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केरल राजनीतिक हत्याओं का केंद्र

rss keralaदेश के सर्वाधिक विकसित राज्यों में शुमार केरल राजनीतिक हत्याओं का केंद्र बनता जा रहा है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वामदलों के बीच जारी वैचारिक संघर्ष में अक्सर हत्या की खबरें आती रहती हैं. उत्तर केरल के कन्नूर जिले से राजनीतिक हत्या के सर्वाधिक मामले सामने आये हैं, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी वारदातों की संख्या अब बढ़ रही है.

तिरुअनंतपुरम में दलित युवक की हत्या से आक्रोश

तिरुअनंतपुरम के नजदीक कल्लामपल्ली में 29 जुलाई को 34 वर्षीय दलित युवक एसएल राजेश की 12 लोगों ने जघन्य हत्या कर दी थी. राजेश स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा हुआ था. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, राजेश के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाये गये. परिजनों के अनुसार हमलावरों ने राजेश के शरीर को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया था, पुलिस को कटे अंगों को कपड़े में लपेट कर ले जाना पड़ा. स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ताओं के विरोध से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बन गयी है.

भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पर हमला 

सिटी कॉलेज में 18 जुलाई को आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने सीपीआइ (एम) के छात्र संगठन एसएफआइ का झंडा हटा दिया, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गये. विरोध में सीपीआइ एम कार्यकर्ताओं ने 28 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पर हमला कर दिया, जिससे हिंसा भड़क उठी. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुम्मानम राजशेखरन ने भाग कर अपनी जान बचायी.

एनएचआरसी ने चार हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

राज्य में लगातार बढ़ रही राजनीतिक हत्याओं पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केरल सरकार और पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेज कर चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. एनएचआरसी ने कहा राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों के चलते हिंसा को सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता है. कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही हत्या से एनएचआरसी ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किये हैं. जनवरी माह में भी आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सिस्ट) की अगुवाई वाली एलडीएफ सरकार को कानून-व्यवस्था पर जवाब-तलब किया था.

दलों की शीर्ष नेतृत्व ने की वार्ता

संघ कार्यकर्ता राजेश की हत्या के बाद जारी तनाव को कम करने के लिए दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने बैठक की. वार्ता को जारी रखते हुए दोनों दलों ने कार्यकर्ताओं पर निगरानी रखने और हस्तक्षेप करने पर सहमति जाहिर की. इससे पहले राज्यपाल जस्टिस सदाशिवम ने मुख्यमंत्री को तलब कर राज्य में शांति बहाली का निर्देश दिया था.

आरएसएस ने केंद्र से दखल की मांग की

पिछले 13 महीनों में 14 कार्यकर्ताओं की हत्या का हवाला देते हुए आरएसएस ने राज्य में कानून व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए केंद्र सरकार से दखल देने की मांग है. संघ ने हत्याओं के लिए सीपीएम आरोप लगाया है. आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए हत्याओं की जांच की मांग की.

संसद में भी गूंजा हत्याओं का मामला

केरल में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की हत्या का मामला संसद में जोर-शोर से उठाया गया. लोकसभा में भाजपा सदस्यों ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हत्या अत्यंत निंदनीय है. कई सांसदों ने मामलों की एनआइए या सीबीआइ द्वारा जांच कराये जाने की मांग की है.

केरल में राजनीतिक हिंसा से जुड़े आंकड़े

केरल में राजनीतिक हिंसा कोई नयी बात नहीं है. इस राज्य में हिंसा की शुरुआत 20वीं सदी में हुई थी और अब तक इसमें कई लोग मारे जा चुके हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सिस्ट (सीपीएम) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच इस तरह की राजनीतिक हिंसा पिछले तीन दशक से जारी है. हालांकि, इस हिंसा में अन्य दलों के कार्यकर्ताओं की भी हत्या हुई है, लेकिन उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है. वर्ष 2000 से 2016 के बीच इस हिंसा में अब तक 69 लोगों की जान जा चुकी है. वर्ष 2000 से 2017 के बीच केरल में राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए लोगों से संबंधित आंकड़ों पर एक नजर.

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