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फिर आतंकी साजिशों से घिरा पंजाब !

terrorist punjabचंडीगढ़. लुधियाना कोर्ट की 6 मंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर हाल ही में बम ब्लास्ट हुआ. इसमें एक व्यक्ति के चीथड़े उड़ गए व बाहर से गुजर रहे एडवोकेट और 2 महिलाओं समेत 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. चुनाव से पहले चौथे महीने में यह छटा ब्लास्ट है. पंजाब में ऐसा नहीं है कि चुनाव के दौरान ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं. अगर 2002 से घटनाओं पर गौर करें तो पंजाब में लगातार आतंकवाद अपनी जड़ों को जीवित करने की कोशिश कर रहा है.हालांकि, इस घटना को पूरी तरह से चुनाव से ही जोड़ कर देखा जा रहा है. इस बात के लिए पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह ने फरवरी 2019 में  खुलासा किया था. उन्होंने अभी भी आगाह किया है कि पंजाब की अमन और शांति खतरे में है और घटना के दोषियों को ट्रेस किया जाना चाहिए. पिछले कुछ सालों से जो पंजाब में घटनाएं हुई हैं, इससे यही प्रतीत होता है कि पंजाब एक बार फिर से आतंकवाद के मुहाने पर खड़ा है.

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे), बब्बर खालसा जैसे सिख आतंकवादी संगठन राज्य के अन्य शहरों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। सूत्र ने कहा कि इन आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) द्वारा सक्रिय रूप से समर्थन दिया गया है जो उन्हें चुनावी राज्य में शांति और सद्भाव बिगाड़ने के लिए उकसा रहा है।एजेंसियों ने राज्य प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने और राज्य भर में कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी है, जबकि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को ड्रोन पर विशेष ध्यान देने के साथ पंजाब में पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा पर घुसपैठ के प्रयासों की जांच करने के लिए कहा गया है। हालांकि 23 दिसंबर को लुधियाना में हाल ही में हुए विस्फोट के मुख्य साजिशकर्ता खालिस्तानी आतंकवादी जसविंदर सिंह मुल्तान को जर्मनी की आतंकवाद विरोधी एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा प्रतिष्ठान में खतरे की घंटी बजा दी है।

खुफिया एजेंसियों को यह भी इनपुट मिला है कि एसएफजे और बब्बर खालसा के कई सक्रिय सदस्यों को आईएसआई द्वारा विधानसभा चुनावों में पंजाब को अस्थिर करने के लिए और अधिक आतंकवादी हमले करने का काम सौंपा गया है। लुधियाना विस्फोट की घटना में, जांच एजेंसियों ने यह भी पाया है कि विस्फोट के पीछे आईएसआई है और विस्फोट में मारे गए गगनदीप सिंह के संपर्क में था।जांच के दौरान, जांच एजेंसियों को एसएफजे सदस्यों – हरविंदर सिंह और जसविंदर सिंह मुल्तान की भूमिका मिली, जो जर्मनी में थे। वे एसएफजे के अध्यक्ष अवतार सिंह पन्नू और एसएफजे के पदाधिकारी हरमीत सिंह के संपर्क में थे। अधिकारियों ने आगे कहा कि भारतीय जांच एजेंसियों ने इस मामले में जुटाए गए सबूतों को बर्लिन में आतंकवाद रोधी एजेंसियों को साझा किया और उसके बाद मुल्तान को गिरफ्तार कर लिया गया। मुल्तान ने जर्मनी में एसएफजे के अलगाववादी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और हाल ही में यह पता चला था कि वह अपने पाकिस्तान स्थित गुर्गों-सह-तस्करों की मदद से पाकिस्तान से हथियारों, विस्फोटकों, हथगोले और गोला-बारूद की खेप की व्यवस्था कर रहा था।

पंजाब की घटना संयोग नहीं एक खतरनाक प्रयोग!

