Pages Navigation Menu

Breaking News

31 दिसंबर तक बढ़ी ITR फाइलिंग की डेडलाइन

 

कोविड-19 वैक्सीन की एक खुराक मौत को रोकने में 96.6 फीसदी तक कारगर

अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए ना हो; पीएम नरेंद्र मोदी

सच बात—देश की बात

नए मंत्रियों के चयन में योग्यता एवं अनुभव को प्राथमिकता

Narendra_Modiलम्बे समय से केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विस्तार की प्रतीक्षा थी, जो शुभ एवं श्रेयस्कर रूप में पूरी हुई। इस पहले बड़े विस्तार और फेरबदल से यही स्पष्ट हुआ कि नए मंत्रियों के चयन में योग्यता एवं अनुभव को प्राथमिकता देने के साथ ही क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा गया। नई टीम निश्चित ही राष्ट्र के लिये विकास की उड़ान साबित होने के साथ-साथ नव-निर्माण का आह्वान है। लोकतंत्र में इस तरह का बदलाव आवश्यक होता है। जबसे नरेन्द्र मोदी ने दूसरी बार देश की बागडोर संभाली है, देश के सामने अनेक चुनौतियां एवं संकटपूर्ण स्थितियां हावी रही हैं। इन स्थितियों में जिम्मेदारियों का आकलन एवं बदलाव न केवल स्वाभाविक, बल्कि जरूरी-सा हो गया था।15 कैबिनेट और 28 राज्य मंत्रियों के साथ बड़े अनोखे और निराले अंदाज में मोदी सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। शपथ ग्रहण का समय छह बजे मुकर्रर था, लेकिन उससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा से ज्यादा इस बात की होने लगी कि किन मंत्रियों को हटाया जायेगा। सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर अमित शाह, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा के साथ मीटिंग की, तब लोगों को लगा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मंथन किया जा रहा है। लेकिन मीटिंग में कई मौजूदा मंत्रियों को मंत्री पद से हटाने की पटकथा लिखी जा रही थी। बैठक जैसे ही खत्म हुई तड़ातड़ इस्तीफों की झड़ी लग गई। स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार की अगुवाई करने वाले सभी मंत्रियों को एक साथ निपटा दिया गया। दर्जन भर मंत्रियों के औसत परफॉर्मेंस को देखते हुए उनकी छुट्टी कर दी गई। कुछों को इनाम भी मिला। कुल 43 मंत्रियों को शामिल किया गया। नई कैबिनेट में कई पूर्व चिकित्सक, आईएएस, इंजीनियर व उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों का जबरदस्त समावेश है।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली इस दूसरी सरकार ने जहां अनेक महत्वपूर्ण फैसले लेकर दुनिया को चौंकाया, आश्वस्त किया, वहीं कुछ ऐसे मोर्चे भी रहे, जहां संतोषजनक परिणाम हाथ नहीं आए। अनेक दिग्गज मंत्रियों के इस्तीफे और कई नए नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे के जो संकेत हैं, उनकी विवेचना जरूर होनी चाहिए। सरकार को यह यथोचित एहसास है कि उससे समूचे राष्ट्र को कहीं ज्यादा उम्मीदें हैं। विशेष रूप से चिकित्सा के मोर्चे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्य मंत्री के स्तर पर बदलाव साफ इशारा है। कोरोना ने पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह किया, साथ ही चिकित्सा व्यवस्था भी लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। मंत्रिमंडल में बदलाव की कुल हार्द यही है कि सरकार अपना चेहरा बदलकर आगे बढ़ना चाहती है। जन अपेक्षाओं पर खरा उतरना किसी भी सरकार की कसौटी होती है और इसके लिए उसके प्रत्येक मंत्री को लोगों के दिलों में झांक कर लोक कल्याण के लिये तत्पर होना ही चाहिए।

