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सच बात—देश की बात

मोदी का ‘ मतुआ ’ तीर ममता को क्यों लगा ?

modi-and-hasinaप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 में देश की सत्ता संभालने के बाद अब तक लगभग पूरे विश्व का भ्रमण कर चुके हैं. कुछ ही ऐसे गिने-चुने देश होगें जहां अभी तक मोदी का जाना नहीं हुआ है. हांलाकि प्रधानमंत्री पर इस बात को लेकर कटाक्ष भी किए जाते रहे हैं. मोदी पर विपक्ष पहले भी आरोप लगता रहा है कि वह देश में कम और विदेशों में ज्यादा समय गुजारते हैं और वह NRI पीएम बन गए हैं. लेकिन इस बार की तरह कभी उनके विदेशी दौरे पर इतना बवाल नहीं मचा था जितना कि बांग्लादेश के दौरे पर देखने को मिल रहा है. शुक्रवार और शनिवार को मोदी दो दिनों के दौरे पर बांग्लादेश में थे, जहां बांग्लादेश की आज़ादी के 50वें सालगिरह और बांग्लादेश के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान के जन्म शताब्दी के कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया गया था. अब यह संयोग की ही बात है कि पड़ोसी देश में यह समारोह उस समय हो रहा था जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी का बांग्लादेश दौरा इन्हीं दो कार्यक्रमों तक सीमित होता तो शायद किसी को कोई परेशानी नहीं होती. लेकिन मोदी एक दूरदर्शी और चतुर नेता हैं जो कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना लगाने की कला में माहिर हैं. मोदी जब बांग्लादेश गए तो उन्होंने लगे हाथ दो मंदिरों में पूजा करने का कार्यक्रम भी तय कर लिया. जशोरेश्वरी काली मंदिर और ओरकांडी के मतुआ मंदिर में शनिवार को मोदी ने पूजा अर्चना की. बात यहीं तक रहती तब भी ठीक था, पर लगभग सभी न्यूज़ चैनल्स पर इसे लाइव दिखाया गया. मतुआ मंदिर में पूजा करने के बाद मोदी ने वहां हिंदी में भाषण भी दिया जिसका बंगाली भाषा में साथ-साथ अनुवाद भी हो रहा था. भाषण में उन्होंने एक बात ऐसी कह दी जिससे पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुस्सा आ गया.
जोशेश्वरी काली मंदिर में पूजा करने से प्रभावित होंगे हिन्दू मतदाता?
पश्चिम बंगाल की संस्कृति में मां दुर्गा और मां काली का खास महत्व है. जहां जशोरेश्वरी काली मंदिर में पूजा करने और विश्व को कोरोना महामारी से मुक्ति की आराधना करने का मतलब पश्चिम बंगाल के हिन्दू मतदाताओं को प्रभावित करना हो सकता है. ओरकांडी के मतुआ मंदिर में पूजा के बाद भाषण और भाषण में यह कहना कि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनका प्रयास होगा कि भारत में रह रहे मतुआ समुदाय के लोग बिना किसी कठिनाई के मतुआ मंदिर में पूजा करने आ सकें से ममता बनर्जी को गुस्सा आ गया. मतुआ समुदाय के लगभग डेढ़ से दो करोड़ लोग अब भारत में रहते हैं और पश्चिम बंगाल के चुनाव में 35 से 50 सीटों पर इस समुदाय का सीधा प्रभाव होता है.

क्या मतुआ मंदिर के लिए भी बन सकता है ‘कॉरिडोर’
मतुआ समुदाय के लोग, जो हिन्दू धर्म को मानते हैं, दशकों पहले भारत में आ गए थे, लेकिन ओरकांडी और मतुआ मंदिर का उनके लिए विशेष महत्व है. जब भारत और पाकिस्तान के बीच सिक्ख समुदाय के लिए करतारपुर कॉरिडोर नवम्बर 2019 में खुला तो किसी को परेशानी नहीं हुई, इस कॉरिडोर के जरिये भारत के सिक्ख समुदाय के लोग बिना पासपोर्ट और वीजा के पाकिस्तान स्थित गुरुनानक के जनस्थान पर बने दरबार साहिब गुरूद्वारे तक जा सकते है. लेकिन जब मोदी ने मतुआ समुदाय के लोगों को बिना किसी कठिनाई के मतुआ मंदिर तक जाने की बात की तो हंगामा मच गया.

