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अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए ना हो; पीएम नरेंद्र मोदी

modi-un-1632575320पीएम नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए दुनिया को इस बात के लिए अलर्ट किया है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए ना हो। पीएम मोदी ने आतंकवाद पर पाकिस्तान और समुद्री स्वतंत्रता को लेकर चीन को जमकर लताड़ लगाई। पीए मोदी ने संयुक्त राष्ट्र को भी आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक तरफ भारत जहां अपनी आजादी के 75वें साल में 75 स्वदेश निर्मित उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है, वहीं कुछ देश आतंकवाद का राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने राजनीतिक अजेंडे के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाले पाकिस्तान को नाम लिए बिना चेताया और  कहा कि यह उसके लिए भी इतना ही खतरनाक है। पीएम मोदी ने कहा,”जो देश आतंकवाद का राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें समझना होगा, यह उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है।” पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज विश्व के सामने रूढ़ीवादी सोच और चरपमपंथ का खतरा बढ़ता जा रहा है। इन परिस्थितियों में, पूरे विश्व को विज्ञान आधारित, तर्कसंगत और  और प्रगतिशील सोच को विकास का आधार बनाना ही होगा।अफगानिस्तान को लेकर पीएम मोदी ने कहा, ”यह सुनिश्चि करना जरूरी है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए ना हो। हमें इस बात के लिए सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थिति का कोई देश टूल की तरह इस्तेमाल ना करे। अभी अफगानिस्तान की जनता, महिला, बच्चों और अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है। और हमें इसमें अपना रोल निभाना होगा।”

चीन को भी जमकर सुनाया 

पीएम मोदी ने समंदर में दादागिरी दिखाने वाले चीन पर भी निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, ”हमारे समंदर भी हमारी साझा विरासत हैं। इसलिए हमें ध्यान रखना होगा कि हमेरा समुद्रीय संसाधनों को हम यूज करें, एब्यूज नहीं। हमारे समंदर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी हैं। इन्हें हमें विस्तार और बहिष्कार की दौड़ से बचाकर रखना होगा। रूल बेस्ड ऑर्डर को सशक्त करने के लिए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक सुर में आवाज उठानी होगी।

संयुक्त राष्ट्र को दिखाया आईना

पीएम मोदी ने हाल के समय में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और चीन के बीच मिलीभगत के लगे आरोपों का इशारा करते हुए वैश्विक संस्था को भी आईना दिखाया। पीएम ने कहा, ”UN पर आज कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालों के हमने क्लाइमेट क्राइसिस में देखा है, कोविड के दौरान देखा है। दुनिया के कई हिस्सों में चल रही प्रॉक्सी वॉर, आतंकवाद और अफगानिस्तान संकट ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है।”पीएम मोदी ने कहा, ”कोरोना की उत्पत्ति के संदर्भ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग को लेकर वैश्विक गवर्नेंस से जुड़ी संस्थाओं ने, दशकों के परिश्रम से अपनी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। ये आवश्यकता है कि हम यूएन को वैश्विक व्यवस्था, वैश्विक कानून और वैश्विक मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर सुदृढ़ करें।” गौरतलब है कि हाल ही में चीन से मिलीभगत को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व बैंक पर सवाल उठ चुके हैं।

पीएम मोदी के यूएन महासभा में पहुंचने से पहले महासभा के बाहर कई सारे लोग उनके दीदार के लिए बेकरार नजर आए। यूएन महासभा में पहुंचने के बाद उनके संबोधन से पहले महासभा के सदस्यों ने पीएम का स्वागत किया। जिसके लिए पीएम मोदी ने उनका शुक्रिया अदा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कोरोना महामारी का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कोरोना की वजह से जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी।

भारत के लोकतंत्र का जननी बता पीएम मोदी ने कहा कि हम इसी साल 15 अगस्त को आजादी के 75वें साल में प्रवेश कर गये हैं। उन्होंने साफ किया कि हमारी विविधता हमारे मजबूत लोकतंत्र की पहचान है। पीएम ने अपने संबोधन के दौरान लोकतंत्र की ताकत का बखान करते हुए कहा, ‘विविधता हमारे लोकतंत्र की पहचान है। भारत लोकतंत्र की जननी है, मैं इसका प्रतिनिधित्व कर रहा हूं।’

वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को आमंत्रण

इस सबसे अहम मंच पर जानलेवा कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का वैक्सीन डिलीवरी प्लेटफॉर्म CoWIN एक ही दिन में करोड़ों वैक्सीन डोज लगाने के लिए डिजिटल सहायता दे रहा है। पीएम ने आगे कहा कि, ‘मैं UNGA को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली DNA वैक्सीन विकसित कर ली है जिसे 12 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। भारत के वैज्ञानिक एक नेजल वैक्सीन के निर्माण में भी लगे हैं। मानवता के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए भारत ने एक बार फिर दुनिया के जरूरतमंदों को वैक्सीन देनी शुरू कर दी है। मैं आज दुनिया भर के वैक्सीन मैन्युफैक्चरर को भी आमंत्रित करता हूं कि आइए और भारत में वैक्सीन बनाइए।’

आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘कोरोना महामारी ने दुनिया को सिखाया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को और विविधतापूर्ण बनाया जाए, इसलिए वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।’ हमारा ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ इसी भावना से प्रेरित है. स्वतंत्रता के 75 वर्ष के अवसर पर भारत भारतीय छात्रों द्वारा बनाए गए 75 उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च करने जा रहा है।’

अनुभव आधारित पढ़ाई पर जोर

साइंस बेस्ड अप्रोच को मजबूत करने के लिए भारत, अनुभव पर आधारित पढ़ाई को बढ़ावा दे रहा है। हमारे यहां, स्कूलों में हजारों अटल टिंकरिंग लैब्स खोली गई हैं, इंक्यूब्येटर्स बने हैं और एक मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम विकसित हुआ है। अपनी आजादी के 75वें वर्ष के उपल्क्ष्य में, भारत 75 ऐसे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने वाला है, जो भारतीय विद्यार्थी, स्कूल-कॉलेजों में बना रहे हैं।

UN को जरुरी सलाह

इसके साथ ही उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र को स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपनी इफेक्टिवनेस को सुधारना होगा, रिलायबिलिटी को बढ़ाना होगा। UN पर आज कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

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