा की एक कंपनी में शेयर्स होने का भी खुलासा हुआ है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन लोगों ने विदेशी फर्मों और फर्जी कंपनियों की सहायता से अपने धन को ठिकाने लगाए। गुपचुप तरीके से टैक्स हैवेन्स में निवेश किया और कर की चोरी की। इन दस्तावेजों से हितों का टकराव भी उजागर हुआ है।

जिन दस्तावेजों की छानबीन की गई है, उनमें से ज्यादातर बरमूडा की लॉ फर्म ऐपलबाय के हैं। 119 साल पुरानी यह कंपनी वकीलों, अकाउंटेंट्स, बैंकर्स और अन्य लोगों के नेटवर्क की एक सदस्य है। इस नेटवर्क में वे लोग भी शामिल हैं जो अपने क्लाइंट्स के लिए विदेशों में कंपनियां सेट अप करते हैं और उनके बैंक अकाउंट्स को मैनेज करते हैं। खास बात यह है कि ऐपलबाय की दूसरी सबसे बड़ी क्लाइंट एक भारतीय कंपनी है, जिसकी दुनियाभर में करीब 118 सहयोगी कंपनियां हैं। ऐपलबाय के भारतीय क्लाइंट्स में कुछ ऐसे कॉरपोरेट हाउस और कंपनियां हैं जो अक्सर सीबीआइ और ईडी जांच के दायरे में आती रही हैं।

जयंत सिन्हा की सफाई

पैराडाइज पेपर्स के खुलासे पर जयंत सिन्हा ने कहा है कि राजनीति में आने से पहले उन्होंने ओमिड्यार नेटवर्क से इस्तीफा दे दिया था और कोई भी निजी ट्रांजेक्‍शन इसके जरिए नहीं की। उन्होंने बताया कि वे सितंबर 2009 में ओमिड्यार नेटवर्क से प्रबंध निदेशक के तौर पर जुड़े थे। वे कंपनी के भारत से जुड़े मामलों को देखते थे। दिसंबर 2013 में इस्तीफा देकर वे राजनीति में आए। सिन्हा ने कहा है कि 2010 में ओमिड्यार नेटवर्क का अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में निवेश की प्रक्रिया को उन्होंने शुरू किया था और उसके बाद नवंबर 2014 तक वह इस अमेरिकी कंपनी के बोर्ड में ओमिड्यार नेटवर्क की ओर से शामिल रहे। डी लाइट में वह दिसंबर 2013 तक ओमिद्यार नेटवर्क की तरफ से शामिल रहे। जनवरी 2014 से नवंबर 2014 तक वह डि लाइट के स्वतंत्र निदेशक रहे। सिन्हा ने कहा कि 2014 में केंद्रीय कैबिनेट  में शामिल होने से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया और अब वह किसी तरह से कंपनी के कामकाज से नहीं जुड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘चुनावी हलफनामे, लोकसभा और प्रधान मंत्री कार्यालय को मैंने अपनी समस्त हिस्सेदारी की जानकारी दे रखी है।‘

 मौनव्रत पर भाजपा सांसद

भाजपा सांसद आरके सिन्हा पैराडाइज पेपर्स खुलासे पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से बचते दिखे। सोमवार को जब पत्रकारों ने उनसे इस बाबत सवाल पूछा तो वह चुप्पी साध गए। पहले तो उन्होंने सिर हिलाकर जवाब देने से मना कर दिया। इसके बाद पत्रकारों से एक पेन लेकर एक कागज पर लिखा, ‘7 दिन के भागवत महायज्ञ में मौन व्रत है।’

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *