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आंदोलनजीवी जमात से बचे देश : पीएम मोदी

नई दिल्ली: नई दिल्ली पीएम मोदी ने सदन सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए आंदोलनजीवी शब्द का प्रयोग किया। पीएम के इस शब्द से प्रशांतभूषण से लेकर कांग्रेस तक को मिर्ची लग गई। इतना ही नहीं यह शब्द ट्विटर पर ट्रेंड भी करने लगा। पीएम मोदी ने सदन में कहा कि पिछले कुछ समय से इस देश में ”आंदोलनजीवियों” की एक नई जमात पैदा हुई है जो आंदोलन के बिना जी नहीं सकती।मोदी ने कहा कि देश श्रमजीवी और बुद्धिजीवी जैसे शब्दों से परिचित है लेकिन पिछले कुछ समय से इस देश में एक नई जमात पैदा हुई है और वह है ”आंदोलनजीवी”। उन्होंने कहा, ”वकीलों का आंदोलन हो या छात्रों का आंदोलन या फिर मजदूरों का। ये हर जगह नजर आएंगे। कभी परदे के पीछे, कभी परदे के आगे। यह पूरी टोली है जो आंदोलन के बिना जी नहीं सकते। हमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा। वह हर जगह पहुंच कर वैचारिक मजबूती देते हैं और गुमराह करते हैं। ये अपना आंदोलन खड़ा नहीं कर सकते और कोई करता है तो वहां जाकर बैठ जाते हैं। यह सारे आंदोलनजीवी परजीवी होते हैं।”उन्होंने कहा, ”हम आंदोलन से जुड़े लोगों से लगातार प्रार्थना करते हैं कि आंदोलन करना आपका हक है, लेकिन बुजुर्ग भी वहां बैठे हैं। उनको ले जाइए, आंदोलन खत्म करिए। आगे मिल बैठ कर चर्चा करेंगे, सारे रास्ते खुले हैं। यह सब हमने कहा है और आज भी मैं इस सदन के माध्यम से निमंत्रण देता हूं।” उन्होंने कहा, ”यह, खेती को खुशहाल बनाने के लिए फैसले लेने का समय है और इस समय को हमें नहीं गंवाना चाहिए। हमें आगे बढ़ना चाहिए, देश को पीछे नहीं ले जाना चाहिए।”

देश को नई ‘एफडीआई’ से बचना होगा
प्रधानमंत्री मोदी ने टूलकिट के बहाने देश को नई एफडीआई से बचने को कहा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि देश को नई एफडीआई से बचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नई एफडीआई यानि कि फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी (विदेशी विनाशकारी विचारधारा) है। हमें एफडीआई की पुरानी परिभाषा यानि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को ही बरकरार रखना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राज्यसभा में अपने भाषण में कहा कि कृषि कानून जरूरी कानून हैं और इन्हें लागू करने का यह सही समय है. उन्होंने किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की और कहा कि ‘आंदोलनकारियों को समझाते हुए देश को आगे ले जाना होगा. आओ मिलकर चलें. अच्छा कदम है, किसी न किसी को करना था. मैंने किया है, गालियां मेरे हिस्से में जा रही हैं, जाने दो. कृषि मंत्री लगातार काम कर रहे हैं. एक-दूसरे को समझने-समझाने की जरूरत है.’PM ने कहा कि ‘किसान आंदोलन कर रहे हैं और यह उनका हक है लेकिन वहां बुजुर्ग बैठे हुए हैं, अच्छी बात नहीं है. उन्हें वापस ले जाइए. हम मिलकर बैठकर बात करेंगे. मैं बार-बार कह रहा हूं. हम सब मिल-बैठकर बात करने को तैयार हैं. मैं आज सदन से भी निमंत्रण देता हूं. पीएम ने किसानों को आश्वासन भी दिया कि ‘MSP था, MSP है और MSP रहेगा. हमें भ्रम नहीं फैलाना चाहिए.’

पीएम ने किसानों को संबोधित कर कहा कि ‘हमें समझना होगा कि हमारी खेती को खुशहाल बनाने के लिए फैसले लेने का समय है. यही समय है. इस सुधार को आगे ले जाना चाहिए. हमें एक बार देखना चाहिए कि कृषि परिवर्तन से बदलाव होता है कि नहीं. कोई कमी हो तो उसे ठीक करेंगे, कोई ढिलाई हो तो उसे कसेंगे. मैं विश्वास दिलाता हूं कि मंडियां और अधिक आधुनिक बनेंगी.’ सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए पीएम ने कहा कि ‘हर कानून में अच्छे सुझावों के बाद कुछ समय के बाद बदलाव होते हैं, इसलिए अच्छा करने के लिए अच्छे सुझावों के साथ, अच्छे सुधारों की तैयारी के साथ हमें आगे बढ़ना होगा.’मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि ‘चौधरी चरण सिंह हमेशा किसानों का सेंसस का जिक्र करते थे जिसमें यह बात सामने आई थी कि देश में 33 फ़ीसदी किसानों के पास 2 बीघा से कम जमीन है और 18 फ़ीसदी के पास 2 से 4 बीघे की जमीन है चौधरी चरण सिंह मानते थे कि छोटे किसानों के लिए हालात मुश्किल हैं.’ पीएम ने आगे कहा, ‘1971 में 1 हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों की संख्या 51 फीसदी थी जो आज बढ़कर 68% हो गई है.  यानी उन किसानों की संख्या बढ़ रही है जिनके पास बहुत कम जमीन है. आज देश में 86 फ़ीसदी ऐसे किसान हैं जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है. ऐसे 12 करोड़ किसान हैं. क्या इनके प्रति हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है? हमें चौधरी चरण सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए इस दिशा में कुछ करना होगा.’

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