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रघुवंश प्रसाद ने आरजेडी से दिया इस्तीफा

raghuwansh-prasad-singhनई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को तगड़ा झटका लगा है। वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने आरजेडी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। एम्स में इलाज करा रहे रघुवंश प्रसाद ने आरजेडी से इस्तीफा देने की घोषणा की है। रघुवंश प्रसाद पार्टी के सभी पदों से पहले ही दे चुके हैं।राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद की तबीयत ज्यादा खराब हो गई है। हालत नाजुक होने पर उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है। यहां डॉक्टरों ने रघुवंश प्रसाद को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया है। एम्स की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल रघुवंश प्रसाद के तमाम चेकअप किए जा रहे हैं। हालांकि अभी हालत स्थिर बताई जा रही है।74 वर्षीय रघुवंश प्रसाद कुछ महीने पहले कोरोना संक्रमित हो गए थे। पटना एम्स में ईलाज के बाद वह स्वस्थ्य होकर घर लौट आए थे, लेकिन उनका शरीर काफी कमजोर हो चुका है। कोरोना से उबरने के बाद भी रघुवंश प्रसाद पूरी तरीके से स्वस्थ्य नहीं हो पा रहे हैं।

रघुंवश प्रसाद को लेकर लालू ने बेटे तेज प्रताप को लगाई डांट
वैशाली के पूर्व एलजेपी सांसद रामा सिंह आरजेडी में आना चाहते हैं। इस बात का रघुवंश प्रसाद विरोध कर रहे हैं। रघुवंश प्रसाद आरजेडी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। रघुवंश प्रसाद की नाराजगी पर पूछे गए सवाल पर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा कि पार्टी समुद्र होता है, उससे एक लोटा पानी निकलने से कुछ नहीं होता है। रघुवंश प्रसाद की तुलना एक लोटा पानी से किए जाने पर विवाद शुरू हो गया था, जिसके बाद तेज प्रताप यादव ने कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। रघुवंश प्रसाद उनके चाचा हैं।इसी विवाद के दौरान तेज प्रताप यादव जब पिता से मिलने पहुंचे थे तब लालू प्रसाद यादव ने उन्हें रघुवंश प्रसाद को लेकर इस तरह का बयान देने के लिए फटकार लगाई थी। हालांकि कार्यकर्ताओं के राबड़ी आवास पर विरोध के बाद भी तेजस्वी यादव ने कहा है कि रामा सिंह को पार्टी में लेने पर पार्टी निर्णय लेगी।अपने हाथ से लिखे इस्तीफे के लेटर में रघुवंश बाबू ने पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष लालू यादव लिखा कि 32 सालों तक आपके पीछे खड़ा रहा लेकिन अभी नहीं. फ़िलहाल दिल्ली AIIMS में इलाज करा रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने लिखा कि पार्टी नेता, कार्यकर्र्ता और आमजनों ने मुझे बड़ा स्नेह दिया, मुझे क्षमा करे. इस पत्र के शब्दों को लेकर साफ है कि संभवत: रघुवंश अब अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं करना चाहते और मान-मनोब्बल की कोई गुंजाइश नहीं बची हैं.

रघुवंश बाबू पार्टी में धन कुबेरों को राज्यसभा चुनाव में प्राथमिकता देने और उनके वैशाली ज़िले में पूर्व सांसद रमा सिंह के शामिल कराये जाने के कारण ख़फ़ा चल रहे थे. 74 साल के रघुवंश बाबू पार्टी में उपाध्‍यक्ष का पद संभाल रहे थे और वे लालू के बेहद भरोसेमंद नेताओं में शुमार किए जाते थे. वे केंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं.

गौरतलब है कि रघुवंश इस समय पार्टी का जिस तरह से संचालन किया जा रहा था, उससे खुश नहीं थे और इस बारे में उन्‍होंने साल की शुरूआत में लालू को लेटर भी लिखा था.लालू यादव को लिखे एक पत्र में रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बहाल करने के अलावा पार्टी को और अधिक आक्रामक बनाने का सुझाव दिया था.पत्र को पढ़ने से दो बातें साफ़ होती हैं, एक वो राज्य इकाई की कमान संभाल रहे जगदानंद सिंह के कार्यशैली से ख़ुश नही हैं. दूसरा तेजस्वी यादव की राज्य की राजनीति से अनुपस्थिति पर भी उन्होंने अपना नाराज़गी सार्वजनिक की है.रघुवंश ने अपने पत्र में ये भी कहा है कि राज्य सरकर को घेरने के लिए ना कोई ढंग का बयान दिया जाता हैं और ना संवादाता सम्मेलन आयोजित किया जाता है.

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