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संसद में हंगामें के निहितार्थ

BJP_Parliament_congressby manoj verma गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर लगाए गए आरोपों को लेकर आज कांग्रेस ने राज्यसभा की कार्यवाही ठप कर दी और लोकसभा से बहिर्गमन किया।डा सिंह पर गुजरात चुनाव में भाजपा को हराने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश करने के श्री मोदी के आरोपों को लेकर बने गतिरोध को दूर करने के लिए कल सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत विफल हो जाने के बाद आज कांग्रेस के सदस्यों ने राज्यसभा में न तो शून्यकाल होने दिया और न ही प्रश्नकाल और भाेजनावकाश के बाद भी सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी ।

उधर लोकसभा में भी मुख्य विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने प्रश्नकाल और शून्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग को लेकर हंगामा किया जिससे कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी 1 भोजनवकाश के बाद कार्यवाही शुरू होने पर भी उन्होंने शोरगुल और हंगामा किया और सदन से बहिर्गमन कर गए । इसके बाद वे पूरे दिन सदन में नहीं आये । उन्होंने कल भी लोकसभा से बहिर्गमन किया था और पूरे दिन सदन से गैरमौजूद रहे।राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडु ने मनमोहन मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माफी की कांग्रेसी सदस्यों की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि सदन के बाहर दिए गए बयान के लिए सदन में माफी नहीं मांगी जा सकती है। नायडु ने इस मुद्दे पर प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के दौरान यह बात कही। शून्यकाल में भी इसी मुद्दे पर स्थगन के बाद प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस सदस्य सदन के बीचों-बीच आ गए और ‘प्रधानमंत्री माफी मांगें’ के नारे लगाने लगे। इस पर सभापति ने कहा कि जब बयान सदन में नहीं दिया गया है तो यहां माफी माँगने का सवाल ही नहीं उठता।

हंगामा कर रहे कांग्रेस सदस्यों को प्रश्नकाल चलने देने की अपील करते हुए नायडु ने कहा कि कोई भी व्यक्ति माफी नहीं मांगेगा। सदन में कोई बयान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि बाहर दिए गए बयान के लिए सदन में कार्य स्थगन की परंपरा नहीं है। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर बाद दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इस मुद्दे के समाधान के लिए सरकार और विपक्ष के बीच मंगलवार को वार्ता हुई थी, लेकिन उसके बेनतीजा रहने के कारण कांग्रेस सदस्यों ने आज फिर इस मुद्दे को सदन में उठाया। शीतकालीन सत्र में अब तक चार दिन में से मात्र एक दिन ही कार्यवाही सुचारू तरीके से चली है और शेष तीन दिन कोई कामकाज नहीं हो सका है।

इसमें शक नहीं कि लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर ‘संसद’ में सदस्यों द्वारा लोकहित के मामले उठाए जाते हैं और सरकार लोकहित में ही फैसले भी लेती आई हैं, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कभी कुछ ऐसा भी घटता है जिससे हंगामें की स्थिति बन जाती है। इससे सदन को उबारने और पुन: कार्रवाई को सुचारु रुप से चलाने का दायित्व लोकसभा अध्यक्ष या सभापति के कंधों पर होता है, जिसका निर्वाहन करते हुए सदन की गरिमा भी बनाए रखी जाती है। इसी कड़ी में संसद का यह शीतकालीन सत्र भी जहां लोकहितकारी कार्यों के लिए याद किया जाएगा तो वहीं विपक्ष के हंगामें को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा। दरअसल एक तरफ जहां सत्र के देर से बुलाए जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा तो वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के खिलाफ ऐसी कुछ टिप्पणी कर दी गई जिससे विपक्ष ने सदन में हंगामा करते हुए टिप्पणी के लिए माफी मांगने की बात पर अड़ गए। इसे देखते हुए सोमवार को तो अनेक बार सदन की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा, मंगलवार को भी यही स्थिति बनती रही जबकि विपक्ष के पास मुद्दों की कमी नहीं रही। इस कारण सदन में एक बार फिर हंगामे का दौर चला और सरकार को घेरने में विपक्ष सफल नजर आया।