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक अब एक बहुत बड़ा मुद्दा बनती जा रही है. अब इसमें भारत के विपक्षी नेताओं के साथ-साथ पाकिस्तान की ISI और दुनियाभर में सक्रिय खालिस्तानी और भारत विरोधी ताकतें शामिल हो गई हैं. इन सबने मिल कर एक वैसी ही संगठित मुहिम चलाई है, जैसी किसान आंदोलन के दौरान चलाई गई थी. ये सारी भारत विरोधी ताकतें चाहती हैं कि नफरत पैदा कर के भारत के दिल से पंजाब और पंजाबियों को बाहर निकाल दिया जाए. वो चाहती हैं कि पंजाब में फिर से वैसा ही अलगाववादी माहौल पैदा हो जाए, जैसा 1980 के दशक में हुआ था.

पंजाब की घटना खतरनाक प्रयोग!

इस घटना का एक Latest Video पूरी कहानी को खुद बयां रहा है. इस वीडियो में दिख रहा है कि कैसे प्रधानमंत्री का काफिला खुली सड़क पर ट्रैफिक के बीच 20 मिनट तक फंसा रहा. अब तक उनके काफिले की इतनी पास से तस्वीरें नहीं आई थीं. लेकिन अब इस वीडियो से ये स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री की गाड़ी उग्र भीड़ से ज्यादा दूर नहीं थी. पुलिस ने जिस तरफ अपनी बसें और गाड़ियां लगा कर प्रदर्शनकारियों को रोका हुआ था, वो जगह प्रधानमंत्री की गाड़ी से 500 मीटर दूर भी नहीं थी.वैसे तो किसी भी घटना का वीडियो तभी आता है, जब वो घटना हो जाती है. पहले से कोई नहीं बता सकता कि किस जगह, क्या होने वाला है. लेकिन इस मामले में इतने सारे इत्तेफाक हैं कि अब ऐसा लगता है कि ये घटना असल में एक संयोग नहीं बल्कि एक खतरनाक प्रयोग था.

एनिमेटेड वीडियो से साजिश का खुलासा

5 जनवरी को फिरोजपुर में प्रधानमंत्री के साथ जो कुछ भी हुआ, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर एक साल पहले ही आ गया था. ये एक Animated Video है, जिसमें दिखाया गया है कि ट्रैक्टर पर आई उग्र भीड़ प्रधानमंत्री मोदी के काफिले को फिरोजपुर जैसे ही एक Flyover पर घेर लेती है और जब इस भीड़ में शामिल लोग प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात जवानों को मारने के लिए दौड़ते हैं तो ये सारे सुरक्षाकर्मी वहां से भाग जाते हैं. प्रधानमंत्री अकेले असहाय इस भीड़ के बीच फंस जाते हैं और इसके बाद उन्हें चारों तरफ से घेर लिया जाता है. उनकी हत्या की कोशिश की जाती है.ये Video सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Youtube पर 1 दिसम्बर 2020 को अपलोड किया गया था. यानी फिरोजपुर की घटना से 400 दिन पहले ही सोशल मीडिया पर ये बता दिया गया था कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी को एक फ्लाईओवर पर घेर लिया जाएगा. इस वीडियो को अपलोड करने वाले Youtube Acconut का नाम धक्का गेमिंग है जो अमेरिका से ऑपरेट होता है. ये एक और इत्तेफाक है कि खालिस्तानी संगठन Sikhs For Justice का दफ्तर भी इसी अमेरिका में हैं और इसका नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू भी यहीं ये ऑपरेट करता है. ये खालिस्तानी ताकतें, पंजाब ही नहीं बल्कि पंजाबियों के भी खिलाफ हैं.

प्रधानमंत्री को मारने की प्लानिंग?

