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कृषि सुधार कानून ; राहुल गांधी ने सदन में उठाए कई सवाल

rahulनई दिल्ली। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि सुधार कानूनों को निरस्त करने की किसानों की मांग का जोरदार समर्थन करते हुए लोकसभा में भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। भाजपा सरकार को ‘हम दो हमारे दो’ की सरकार बताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि इन कानूनों के जरिये चंद उद्योगपति किसानों की फसलों को खरीदकर उनकी जमाखोरी करेंगे, मंडियां खत्म हो जाएंगी और इसके बाद किसानों को उद्योगपतियों के रहमोकरम पर निर्भर रहना पड़ेगा।लोकसभा में बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राहुल गांधी ने सिर्फ किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस सदस्यों के बीच नोंकझोंक और हंगामा भी हुआ। हंगामे और टोकाटाकी के दरम्यान राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कृषि कानूनों के कंटेट (सामग्री) और इंटेंट (इरादे) पर कांग्रेस के चर्चा नहीं करने की बुधवार की टिप्पणी पर पलटवार किया।

राहुल गांधी ने उठाए कई सवाल

उन्होंने कहा कि पहले कृषि सुधार कानून का कंटेंट है कि कोई भी व्यक्ति देश में कहीं भी जितनी चाहे मात्रा में अनाज और सब्जी खरीद सकता है। जब कुछ लोग ही सभी फसलें-सब्जियां खरीद लेंगे तो मंडी कौन जाएगा? राहुल ने कहा कि इससे साफ है कि पहले कानून का इंटेंट मंडी को खत्म करना है। दूसरे कानून का मकसद आवश्यक वस्तु अधिनियम को खत्म कर जमाखोरी को बढ़ावा देना है। जबकि तीसरे कानून का इंटेंट है कि जब देश का किसान उद्योगपति के पास अपनी फसल की वाजिब कीमत मांगने जाएगा तो उसे सही दाम हासिल करने के लिए अदालत जाने का अधिकार नहीं होगा। इससे साफ है कि तीनों कृषि कानून किसानों के लिए नहीं बल्कि उन चार-पांच लोगों के लिए हैं जो देश को चलाते हैं।कृषि कानूनों से विकल्प मिलने की प्रधानमंत्री की बात पर प्रहार करते हुए राहुल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री कहते हैं कि उन्होंने विकल्प दिए हैं। हां, आपने तीन विकल्प दिए हैं- भूख, बेरोजगारी और आत्महत्या।’ कानून विरोधी आंदोलन को हल्के में लेने के प्रति सरकार को आगाह करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल नहीं, यह देश का आंदोलन है और किसान अंधेरे में सरकार को टार्च दिखा रहे हैं।

राहुल ने कहा कि यह लिखकर ले लीजिए किसान एक इंच भी पीछे हटने वाला नहीं है और इन कानूनों को निरस्त करना ही होगा। राहुल ने आखिर में कहा, चूंकि किसानों के मुद्दे पर अलग से चर्चा की विपक्ष की मांग सरकार ने नहीं मांगी इसलिए वह बजट पर नहीं बोलेंगे और किसानों तक ही अपनी बात सीमित रखेंगे। इसके बाद उन्होंने सदन में आंदोलन के दौरान अब तक 200 अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत पर उन्हें श्रद्धांजलि नहीं दिए जाने की बात उठाते हुए अपनी तरफ से सांसदों से दो मिनट का मौन रखने की अपील की।इस अपील पर कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक आदि के सदस्य खड़े होकर राहुल के साथ श्रद्धांजलि देने लगे जिस पर सत्तापक्ष ने हंगामा करते हुए एतराज जताया। श्रद्धांजलि खत्म होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि ऐसा करना उचित नहीं क्योंकि यह आसन का अधिकार है और इस तरह की कोई बात है तो आगे से उन्हें लिखकर दिया जा सकता है।

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