विकास ऊध्वारोहण की प्रक्रिया है। बीज उगता है, जब बरगद बन विश्राम लेता है। दीए की बाती जलती है तब सबको उजाला बांटती है। समन्दर का पानी भाप बन ऊंचा उठता है तब बादल बन जमीं को तृप्त करने को बरसता है। राष्ट्र जीवन का ऊध्वारोहण भी विकास की ऐसी ही प्रक्रिया से गुजरता है और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। एक सक्षम नेतृत्व इसके लिये हर तरह के बदलाव के लिये तत्पर रहता है। नरेन्द्र मोदी ऐसे ही अनूठे एवं समयोचित बदलाव करते आये हैं। उन्होंने इसके लिये पुरुषार्थ किया। तभी शक्तियां जागीं। स्वयं के एवं अपनी टीम के अस्तित्व की पहचान की तभी संभावनाओं को प्रस्तुति मिली। शनैः शनैः विकास के पायदान पर चढ़े हैं।

जब से मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर थामी, विकास की उड़ान और निर्माण का आह्वान आपके कर्तृत्व की विशेषता बनी है। ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री को मंत्रिमंडल में सब कुछ बदल देने लायक लगने लगा था। उन्होंने अच्छा काम करने वाले मंत्रियों को न केवल बनाए रखा है, बल्कि अनुराग ठाकुर और हरदीप सिंह पुरी समेत कई मंत्रियों को पदोन्नत भी किया गया है। उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक नए मंत्री बनाए गए हैं, तो कोई आश्चर्य नहीं। संगठन में अच्छा काम करने वाले भूपेंद्र यादव को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है, तो यह भाजपा संगठन में काम करने वालों के लिए एवं आगामी विधानसभा चुनाव की दृष्टि से उत्साहजनक बात है। यह एक पहले से बेहतर मिली-जुली सरकार बनाने की कोशिश है, संभावनाओं भरी उजली भोर है। मोदी केवल कल्पना के पंख लगाकर अंतहीन आकाश में निरुद्देश्य उड़ाना नहीं चाहते हैं। इसके लिये वे पहले पंखों की ताकत को परखते हैं और आसमां की सीमाएं भी मापते है। तभी निर्माण के लिए रखी गई बुनियाद से विकास का राजमहल बनाने में जुटते हैं।

भारत के विकास की अनगिनत उपलब्धियां आज राष्ट्र के उज्ज्वल इतिहास का स्वर्णिम पृष्ठ बन चुकी हैं। आपने कोरोना महामारी को परास्त करने, शिक्षा, चिकित्सा, अर्थ, राष्ट्र-विकास सभी के साथ जीवन-मूल्यों को तलाशा, उन्हें जीवनशैली से जोड़ा और इस प्रकार पगडंडी पर भटकते हुए जन-जन के लिए राजपथ प्रशस्त कर दिया। नरेन्द्र मोदी के पुरुषार्थी जीवन की एक पहचान है गत्यात्मकता। वे अपने जीवन में कभी कहीं रुके नहीं, झुके नहीं। प्रतिकूलताओं के बीच भी आपने लक्ष्य का चिराग सुरक्षित रखा। इसीलिए उनकी हर सांस अपने दायित्वों और कर्तव्यों पर चौकसी रखती है। खून पसीना बनकर बहता है। रातें जगती हैं। दिन संवरते हैं। प्रयत्न पुरुषार्थ बनते हैं और संकल्प राष्ट्र-विकास में ढलते हैं।