वीडियो के Background में एक पंजाबी गाना भी चल रहा है, जिसकी कुछ लाइनों में ये कहा गया है कि प्रधानमंत्री पंजाब की जमीन पर पैर रख कर तो देखें फिर ये लोग उनका ऐसा हश्र करेंगे, जिसे कोई नहीं भुला पाएगा. इसी तरह के Animated Videos की इस समय सोशल मीडिया पर बाढ़ आई हुई है. हमने आपके लिए ऐसे तीन Videos निकाले हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी को एक Flyover पर उग्र भीड़ के बीच फंसा हुआ दिखाया जाता है. इनमें एक वीडियो में उन्हें ट्रैक्टर से बांध कर Flyover से लटके हुए भी दिखाया गया है. इससे आप समझ सकते हैं कि अगर उस दिन प्रधानमंत्री का काफिला वापस दिल्ली नहीं लौटता तो उनके साथ Flyover पर क्या हो सकता था.ये सारे Videos दिसम्बर 2020 और जनवरी 2021 के बीच अपलोड किए गए थे. यानी जब दिल्ली मे किसान आंदोलन चल रहा था. दूसरी बड़ी बात, इन सभी Videos के Background में गाने अलग अलग हैं, जिनमें प्रधानमंत्री को धमकी दी जा रही है और बताया जा रहा है कि उन्हें कैसे घेर कर मारा जाएगा.

पंजाब में असंतोष पैदा करने की कोशिश

इस समय सोशल मीडिया पर चारों तरफ एक खतरनाक Propaganda चल रहा है, जिसका मकसद है, किसी भी कीमत पर पंजाब और पंजाबियों को भारत से अलग कर दिया जाए. इसके लिए सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी वीडियो फैलाए जा रहे हैं, जो पंजाब के लोगों में असंतोष पैदा कर सकते हैं. हमें एक ऐसा ही फर्जी वीडियो मिला है, जिसके लिए ये कहा जा रहा है कि 6 जनवरी यानी कल जब प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में Cabinet Committee on Security की बैठक हुई, तब इस बैठक में सिखों को सेना से बाहर करने पर चर्चा हुई थी. इस वीडियो में जो ऑडियो चल रहा है, वो दरअसल इस बैठक का है ही नहीं. ये ऑडियो Clubhouse App पर हुई एक Audio Chat का है, जिसमें कुछ लोग ऐसी बातें कह रहे थे. लेकिन पाकिस्तान की ISI ने इस ऑडियो को निकाल कर इसे भारत सरकार की बैठक के Background में लगा दिया. फिर ISI द्वारा सिख महिलाओं के नाम से ऐसे Twitter Handle क्रिएट गए, जिनसे इस फर्जी वीडियो को वायरल किया गया और पंजाब के लोगों में भारत के खिलाफ नफरत भरने की कोशिश की गई.

गृह मंत्रालय ने शुरू की जांच

इन तमाम Videos और सबूतों को देखकर ऐसा लगता है कि इस घटना के पीछे कोई गहरी साजिश हो सकती है, जिसकी जांच अब शुरू हो गई है. आज केन्द्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने फिरोजपुर के उस Flyover पर जाकर स्थिति को समझने की कोशिश की, जहां प्रधानमंत्री का काफिला फंसा था. इस दौरान मंत्रालय की टीम के साथ फिरोजपुर पुलिस के IG और SSP मौजूद थे. इसके अलावा इस टीम ने पंजाब के Additional DGP, IGP, DIG फिरोजपुर और SSP समेत कुल 13 पुलिस अफसरों को समन भेजकर तलब किया है. इन पुलिस अफसरों से ये पूछा जा सकता है कि उन्होंने सड़क मार्ग खुलवाने के लिए कड़े कदम क्यों नहीं उठाए. क्योंकि ये जानकारी उन्हें पहले से थी कि पंजाब दौरे के समय प्रधानमंत्री की जान को खतरा हो सकता है.इसका जिक्र प्रधानमंत्री की सुरक्षा करने वाले Special Protection Group यानी SPG ने अपनी 3 जनवरी को लिखी एक चिट्ठी में भी किया था. ये चिट्ठी पंजाब पुलिस के DGP को लिखी गई थी. इसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री को ऐसे आतंकवादी और खालिस्तानी संगठनों से खतरा हो सकता है, जिन्हें पाकिस्तान का समर्थन हासिल है. इसमें इन खालिस्तानी संगठनों के नाम भी बताए गए हैं.