ममता बनर्जी ने की चुनाव आयोग से शिकायत
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायक करने की बात की है. शनिवार को जहां राजमहल यानि रेड कॉरिडोर इलाके के 40 सीटों के लिए मतदान हो रहा था, मोदी भक्तिभाव में लिप्त थे और ममता बनर्जी आग के गोले बरसा रही थीं. खड़गपुर में एक भाषण के दौरान ममता दीदी ने विरोध जताया कि मोदी बांग्लादेश जा कर पश्चिम बंगाल के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. दीदी ने 2019 के एक घटना का उल्लेख भी किया और कहा कि बांग्लादेश का एक प्रसिद्ध फ़िल्मी अभिनेता उनकी पार्टी का प्रचार कर रहा था तो मोदी सरकार ने बांग्लादेश सरकार को उसका पासपोर्ट और वीजा रद्द करने को कहा और फ़िल्मी सितारे को वापस बांग्लादेश जाना पड़ा. दीदी ने मोदी का भी पासपोर्ट और वीजा रद्द करने की मांग कर दी.

क्या ममता बनर्जी को चुनाव हारने का डर है
एक तो कांटे का चुनाव और ऊपर से दीदी के चुनाव हारने का भय, गुस्से में वह क्या कह गईं उसका अनुमान उन्हें नहीं होगा. मोदी की तुलना बांग्लादेश के फ़िल्मी अभिनेता से कैसी की जा सकती है? मोदी बांग्लादेश में भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर गए थे, ना कि बांग्लादेश में हो रहे किसी चुनाव में प्रचार करने. किसी विदेशी को किसी दूसरे देश में हो रहे चुनाव में प्रचार करने का अधिकार नहीं होता. वीजा कई तरह का होता है, मसलन पर्यटक वीजा, काम करने के लिए वीजा, बिजनस वीजा, चिकित्सा वीजा, वगैरह. पर आज तक चुनाव प्रचार का वीजा किसी देश ने जारी नहीं किया है.

मोदी का ‘मतुआ’ तीर ममता को क्यों लगा?
दीदी द्वारा 2019 में बांग्लादेश के फ़िल्मी अभिनेता को तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करने का न्योता देना और उन्हें मंच पर प्रस्तुत करना भारत के कानूनों का और वीजा के निमयों का उल्लंघन था, मोदी का बांग्लादेश के हिन्दू मतुआ समुदाय को संबोधित करना कानून के खिलाफ नहीं हो सकता. वह वहां से किसी को कमल के निशान पर बटन दबाने को नहीं कह रहे थे. हालांकि इसमें कोई शक नहीं कि मोदी की निगाहें कहीं थी और निशाना वह कहीं और साध रहे थे. यह तो 2 मई को जब चुनावों का परिणाम आएगा तब ही पता चलेगा की मोदी का निशाना कितना प्रभावी था और क्या मतुआ समुदाय सिर्फ इस बात पर कि मोदी उनके सबसे श्रद्धेय मंदिर पर पूजा कर आये बीजेपी की जीत का कारण साबित होगा? मोदी का निशाना मतुआ समुदाय पर लगा या नहीं, यह तो अभी नहीं कहा जा सकता, पर ममता बनर्जी को तीर जरूर चुभ गया है.

वैसे दीदी की जानकारी के लिए बता दें कि मोदी भी उसी गुजरात प्रदेश से आते हैं जहां महात्मा गांधी का जन्म हुआ था. कुछ वर्ष पहले अमित शाह ने महात्मा गांधी को एक चतुर बनिया कहा था, जिससे हंगामा हो गया था. अगर गांधी चतुर थे तो मोदी भी कम चतुर नहीं हैं. गांधी देश से अंग्रेजों को भगाना चाह रहे थे और मोदी भारत को कांग्रेस मुक्त बनाना चाहते हैं और पश्चिम बंगाल को भय मुक्त-ममता मुक्त.

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