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बंगाल में हिंसा के बाद लगाया जाए राष्ट्रपति शासन, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

election leadनई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक याचिका दायर की गई जिसमें पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद ”व्यापक हिंसा का आरोप लगाया गया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने, केंद्रीय बलों की तैनाती और लक्षित हिंसा की जांच शीर्ष अदालत के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले, दिन में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी शीर्ष अदालत में एक अर्जी दायर की थी जिसमें चुनाव प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद राज्य में हिंसक घटनाओं की सीबीआई जांच का अनुरोध किया गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पार्टी इस ने पश्चिम बंगाल की सत्ता में वापसी की है।

यह नई याचिका पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में व्यापक हिंसा और कानून-व्यवस्था को बाधित करने के मद्देनजर तमिलनाडु के ‘इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट ने वकील सुविदत्त एम एस के माध्यम से दायर की है। इस बीच, पुलिस ने कहा कि चुनाव बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुई हिंसा में कम से कम छह लोग मारे गए। पुलिस के अनुसार इनमें से एक व्यक्ति कोलकाता में मारा गया। भाजपा ने आरोप लगाया है कि टीएमसी समर्थित गुंडों ने उसके कई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी है, उसकी महिला सदस्यों पर हमला किया है, घरों में तोड़फोड़ की है, पार्टी सदस्यों की दुकानें लूटी हैं और पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की है। टीएमसी ने इन आरोपों से इनकार किया है।

fire-in-bjp-office_1619958515याचिकाकर्ता-ट्रस्ट ने पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की बहाली के लिए शीर्ष अदालत से केंद्र को सशस्त्र बलों सहित केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है, ”न्यायालय यह घोषणा करे संविधान के अनुच्छेद 356 के दायरे में पश्चिम बंगाल की संवैधानिक मशीनरी चरमरा गई है और इसलिए महामहिम राष्ट्रपति इस अनुच्छेद के तहत उचित कार्रवाई करें। संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, यदि कोई राज्य सरकार संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कार्य करने में असफल रहती है, तो केंद्र राज्य मशीनरी को सीधे अपने नियंत्रण ले सकता है।

याचिका में अनुरोध किया गया है कि पश्चिम बंगाल में कथित लक्षित हिंसा में राजनेताओं की भागीदारी पर गौर करने, यदि ऐसा है तो, के लिए शीर्ष अदालत के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए। इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट ने विधानसभा चुनाव के बाद जघन्य अपराधों लिप्त सभी Opposition-to-political-violence-in-West-Bengal-Chhattisgarh-BJP-leadersव्यक्तियों की तत्काल गिरफ्तारी और अभियोजन का अनुरोध किया गया है। इसमें राजनीतिक उपद्रवियों, या जघन्य अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति के अभियोजन से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए एक विशेष अदालत की स्थापना के लिए दिशा-निर्देश का भी अनुरोध किया गया है।

सत्तारूढ़ दल टीएमसी के चुनाव जीतने के एक दिन बाद भाजपा ने आरोप लगाया कि उसके चार कार्यकर्ताओं को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मार डाला। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि विपक्षी दलों के सदस्यों और समर्थकों की निर्मम हत्या की गई है, उनके घरों और निजी संपत्ति को नष्ट किया गया है। याचिका में कहा गया है कि इलाकों में बमबारी करने, हत्याएं, महिलाओं का शील भंग करने, दंगे-फसाद, लूटपाट, अपहरण, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने सहित कई जघन्य अपराध हुए हैं। याचिका में राज्य में विरोधी दलों का समर्थन करने वाली महिलाओं के खिलाफ सामूहिक बलात्कार और शारीरिक हमले की घटनाओं की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है, ”…बदमाशों ने राज्य को एक पूरी तरह से कानूनविहीन क्षेत्र में बदल दिया है।”

 