संवेदनशील इलाका है फिरोजपुर

SPG, पंजाब पुलिस के DGP को इस बात को लेकर भी सावधान करती है कि, जहां फिरोजपुर में प्रधानमंत्री मोदी की रैली होनी है, वो जगह पाकिस्तान से सिर्फ 14 से 15 किलोमीटर दूर है. इस इलाके में पिछले कुछ समय में पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों द्वारा हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के लिए Drones का सहारा लिया गया है. 2021 में यहां Drones से संबंधित 59 गतिविधियां हुईं थी, यानी ड्रोन अटैक की आशंका थी.पिछले साल फिरोजपुर में दो बम धमाके भी हुए थे, इसलिए SPG ने पंजाब पुलिस के DGP को सारे इंतजाम पहले से तैयार रखने के लिए कहा था. ये भी आशंका जताई थी कि इस दौरे पर फिरोजपुर जैसी घटना हो सकती है.

2002 से हो रही घटनाएं चिंताजनक
1 जनवरी, 2002 को हिमाचल प्रदेश के साथ पूर्वी पंजाब की सीमा के करीब, डमटाल में एक फायरिंग रेंज पर अज्ञात आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें तीन भारतीय सेना के जवान मारे गए थे और पांच अन्य घायल हो गए थे.
31 जनवरी 2002 को होशियारपुर जिले के पतराना में पंजाब रोडवेज की बस में हुए विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई थी और 12 अन्य घायल हो गए थे.
31 मार्च 2002 को लुधियाना से करीब 20 किलोमीटर दूर दरोहा में फिरोजपुर-धनबाद एक्सप्रेस ट्रेन में हुए बम विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई और 28 अन्य घायल हो गए थे.
28 अप्रैल 2006 को जालंधर बस टर्मिनल पर 45 यात्रियों को ले जा रही एक बस में हुए बम विस्फोट में कम से कम आठ लोग घायल हो गए थे.
14 अक्टूबर 2007 को लुधियाना के एक सिनेमा हॉल में हुए बम विस्फोट में एक 10 साल के बच्चे सहित सात लोगों की मौत हो गई और 40 अन्य घायल हो गए.
27 जुलाई, 2015 को गुरदासपुर जिले के दीना नगर कस्बे में एक पुलिस थाने पर तीन आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में पंजाब पुलिस अधीक्षक सहित सात अन्य लोग मारे गए थे. तीनों आतंकवादी भी मारे गए थे.
5 दिसंबर 2015 को डूंगरी गांव मकसूदा में कार बम ब्लास्ट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.
2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर हमला हुआ था जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे.
31 जनवरी 2017 को पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले मंडी मोड़ ब्लास्ट में पांच बच्चों सहित सात लोगों की मौत हुई थी.
14 सितंबर 2018 को जालंधर के मकसूदां में बम फेंके गए थे.

3 और 8 जून, 1984 के बीच, अमृतसर में हरमिंदर साहिब परिसर पर नियंत्रण पाने और जरनैल सिंह भिंडरावाला और उनके सशस्त्र अनुयायियों को पवित्र सिख इमारतों से हटाने के लिए प्रीमियर इंदिरा गांधी के आदेश पर ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया गया था. आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, ऑपरेशन ब्लू स्टार में हताहतों की कुल संख्या लगभग 2,000 थी. कुछ 83 भारतीय सेना के सैनिक और 492 नागरिक मारे गए, हालांकि कई अपुष्ट रिपोर्टों ने सुझाव दिया कि हताहतों की संख्या 5,000 से अधिक थी. इसके बाद, सिख विरोधी दंगों में 3,000 से अधिक सिख मारे गए.

नौ बड़े साजिशकर्ता: कोई पाकिस्तान तो कोई अमेरिका से रच रहा साजिश

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब में फिर से आतंकवाद को जिंदा करने की नापाक साजिश रचने लगी है। शुक्रवार को फगवाड़ा पुलिस ने जालंधर से श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार जसबीर सिंह रोडे के बेटे गुरमुख सिंह को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है। जसबीर सिंह रोडे जरनैल सिंह भिंडरावाला का भतीजा है। बरामद किया गया गोला बारूद पाकिस्तान से आया है।