निश्चित ही नया मंत्रिमंडल जहां सरकार के पक्ष को मजबूत करेगा, वहीं लोगों के विश्वास को भी बढ़ाएगा। अमूमन देश में छोटे-छोटे बदलाव मंत्रिमंडल के स्तर पर होते थे, लेकिन यह बड़ा बदलाव बदली हुई सकारात्मक मानसिकता को भी जाहिर करता है। शायद केंद्र सरकार प्रदर्शन के स्तर पर समझौते के लिए तैयार नहीं है। जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी और अपना दल को मंत्रिमंडल विस्तार में महत्व दिया गया है, यह गठबंधन और आगे की चुनावी राजनीति के लिहाज से भी जरूरी था। मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या दोहरे अंकों में है, जो सरकार की महिलाओं की राजनीति में सक्रिय भागीदारी के संकल्प को आकार दे रही है। इसके साथ ही वंचित एवं पिछड़े तबकों की भी हिस्सेदारी बढ़ी है। सभी प्रमुख मजहबों, जातियों और समुदायों को इस टीम में जगह मिली है। इसका अर्थ है कि प्रधानमंत्री सोशल इंजीनियरिंग पर न केवल काम कर रहे हैं, बल्कि उसे बल भी प्रदान कर रहे हैं। मंत्रिमंडल में शामिल नेताओं में करीब 14 मंत्री पचास साल से कम उम्र के हैं, जो युवा भारत की युवा राजनीति के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। मोदी ने अपने साध्य को सदा शुद्ध साधन से जोड़े रखा। इसीलिए वे सत्ता और पद के मद में मदमस्त रहने वालों को पसन्द नहीं करते। यश और प्रतिष्ठा की बजाय वे कर्म करने वालों को आगे बढ़ाते हैं। इसके लिये वे किसी भी तरह की आलोचना और विरोध के लिये तत्पर रहते हैं। यह सब करते हुए मोदी प्रधानमंत्री होकर भी कभी किसी की अस्मिता पर हक और हुकूमत की शासना नहीं करते। गलतियों का परिष्कार करते हैं। सबको ऊंची उड़ान भरने के लिए खुला आसमां देते हैं। इसीलिए आपका अखण्ड व्यक्तित्व नमनीय बनता रहा है, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी नमनीय बना है। धूप, वर्षा और वृक्ष जैसे व्यक्तित्व विशेष में बंटते नहीं, वैसे ही आपकी चेतना भी तेरे मेरे की परिधि से मुक्त होकर सबके लिए समरसता बिखेरती रही है। आपने राष्ट्र को विकास की अनगिनत ऊंचाइयां दीं। आपकी जागरूकता ने राष्ट्र में गलत को सहा नहीं, शोधन किया। सही को सदा स्वीकृति दी, प्रोत्साहन और प्रेरणा दी। विकास की हर संभावना आप तक पहुंची, क्योंकि आपमें पुरातन का आग्रह नहीं रहा और न नये का अर्धशून्य आकर्षण। सही और गलत का विवेक सदा जागता रहा। इसलिए विकास के सौ-सौ सूरज एक साथ आपके प्रभावी एवं चमत्कारी नेतृत्व में राष्ट्र के पथ का आलोक बनते रहे हैं।

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी अपने मन्त्रियों से परिणाम चाहते हैं और जिसमें असफल पाये जाने पर उन्हें पद मुक्त करने में कोई संशय नहीं होता। लोकतन्त्र में सरकार की सफलता के लिए मन्त्रियों का योग्य होना बहुत जरूरी होता है जिसके बूते पर लोकतन्त्र चलता है और जागरूक लोकतंत्र में इसी आधार पर अब शासन-प्रशासन के मोर्चे पर जहां सरकार से लोगों को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद पहले की तुलना में ज्यादा होगी, वहीं राजनीतिक स्तर पर भी सरकार को संतुलन बनाकर चलना होगा। आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन या पार्टी ही नहीं, सरकार की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगेगी। जिन दिग्गजों को मंत्रिमंडल से अलग किया गया है, उन्हें भी व्यस्त रखने के उपाय करने पड़ेंगे। नए मंत्रियों के सामने लगभग तीन साल हैं, उन्हें न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि देश की नजरों में भी कारगर दिखना होगा, अपने होने का अहसास कराना होगा। जरूरी है कि ज्यादा ईमानदारी से जमीनी हकीकत के मद्देनजर सरकार की नई टीम लोगों के सपनों और उनसे किए गए वादों को साकार करे, घनघोर होते समस्याओं के बादलों की छंटनी करें, समस्यामुक्त जीवन का आश्वासन बने। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसी पराक्रमी, सुशासन के योद्धा के नेतृत्व में इस शेष कार्यकाल में नई टीम को इसलिए और भी तत्परता दिखानी होगा, क्योंकि कोरोना ने बहुत-सा समय बर्बाद करने के साथ ही मोदी सरकार के एजेंडे को जमीन पर उतारने में बाधाएं भी खड़ी कर दी हैं। इन बाधाओं को दूर करने में सफलता तभी मिलेगी, जब नए-पुराने मंत्री न केवल सरकार की, बल्कि आम जनता की अपेक्षाओं पर भी खरे उतरेंगे। हम सूरज का प्रकाश तो धरती पर नहीं ला सकते पर दीया बनकर अवश्य जल सकते हैं। नई टीम को दीया बनना ही होगा।

