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आस्था – आत्मविश्वास का प्रतीक है सोमनाथ मंदिर; पीएम नरेंद्र मोदी

modi santपीएम नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कई परियोजनाओं का शुक्रवार को उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें देश में धार्मिक टूरिज्म को मजबूत करने की जरूरत है। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा। यही नहीं उन्हें अपने इतिहास के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने सोमनाथ के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि आस्था को आतंकवाद से खत्म नहीं किया जा सकता। हमें अपने इतिहास से सीखना होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल इवेंट में सोमनाथ से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर बीजेपी के दिग्गज नेता रहे लालकृष्ण आडवाणी, होम मिनिस्टर अमित शाह, गुजरात के सीएम विजय रूपाणी और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं। लाल कृष्ण आडवाणी सोमनाथ मंदिर के ट्रस्ट से भी जुड़े रहे हैं।

सोमनाथ सिर्फ मंदिर नहीं है, आत्मविश्वास का प्रतीक है
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के दर्शन के लिए दुनिया भर से लोग आते रहे हैं। लेकिन अब यहां समुद्र दर्शन समेत कई अन्य चीजों के दर्शन कर सकेंगे। यहां अब पार्वती मंदिर और जूना सोमनाथ मंदिर के भी दर्शन लोग कर सकेंगे। इससे रोजगार के नए अवसर लोगों को मिलेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि आज सोमनाथ एग्जिबिशन गैलरी का भी लोकार्पण हो रहा है। इससे युवाओं को इतिहास से जुड़े और आस्था को प्राचीन स्वरूप में देखने का भी अवसर मिलेगा। सोमनाथ तो सदियों से सदाशिव की भूमि रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोमनाथ का यह मंदिर हमारे आत्मविश्वास का प्रेरणा स्थल है। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी व्यक्ति जब इसे देखता है तो उसे सिर्फ मंदिर ही नहीं दिखता बल्कि उसे ऐसा अस्तित्व नजर आता है, जो मानवता के मूल्यों को बताता है।

सोमनाथ को जितनी बार तोड़ा गया, उतनी ही बार खड़ा हुआ
सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष का भी जिम्मा संभालने वाले पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर आज भी पूरी दुनिया के सामने यह आह्वान कर रहा है कि सत्य को असत्य से हराया नहीं जा  सकता। आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता। इस मंदिर को सैकड़ों साल के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया, मूर्तियों को खंडित किया गया। लेकिन इसे जितनी ही बार गिराया, यह उतनी ही बार खड़ा हो गया। आज सोमनाथ मंदिर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक संदेश है कि तोड़ने वाली शक्तियां कुछ वक्त के लिए भले हावी हो जाएं। लेकिन उनका अस्तित्व स्थायी नहीं होता। वे ज्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकते। यह बात जितनी तब सही थी, जब कुछ आततायी मंदिर को गिरा रहे थे। आज भी उतनी ही सही है, जब विश्व आतंकवाद से आशंकित है। हम सभी जानते हैं कि सोमनाथ मंदिर की यह भव्यता कुछ सालों की यात्रा का परिणाम नहीं है बल्कि सदियों के संघर्ष का नतीजा है।

राम मंदिर का भी किया जिक्र, बोले- खड़ा हो रहा है नए भारत का गौरव
इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज राम मंदिर के रूप में नए भारत का गौरव भी खड़ा हो रहा है। हमें इतिहास से सीखकर वर्तमान को सुधारने और भविष्य बनाने की कोशिश होनी चाहिए। मैं जब भारत जोड़ो की बात करता हूं तो वह भविष्य के भारत के निर्माण के लिए अतीत से जोड़ने का संकल्प है। इसी आत्मविश्वास के चलते हमने अतीत के खंडहरों पर भविष्य निर्माण किया है।

पार्वती मंदिर और जूना सोमनाथ मंदिर का हुआ शिलान्यास
प्रधानमंत्री ने पार्वती देवी मंदिर का भी शिलान्यास किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस मौके पर मैं सरदार वल्लभभाई पटेल के चरणों में भी नमन करता हूं, जिन्होंने देश के प्राचीन गौरव को वापस दिलाने का काम किया था। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को स्वतंत्र भारत को स्वतंत्र चेतना का प्रतीक बनाने का काम किया था। पीएम मोदी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन में आधुनिकता और प्राचीनता का जो संगम था, आज उसका देश अनुसरण कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि यह जरूरी है कि हम धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को तलाशे। धार्मिक स्थानों से जो स्थानीय इकॉनमी का रिश्ता रहा है, उसे मजबूत करें।