1- गुरपतवंत सिंह पन्नू
अमेरिका में बैठा गुरपतवंत सिंह पन्नू सिख फॉर जस्टिस आतंकी संगठन चलाता है, जिसको भारत सरकार ने प्रतिबंध कर रखा है। भारतीय तिरंगे को जलाना, पंजाब के युवाओं को भड़काना और रेफरेंडम 2020 को चलाकर पंजाब को भारत से अलग करने का सपना देखने वाले पन्नू पर पंजाब में कई मामले दर्ज हैं।

2- गुरमीत सिंह बग्गा
जर्मनी में छिपा खालिस्तानी आतंकी गुरमीत सिंह बग्गा पंजाब के होशियारपुर जिले का रहने वाला है। जर्मनी से पंजाब में आतंकवाद की साजिश रचने वाला बग्गा के छोटे भाई गुरदेव सिंह उर्फ प्रायटी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। ड्रोन के जरिये हथियारों के एयरड्रॉप का आइडिया खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के प्रमुख सदस्य गुरमीत सिंह बग्गा उर्फ डॉक्टर का ही है। यह आइडिया उसे जर्मनी व आसपास के इलाकों में ड्रग्स डीलरों द्वारा तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने से मिला था जिसकी बारीकियों पर काम करने के बाद इसे पाकिस्तान में रणजीत सिंह नीटा के साथ शेयर किया गया और आईएसआई की टेक्निकल एक्सपर्ट्स की टीम के साथ हर तरह की डिटेल्स पर काम किया गया।

3- हरदीप सिंह निज्जर

कनाडा के वैंकूवर में बैठा आतंकी हरदीप सिंह निज्जर ही पंजाब में टारगेट किलिंग का मास्टरमाइंड है। उसी ने पंजाब में हिंदू नेताओं की हत्या और शिंगार सिनेमा ब्लास्ट केस का तानाबाना बुना था। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2018 में फरवरी माह के दौरान भारत आए कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को सौंपी आतंकवादियों की सूची में उसका नाम था लेकिन कनाडा की सरकार ने निज्जर पर कोई कार्रवाई नहीं की है। निज्जर के बारे में कैप्टन ने ट्रूडो को आगाह किया था कि वह वैंकूवर में रह रहा है और भारत विरोधी गतिविधियों का मास्टरमाइंड है।
4- परमजीत सिंह पम्मा
परमजीत सिंह पम्मा एनआईए की लिस्ट में वांटेड आतंकी है, उसके खिलाफ कई देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। आरएसएस के नेता रूलदा सिंह की हत्या का आरोप पम्मा पर है। 1992 तक पम्मा छोटे अपराध में शामिल था, दो साल के बाद वह जर्मनी चला गया, वहां से वह पाकिस्तान पहुंच गया और बब्बर खालसा इंटरनेशनल में शामिल हो गया। शुरुआत में वह वाधवा सिंह का करीबी था। इसके बाद वह खालिस्तानी टाइगर फोर्स में शामिल हो गया और जगतार सिंह तारा का करीबी बन गया। उस वक्त वह थाइलैंड में इंचार्ज था। 2000 में उसने यूके में राजनीतिक शरण ली, जहां उसने तीन मंजिला किराना स्टोर में निवेश किया। हाल के सालों में वह गुरपतवंत सिंह पन्नू के करीब हुआ।

5- भूपिंदर सिंह भिंदा
भूपिंदर सिंह भिंदा जर्मनी में रहने वाला खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का सक्रिय सदस्य है। यूरोप से आतंकवादियों के लिए धन जुटाना उसकी जिम्मेदारी है। एक जुलाई 2020 को केंद्र सरकार ने भिंदा को आतंकवादी घोषित किया था। भिंदा पाक में बैठे तमाम आतंकवादियों के संपर्क में है।

6- रणजीत सिंह नीटा

खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का सरगना रंजीत सिंह नीटा पाकिस्तान में आईएसआई की शरण में है। भारत में सैकड़ों मामले नीटा पर दर्ज हैं। ड्रोन के जरिये हथियार पहुंचाने से लेकर पंजाब में विस्फोट तक के मामले में नीटा की संलिप्ता रही है। पिछले साल 200 करोड़ की हेरोइन बीएसएफ ने पकड़ी थी, जो नीटा ने भेजी थी। पंजाब में हर साल नीटा नये युवाओं को अपने साथ जोड़ता है और उनको तैयार करता है। खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स यूरोप के कई देशों में अपना नेटवर्क चलाता है। नीटा मूलरूप से जम्मू-कश्मीर का है और उसके कश्मीरी आतंकी संगठनों से काफी निकटता है।