यह अलग बात है कि सदन के बाहर प्रधानमंत्री द्वारा की गई टिप्पणी को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कोई तवज्जो नहीं दी और उन्होंने कार्रवाई को सुचारुरुप से आगे बढ़ाया। इससे हटकर इस सत्र में एक ओर लोकसभा की लिस्‍ट में जहां राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा में कटौती का मामला अहम रहा वहीं एफआरडीआई बिल की वापसी की मांग और अनेक मुद्दे ऐसे देखने को मिले, जिसे लेकर विपक्ष का हंगामा करना तो बनता था। यहां राज्‍यसभा में भी दागी नेताओं पर विशेष अदालत के गठन समेत, पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने और किसानों की कर्जमाफी जैसे अनेक अहम मामले रहे हैं। इससे सदस्यों की गंभीरता और सदन में रखे जाने वाले विषयों की उपयोगिता भी प्रतिपादित होती हुई नजर आई। बहरहाल प्रधानमंत्री मोदी की पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विरुद्ध की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस का हंगामा और बहिर्गमन करना मामले की गंभीरता को ही रेखांकित करता नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी की टिप्‍पणी की निंदा करते हुए कांग्रेस सांसदों ने तो यहां तक कह दिया कि देश के लिए भरोसेमंद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर सवाल उठाया गया है अत: उन्‍हें सदन में आकर स्‍पष्‍ट करना होगा।

कांग्रेस सदस्यों के बर्ताव से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि ‘चुनाव खत्‍म हो गया, सड़क पर कही जाने वाली बातों को संसद में नहीं लाया जाए, मैं इस मामले को उठाने की अनुमति नहीं दे रही हूं।’ अध्यक्ष के इस कथन के बाद मामला स्वत: समाप्त हो जाता है, क्योंकि नियमानुसार सदन चलाने की जिम्मेदारी अध्यक्ष पर ही होती है। बावजूद इसके कांग्रेस सदस्य विषय को गंभीरतम बताते हुए अपनी मांग पर अड़े रहे जिस कारण महाजन ने कांग्रेस पार्टी की निंदा की और फिर कह दिया कि शीतसत्र के देरी से प्रारंभ होने को लेकर क्षोभ प्रकट कर रहे थे और अब हंगामा कर बाधित कर रहे हैं। इस प्रकार यहां अध्यक्ष ने यह बतलाने की भरसक कोशिश की कि हंगामा करना सही मायने में अपनी कही जाने वाली बात पर सदन का ध्यान आकृष्ट करने से होता है, लेकिन यहां तो हंगामा सिर्फ सदन को वाधित करने के लिए किया गया लगता है।

राज्यसभा में तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री से माफी मांगने की बात रखी। इस प्रकार कांग्रेस समेत अन्य सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों में इस टिप्पणी को लेकर हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से माफी मांगने की बात कही। सभी ने अच्छी तरह से अपनी बात रखी, लेकिन सरकार की ओर से कोई संतुष्टी वाला बयान ही नहीं आया। बावजूद इसके कहना पड़ रहा है कि विपक्ष हंगामा करते हुए इस बात का ध्यान रखे कि वह विरोध को विरोध के तहत तो नहीं कर रहा है, क्योंकि इससे उनकी गंभीरता और विषय की उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो जाते हैं। इस प्रकार देखा जाए तो विपक्ष की भी जिम्मेदारी बनती है कि वो यदि अपनी बात को पूरी ईमानदारी से और मजबूती से रखना चाहता है तो नियमों के अनुसार और सदन की गरिमा के तहत ही रखे न कि इस प्रकार से हंगामा खड़ा करे कि आगे चलकर उस बात को सिरे से ही नकार दिया जाए। अंतत: सदन में लोकहित के विषय उठाने के लिए और किसी मुद्दे पर सदन का ध्यान विशेष रुप से आकृष्ट करने के लिए हंगामें की आवश्यकता होती है तो जरुर करना चाहिए, लेकिन सिर्फ विरोध के लिए विरोध करना उचित नहीं कहा जा सकता है। वैसे भी सदन की गरिमा सर्वोपरी होती है, जिसका हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए, फिर चाहे वह सत्तापक्ष हो या विपक्ष।

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