आडवाणी के दिल में बसते हैं सोमनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर से जुड़े कई प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इस दौरान इस कार्यक्रम में लालकृष्ण आडवाणी भी नजर आए। वो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में जुड़े। लंबे समय बाद वो किसी कार्यक्रम में नजर आए। सोमनाथ मंदिर से लालकृष्ण आडवाणी की भी कई यादें जुड़ी हैं।सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट 8 सदस्यों का ट्रस्टी बोर्ड है। लालकृष्ण आडवाणी भी इसके सदस्य हैं। लालकृष्ण आडवाणी 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से ही अपने रथ यात्रा शुरू की। यात्रा के सोमनाथ से शुरू होने पर तब संयोजन की जिम्मेदारी मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास थी। आडवाणी ने अपनी इस यात्रा को सोमनाथ से अयोध्या तक भगवान राम के नाम पर एकजुट करने वाली यात्रा बताया था। सोमनाथ मंदिर में आडवाणी ने पहले पूजा की और फिर अयोध्या तक की यात्रा पर निकले। 23 अप्रैल 1999 से ही पूर्व उप प्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी सोमनाथ ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं।

सोमनाथ मंदिर का आत्मकथा में कुछ ऐसे जिक्र
सोमनाथ मंदिर के लिए आडवाणी के मन में कितनी गहरी आस्था है, इसका पता उनकी आत्मकथा से चलता है। ‘मेरा देश, मेरा जीवन’ में लालकृष्ण आडवाणी ने कई पन्ने सोमनाथ के ऊपर लिखे हैं। उन्होंने यह भी जिक्र किया है कि आखिर कब और कैसे उनके दिल पर सोमनाथ की यह अमिट छाप पड़ी। वे लिखते हैं, ‘अयोध्या राम मंदिर आंदोलन को उसके सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए जरूरी है कि पहले स्वतंत्र भारत में एक अन्य प्रसिद्ध मंदिर के पुनरुद्धार के बारे में जान लिया जाए। यहां मेरा अभिप्राय गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित प्रभास पाटन के सोमनाथ मंदिर से है। जिन्हें भारत के पौराणिक और ऐतिहासिक अतीत की जानकारी नहीं है, उनके लिए यह विश्वास कर पाना कठिन होगा कि किस प्रकार एक अकेला तटीय मंदिर भारत के संघर्ष, पीड़ा, विजय तथा उसके राष्ट्रीय स्वाभिमान की गाथा सुनाता है। अपनी युवावस्था में मैंने डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का एक ऐतिहासिक उपन्यास ‘जय सोमनाथ’ पढ़ा था, जिसका मेरे ऊपर गहरा प्रभाव पड़ा। यह उपन्यास मूलरूप से गुजराती भाषा में है, मैंने इसका हिंदी अनुवाद पढ़ा था। उस समय मेरी आयु बीस-बाइस साल रही होगी।’

अयोध्या के लिए यात्रा की शुरुआत सोमनाथ से ही क्यों
रथ यात्रा सोमनाथ से ही क्यों शुरू की इसके बारे में लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि 80 के दशक में जब अयोध्या मामला राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंच गया तो उस समय मेरे मस्तिष्क में महात्मा गांधी, सरदार पटेल, राजेंद्र प्रसाद और केएम मुंशी की एक-एक बात और कार्य गूंजने लगे, जो उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के सपने को साकार करते समय कहे थे और किए थे। वस्तुत अयोध्या आंदोलन सोमनाथ से जुड़ी हमारी भावना का ही हिस्सा था। वर्ष 1990 में भाजपा ने जब यह निर्णय लिया की पार्टी के अयोध्या में राम मंदिर के पुनर्निर्माण हेतु जनता का समर्थन प्राप्त करने के लिए मैं पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते राम रथयात्रा का नेतृत्व स्वयं करूं। यह ऐतिहासिक यात्रा प्रारंभ करने के लिए सोमनाथ से अधिक उपयुक्त स्थान और कोई नहीं था।

अस्तित्व मिटाने की हर कोशिश नाकाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ में कई परियोजनाओं का उद्धाटन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज मैं लौह पुरुष सरदार पटेल जी के चरणों में भी नमन करता हूं जिन्होंने भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित करने की इच्छाशक्ति दिखाई। इस मंदिर को सैकड़ों सालों के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया, यहां की मूर्तियों को खंडित किया गया, इसका अस्तित्व मिटाने की हर कोशिश की गई। लेकिन इसे जितनी भी बार गिराया गया, ये उतनी ही बार उठ खड़ा हुआ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले न्यास के अध्यक्ष भी हैं। वह इस पद पर आसीन होने वाले दूसरे प्रधानमंत्री हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के बाद मोदी दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें इस मंदिर न्यास का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। न्यास के रिकार्ड के अनुसार मोदी न्यास के आठवें अध्यक्ष बने हैं।

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