7- वधावा सिंह
कपूरथला के काला संघिया का रहने वाला वधावा सिंह मौजूदा समय पाकिस्तान में है और सबसे अधिक सक्रिय आतंकवादी संगठन है। वधावा सिंह की पाकिस्तान में आईएसआई के साथ खासी सांठगांठ है। वधावा सिंह बब्बर खालसा इंटरनेशनल का चीफ है और पाकिस्तान में बैठकर वह पंजाब और यूपी में खालिस्तान की लहर के लिए युवाओं को साथ जोड़ता है। इस संगठन को भी 2020 में आंतकी संगठन घोषित किया गया था। शिंगार सिनेमा विस्फोट से लेकर पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड में भी बब्बर खालसा के तार जुड़े थे।

8- लखबीर सिंह रोडे
इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन का प्रधान लखबीर सिंह रोडे भी पाकिस्तान में है। उनके भाई जसबीर सिंह रोडे जालंधर में रहते हैं। लखबीर सिंह आईएसआई का काफी निकटवर्ती है और पंजाब में विस्फोटक सामग्री भेजने के लिए वह अग्रणी रहता है। लखबीर सिंह रोडे संत जरनैल सिंह भिंडरावालां का भतीजा है और आतंकवाद के सफाये के दौरान वह पाकिस्तान चला गया था। लखबीर सिंह रोडे का नेटवर्क यूरोपियन देशों में काफी है।

9- परमजीत सिंह पंजवड़
खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का चीफ परमजीत सिंह पंजवड़ भी पाकिस्तान में है और वहां से अपना नेटवर्क चला रहा है। अमेरिका से लेकर कनाडा और यूरोप तक खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का पूरा नेटवर्क तैयार करने वाले पंजवड़ के खिलाफ पंजाब में काफी मामले दर्ज हैं। ड्रोन से हथियार भेजने के मामले में भी पंजवड़ का नाम सामने आया है।

आतंकवाद और अलगाववाद की जन्मदाता है कांग्रेस

देवरिया। प्रधानमंत्री मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा में चूक एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर भाजपा इसे लेकर कांग्रेस पर हमलावर है वहीं कांग्रेस इसे भाजपा का राजनैतिक पैतरा बता रही है। इस राजनीति में कांग्रेस और भाजपा शासित मुख्यमंत्री भी कूद पड़े हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। वरिष्ठ भाजपा नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को आतंकवाद और अलगाववाद की जननी बताते हुये कहा कि पंजाब में जिस तरह से वहां की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा से जो खिलवाड़ किया है, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा के लिए कांग्रेस जिम्मेदार

सिंह ने शुक्रवार को यहां एक जनसभा में कहा कि पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक के लिये वहां की सरकार जिम्मेदार है और यह बात पुख्ता भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के पीछे कांग्रेस सरकार की घोर लापरवाही सामने आयी है। आज पूरा देश इसकी निन्दा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब मे आज हर साजिश की जड़ में कांग्रेस है। आतंकवाद एवं अलगाववाद की जन्मदाता कांग्रेस है, इसीलिए कांग्रेस आज गर्त में जा रही है।

पाकिस्तानी सीमा के निकट प्रधानमंत्री को था जान का खतरा

देश के पूर्व कृषि मंत्री ने कहा कि पाकिस्तानी सीमा के निकट देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक होना अकल्पनीय ही नहीं शर्मनाक और चिंताजनक भी है। सिंह ने कहा, हम एक लोकतंत्र हैं और संवैधानिक उत्तरदायित्व से बंधे हैं। स्वस्थ लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, परंतु कर्तव्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। राजनैतिक महत्वाकांक्षा इतनी बेलगाम ना हो कि वह संवैधानिक उत्तरदायित्व से ही विमुख कर दे। यही काम कांग्रेस के शासनकाल में पंजाब के अंदर हुआ है।

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