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भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल

Modi-in-LS_LSTVलोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिन गौरव का दिन है. मोदी ने कहा कि इस आंदोलन को 75 साल हो गए हैं, देश के स्वतंत्रता में इसका काफी महत्व था. अंग्रेजों ने इसकी कल्पना नहीं की थी. पीएम ने कहा कि उस समय महापुरुषों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है. जब इस आंदोलन के 25 साल और 50 साल हुए थे तब भी इसका महत्व था लेकिन 75 साल पूरे होना बड़ी बात है. देश के इतिहास में 9 अगस्त की बड़ी भूमिका थी, अंग्रेजों ने इसकी कल्पना नहीं की थी. उस दौरान महात्मा गांधी और बड़े नेता जेल गए थे, तब नए नेताओं ने जन्म लिया था. जिनमें लाल बहादुर शास्त्री, राममनोहर लोहिया जैसे नेता शामिल थे.

मोदी ने कहा कि 1857 से 1947 तक आजादी के आंदोलन के अलग-अलग पड़ाव आए, देश के सभी लोगों को ये घटनाएं याद हैं. इस आंदोलन ने आजादी का रास्ता तैयार किया था. 1857 का संग्राम देश के हर कोने में लड़ा गया, उसके बाद महात्मा गांधी का भारत लौटना, उनका डांडी मार्च करना, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, चंद्रशेखर आजाद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इसमें अहम योगदान दिया था.

इस आंदोलन से लोगों को लगने लगा था कि अब नहीं तो कभी नहीं होगा. पहले कभी लगता था कि आंदोलन सिर्फ कुछ लोगों के द्वारा ही चल रहा है लेकिन 1942 के आंदोलन में सभी का साथ मिला. इस आंदोलन में नारा था कि भारत छोड़ो, इस दौरान महात्मा गांधी का ‘करेंगे या मरेंगे’ कहना बड़ी बात है. उस दौरान गांधी ने कहा कि मैं स्वतंत्रता से कम पर संतुष्ट होने वाला नहीं हूं. हम या तो करेंगे या मरेंगे.

पीएम ने कहा कि उस समय समाज के सभी वर्ग जब इस आंदोलन में जुड़ गया जिससे इसमें तेजी आई. महात्मा गांधी ने कहा था कि इस दौरान कोई भी मरेगा तो उसके शरीर पर करेंगे या मरेंगे की पट्टी लगानी चाहिए. मोदी बोले कि जब सभी लोगों ने एक साथ इसकी लड़ाई लड़ी तो हमें 1942 से 1947 तक के आंदोलन में हमें आजादी मिल जाती है.

पीएम ने कहा कि रामवृक्ष बेनीपुरी ने एक किताब लिखी है जंजीरें और दीवारें जिसमें उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति नेता बन गया, देश का हर चौराहा करो या मरो का दफ्तर बन गया. मुंबई ने रास्ता दिखा दिया, आने-जाने के सभी रास्ते बंद हो गए थे. जनता ने करो या मरो के गांधी वादी मंत्र को दिल में बैठा लिया था.मोदी बोले कि भारत के आजाद होने से पूरी दुनिया में बड़ा संदेश गया और उन जगहों पर भी आजादी का आंदोलन शुरू हुआ था. पीएम ने कहा कि हमारे लिए सबक है कि जब हम एक होकर आगे बढ़ते हैं तो हम देश को आगे बढ़ा सकते हैं. मोदी ने सोहनलाल द्विवेदी की कविता भी पढ़ी, उन्होंने ‘उसी ओर’ कविता की पंक्तिया सुनाई.