jpnaddabengal-1620188446कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी  के शपथ लेने के कुछ ही देर बाद भाजपा अध्यक्ष जे.पी नड्डा (JP Nadda) ने बुधवार को राज्य में राजनीतिक हिंसा से लोकतंत्र और लोगों की जान बचाने की शपथ ली. भाजपा ने दावा किया है कि विधान सभा चुनाव में जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कम से कम14 भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की हत्या कर दी है. इनमें एक महिला भी शामिल है.पश्चिम बंगाल में चुनाव रिजल्ट आने के बाद सोमवार को हिंसा में बीजेपी के कुछ कार्यकर्ता मारे गए और कई घायल हो गए। वहीं कई जगहों पर दुकानों में लूटपाट की गई। घटना से डरे सहमे करीब 300-400 बीजेपी के कार्यकर्ता बंगाल से सुरक्षा की आस में असम पहुंचे हैं। यह दावा असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने किया है।हेमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को ट्वीट करके कहा कि एक दुखद घटनाक्रम में 300-400 बीजेपी बंगाल कार्यकर्ता और परिवार के सदस्यों ने असम में धुबरी में आकर रुके हैं। उन लोगों ने बंगाल में अत्याचार और हिंसा का सामना करने के बाद बॉर्डर पार किया है। हम सभी को आश्रय और भोजन दे रहे हैं। ममता बनर्जी दीदी को लोकतंत्र के इस गंदे नाच को रोकना होगा। बंगाल बेहतर का हकदार है।

‘नतीजों के बाद राज्य में हिंसा जारी’ 

कोलकाता के सेंट्रल पार्क स्थित महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की प्रतिमा के सामने पार्टी की ओर से आयोजित एक धरने में मंगलवार को शामिल होने के बाद जेपी नड्डा (JP Nadda) ने कहा कि पूरे देश को पता होना चाहिए कि चुनावी नतीजों के बाद राज्य में किस प्रकार की हिंसा हो रही है. पार्टी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में नड्डा ने कहा, ‘मैं उत्तरी चौबीस परगना जिले का दौरा करूंगा और इस हिंसा के शिकार लोगों के दर्द साझा करूंगा. हम पूरे देश को इस बारे में बताना चाहते हैं.’

भाजपा के विधायकों, सांसदों ने ली शपथ

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने कहा, ‘हम बंगाल के लोगों की सेवा करते रहेंगे और उनके सपनों को साकार करने में मदद करते रहेंगे. हम इस राजनीतिक हिंसा की कड़ी को तोड़कर ही रहेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘बंटवारे के समय देखी गई हिंसा बंगाल में लौट आई है. हम लोगों की सेवा करते रहेंगे और राज्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जी की दूरदृष्टि को आगे ले जाते रहेंगे.’ लोकतंत्र की रक्षा और लोगों की जान बचाने संबंधी शपथ को भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने पढ़ा जिसे भाजपा के विधायकों, सांसदों और नेताओं ने दोहराया.

कार्यकर्ता के घर पहुंचे नड्डा

नड्डा ने कहा, ‘संविधान में प्रदत्त अधिकारों के तहत कोई भी शपथ ले सकता है. आज हम सब यहां राज्य, संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र को बचाने की शपथ लेने के लिए इकट्ठा हुए हैं.’ बाद में नड्डा ने उत्तरी चौबीस परगना का दौरा किया और एक भाजपा कार्यकर्ता के परिजनों से मुलाकात की. भाजपा का आरोप है कि दो मई को तृणमूल कांग्रेस के ‘गुंडों’ द्वारा किए गए हमले में पार्टी कार्यकर्ता की मां की कथित तौर पर मौत हो गई थी.

लोगों को असम में लेनी पड़ रही शरण

नड्डा ने कहा, हालात यह हैं कि लोगों को असम में जाकर शरण लेनी पड़ी है लेकिन अब हम असहिष्णुता के विचार को खत्म करेंगे. उन्होंने कहा पिछले वर्ष AMPHAN आया था इस वर्ष MAMATA-PHAN आया है. नड्डा ने कहा कि बंगाल में ममता जीती लेकिन मानवता हार गई. जान जानेवालों की संख्या 14 तक पहुंच गई है, पता नहीं कहां तक जाएगा ये आंकड़ा.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिंसा की जांच का आदेश दिया
उधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में चुनाव के बाद हिंसा के मामले सामने आने के बाद जांच का आदेश दिया है। केंद्र ने राज्य में विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हमले की घटनाओं को लेकर सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने को कहा है। अधिकारियों ने बताया कि बर्द्धमान जिले में रविवार और सोमवार को तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के समर्थकों में कथित झड़प में चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि मारे गए लोगों में तीन पार्टी के समर्थक थे।

जिला प्रशासन ने मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की
एनएचआरसी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद सोमवार को हुई हिंसा में कुछ लोगों की मौत के बारे में अखबारों में प्रकाशित खबरों का उसने संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच कथित तौर पर झड़पें हुई, पार्टी के कार्यालयों में आगजनी की गई और कई मकानों में तोड़फोड़ के साथ ही लूटपाट की गई। आयोग ने कहा कि ऐसा लगता है कि जिला प्रशासन और कानून लागू करने वाली स्थानीय एजेंसियों ने प्रभावित लोगों के मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की।

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