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गुजरात में ‘अमृत महोत्सव’ की शुरुआत, मोदी ने दांडी मार्च को दिखाई हरी झंडी

modi-dandi-yatra-3454अहमदाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में देश की आजादी के 75वें साल के जश्न की शुरुआत की। इस मौके पर पीएम मोदी ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ पर वेबसाइट लॉन्च की। पीएम मोदी ने अभय घाट पर बापू को नमन कर अमृत महोत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर कश्मीर से कन्याकुमारी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। पीएम मोदी ने साबरमती आश्रम से 386 किलोमीटर लंबे दांडी मार्च को हरी झंडी दिखाई। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘पंडित नेहरू, बाबा साहेब अंबेडकर, मौलाना आजाद, सरदार पटेल के सपनों के भारत को बनाने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। देश के इतिहास में ऐसे कई संघर्ष हैं, जिनका नाम आज नहीं लिया जाता है लेकिन हर किसी का अपना एक महत्व रहा है। भक्ति आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया और पूरे देश में आजादी के महोत्सव को जन-जन तक पहुंचाया।’

आजादी के Unsung heros को किया याद
पीएम मोदी बोले, ‘आंध्र प्रदेश में मण्यम वीरुडु यानी जंगलों के हीरो अल्लूरी सीराराम राजू ने रम्पा आंदोलन का बिगुल फूंका। पासल्था खुन्गचेरा ने मिज़ोरम की पहाड़ियों में अंग्रेजों से लोहा लिया। गोमधर कोंवर, लसित बोरफुकन और सीरत सिंग जैसे असम और पूर्वोत्तर के अनेकों स्वाधीनता सेनानी थे जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया है। गुजरात में जांबूघोड़ा में नायक आदिवासियों का बलिदान हो, मानगढ़ में सैकड़ों आदिवासियों का नरससंहार हो, देश इनके बलिदान को हमेशा याद रखेगा।’

अमृत महोत्सव के दौरान पीएम मोदी बोले, ‘याद करिए, तमिलनाडु के 32 वर्षीय नौजवान कोडि काथ् कुमरन को, अंग्रेजों ने उस नौजवान को सिर में गोली मार दी, लेकिन उन्होंने मरते हुये भी देश के झंडे को जमीन में नहीं गिरने दिया। तमिलनाडु की ही वेलू नाचियार वो पहली महारानी थीं, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इसी तरह, हमारे देश के आदिवासी समाज ने अपनी वीरता और पराक्रम से लगातार विदेशी हुकूमत को घुटनों पर लाने का काम किया था।’पीएम मोदी ने कहा, ‘इसी भूमि के वीर सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा ने अंग्रेजों की धरती पर उनकी नाक के नीचे आजादी के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करते रहे लेकिन उनकी अस्थियां 7 दशकों तक इंतजार करती रहीं कि कब उन्हें भारत मां की गोद नसीब होगी। आखिरकार 2003 में विदेश से श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियां मैं अपने कंधे पर उठाकर ले आया था।’पीएम मोदी बोले, ‘हमारे स्वाधीनता संग्राम में कितने आंदोलन हैं जो देश के सामने उस रूप में नहीं आए जैसे आने चाहिए थे। ये एक-एक संग्राम, संघर्ष अपने आप में भारत की असत्य के खिलाफ सत्य की सशक्त घोषणाएं हैं। अन्याय और शोषण के खिलाफ भारत की जो चेतना राम के युग में थी, महाभारत के कुरुक्षेत्र में थी, हल्दीघाटी के युद्ध में थी, शिवाजी के उद्घोष में थी, वही शाश्वत चेतना वही शौर्य आजादी की हर लड़ाई में अपने भीतर प्रज्जवलित करके रखा था।’

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