पीएम ने कहा कि आज जब हम 2017 में है तो हमारे पास गांधी नहीं है, उस समय जैसा नेतृत्व नहीं है. लेकिन 125 करोड़ देशवासियों के पास ये क्षमता है कि हम गांधी के सपनों को पूरा कर सकते हैं. उस समय भी भारत के लिए अनुकूल माहौल था और आज भी देश के लिए अनुकूल माहौल है. भारत एक बार फिर दुनिया के लिए प्रेरणा बन सकता है. मोदी ने कहा कि हमारे लिए दल से बड़ा देश है, राजनीति से बड़ी राष्ट्रनीति होती है. भ्रष्टाचार के दीमक ने देश को तबाह कर दिया था, हमें इस स्थिति को बदलना होगा. हमारे सामने गरीबी, कुपोषण और शिक्षा की चुनौती है ये सिर्फ सरकार की नहीं देश की चुनौती हैं. 1942 में भी अलग विचारधारा के लोग थे, अब भी ऐसा है.भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं सालगिरह के मौके पर बुधवार को संसद में विशेष सत्र के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई नेताओं ने अपने विचार रखे।

Budget sessionसोनिया गांधी  ने अपने संबोधन के दौरान आरएसएस और मोदी सरकार पर तीखा निशाना साधा। सोनिया ने कहा कि ऐसा लगता है कि देश में अंधकार की शक्तियां तेजी से उभर रही हैं। कानून के राज पर गैरकानूनी शक्तियां हावी हो रही हैं।

कांग्रेस का योगदान गिनाया
सोनिया ने आजादी की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकताओं के बलिदान को याद किया। बताया कि किस तरह कई कांग्रेस कार्यकर्ता जेल के अंदर ही बीमारी से मारे गए और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जेल में सबसे लंबा वक्त बिताया। बताया कि किस तरह अंग्रेजों और पुलिस ने आम लोगों का उत्पीड़न किया। सोनिया ने कटाक्ष किया, ‘आज जब हम उन शहीदों को नमन कर रहे हैं, जो स्वाधीनता संग्राम में सबसे अगली कतार में रहे, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उस दौर में ऐसे संगठन और व्यक्ति भी थे, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था। इन तत्वों का हमारे देश को आजादी दिलाने में कोई योगदान नहीं रहा।’ सोनिया के ऐसा कहने पर कुछ सदस्यों पर शोर भी मचाया। सोनिया ने आगे कहा, ‘महोदया, मुझे लगता है कि जब हम क्विट इंडिया की 75वीं सालगिरह मना रहे हैं तो देशवासियों के मन में कई आशंकाएं भी हैं।’ सोनिया ने कहा, ‘यह एहसास गहरा होता जा रहा है कि क्या अंधकार की शक्तियां हमारे बीच फिर तेजी से उभर नहीं रही हैं? क्या जहां आजादी का माहौल था, वहां भय नहीं फैल रहा है? क्या जनतंत्र के उस बुनियाद को नष्ट करने की कोशिश नहीं हो रही है?’ सोनिया ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन की सालगिरह का कार्यक्रम हम सबको यह याद दिलाता है कि भारत के विचार को एक संकीर्ण मानसिकता वाले विभाजनकारी और सांप्रदायिक सोच का कैदी न बनने दे सकते हैं और न ही बनने देंगे। सोनिया यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि नफरत की राजनीति के बादल हर तरफ छाए हुए हैं।

तृणमूल ने भी साधा निशाना 
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के नेता सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा में भारत छोड़ो आंदोलन पर जारी चर्चा के दौरान बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘हमें खेद है कि उस समय कुछ विश्वासघाती और मीर जाफर थे, जिन्होंने इस आंदोलन में योगदान नहीं किया। उन्होंने अंग्रेजों के निर्देश पर अगस्त क्रांति आदोलन को बर्बाद करने का काम किया… आज भी हमारे देश में ऐसे विश्वासघाती और मीर जाफर हैं, जिससे हमारा भाईचारा संकट में पड़ गया है।’ इसके बाद उन्होंने बीजेपी पर बरसते हुए कहा, ‘बीजेपी भारत छोड़ो, क्योंकि बीजेपी भी अंग्रेजों की तरह बांटो और राज करो की नीति अपना रही है।’

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