फिलहाल अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के बाद प्रधानमंत्री की कोशिश यही है कि जिन नए मंत्रियों को अपनी टीम में उन्होंने जोड़ा है। वह नवीनतम मंत्री दिए गए पद को रेवड़ियां नहीं समझेंगे, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी समझकर अपने दायित्वों का निर्वाह करेंगे और जनता की सेवा में तनमन से जुटेंगे। विस्तार के रूप में युवाओं से सजाई गई मोदी टीम में भूपेंद्र यादव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, हिना गावित, अजय भट्ट, सर्वानंद सोनोवाल, अनुप्रिया पटेल, अश्विनी वैष्णव, अजय मिश्रा जैसे ऊर्जावान मंत्रियों से खुद प्रधानमंत्री बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्हें उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि नए मंत्रियों की जिम्मेदारियां कुछ ही समय में परिणामोन्मुख के रूप में दिखाई देंगी। साथ ही शासन व्यवस्था में बदलाव लाने में लक्षित भी होंगी। इस बात से सभी वाकिफ हैं कि प्रधानमंत्री की टीम का हिस्सा बनने का मतलब काम करना होगा, न कि मंत्री बनकर रौब दिखाना और जलवा दिखाना।शासन व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री ने एक और नए मंत्रालय को बनाया है, मिनिस्ट्री ऑफ को-ऑपरेशन। इस मंत्रालय को बनाने का खास उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करना होगा। मंत्रिमंडल विस्तार को ज्यादातर लोग आगामी चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं। पर एक वर्ग इसे बदलाव का बड़ा कदम मानकर देख रहा है। नवीनतम मंत्रालय के जरिए प्रत्येक विभागों में निगरानी के तौर पर प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचे का प्रसार किया जाना बताया जा रहा है। हालांकि नफा-नुकसान एकाध वर्ष बीत जाने के बाद ही पता चलेगा। मोदी कार्यकाल के सात सालों में पहली मर्तबा मोदी कैबिनेट अब तक की सबसे युवा टीम है, जिसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी ठीक-ठीक बढ़ा है। विस्तार से पहले तक मंत्रियों की संख्या 53 मात्र थी, कई विभाग बिना मंत्रियों के रिक्त थे, उन्हें भी भरा गया है। कम मंत्रियों से कैबिनेट चलाने का एक खास मकसद मोदी का खर्चों में बचत करना भी था।

मंत्रिमंडल विस्तार में बड़े राज्यों का ज्यादा ख्याल रखा गया। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र आदि राज्यों से ज्यादा मंत्री बनाए गए हैं। केंद्र सरकार एनडीए गठबंधन की है तो बाकी सहयोगी दलों के नेताओं की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई। पर, दो नाम ऐसे हैं जिन पर आने वाले समय में परेशानियां हो सकती हैं। नारायण राणे और पशुपति कुमार पारस। नारायण राणे के नाम पर शिवसेना को आपत्ति है। कुछ समय से धीरे-धीरे भाजपा और शिवसेना के रिश्ते मधुरता की तरफ बढ़े हैं, इस बीच राणे को मंत्री बनाना दोनों के रिश्तों में खलल भी डाल सकता है। वहीं, एलजेपी के बागी सांसद और स्वंयभू पार्टी अध्यक्ष पशुपति पारस के नाम पर सांसद चिराग पासवान को घोर एतराज है। उनका कहना है कि उनकी बिना इजाजत के उनकी पार्टी से कोई मंत्री कैसे बन सकता है। इसके लिए उन्होंने कोर्ट तक जाने की धमकी दे डाली है।वैसे, बीते मंत्रिमंडल विस्तार के अनुभव तो यही कहते हैं कि केंद्र सरकारों में फेरबदल का मतलब सियासी जरूरतों का पूरा करना और चुनावों में फायदा उठना ही होता है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ दिखाई नहीं पड़ता। कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिनके हालात कोरोना संकट में खराब हुए हैं। मोदी टीम में विस्तार करने का मुख्य मकसद यही है कि उन क्षेत्रों में टीमवर्क के जरिए कठिन समस्याओं से निबटा जाए। हालांकि टाइमिंग कुछ ऐसी है जो सीधे आरोप लगाती है कि आगामी कुछ महीनों में पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, उनको ध्यान में रखकर मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया है। विपक्षी पार्टियां खासकर कांग्रेस तो यही कह रही है। बाकी आने वाला समय बताएगा, मंत्रिमंडल विस्तार फायदे के लिए किया गया या जनता की भलाई के लिये।

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »