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श्रीलंका में राजपक्षे को मिली सत्ता

GOTABAYARAJAPAKSAश्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतगणना समाप्त हो चुकी है. पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई और पूर्व रक्षा सचिव गोतबया राजपक्षे ने सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार साजित प्रेमदासा को हराया है. इस चुनाव के साथ ही यह अनुमान लगाया जा रहा है कि गोतबया राजपक्षे की जीत भारत या चीन किसके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगी.सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार साजित प्रेमदासा ने अपनी हार स्वीकार करते हुए अपने प्रतिद्वंदी गोतबया राजपक्षे को जीत के लिए बधाई दे दी है. उन्होंने कहा कि मैं लोगों के निर्णय का सम्मान करता हूं और गोतबया राजपक्षे को श्रीलंका के सातवें राष्ट्रपति के रूप में उनके निर्वाचन पर बधाई देता हूं.दरअसल, श्रीलंका की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि गोतबया राजपक्षे की जीत चीन के लिए फायदेमंद हो सकती है क्योंकि उनके बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के सत्ता में रहते हुए श्रीलंका में चीन ने खूब निवेश किया हुआ था. महिंदा राजपक्षे 2005 तक सत्ता में रहे थे.इतना ही नहीं महिंदा राजपक्षे ने चीन से अरबों डॉलर का उधार भी लिया था और कोलंबो बंदरगाह के द्वार चीन के युद्धपोतों के लिए खोल दिए थे. एक तथ्य यह भी है कि चीन ने कोलंबो बंदरगाह को भी विकसित करने में काफी बड़ी भूमिका निभाई है.चीन ने हंबनटोटा का विशाल बंदरगाह बनाने में भी प्रमुख भूमिका निभाई है और वह पहले से ही चीन के भारी भरकम कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है. उम्मीद जताई जा रही है कि राजपक्षे का रुझान चीन की ही सकारात्मक रह सकता है.दूसरी तरफ साजित प्रेमदासा नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएएफ) का प्रतिनिधित्व करते है. उनका फ्रंट दक्षिणपंथी झुकाव वाले सत्तारूढ़ यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के साथ गठबंधन का सदस्य है. लेकिन अब वह चुनाव हार चुके हैं. 52 वर्षीय साजित प्रेमदासा, पूर्व राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा के बेटे हैं.भारत अब श्रीलंका की नई सरकार के साथ रिश्ते बेहतर रखना चाहेगा, क्योंकि भारत कोलंबो बंदरगाह में ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल बनाने को लेकर श्रीलंका के साथ एक समझौता कर चुका है. भारत आने वाला बहुत सारा सामान इसी कोलंबो बंदरगाह से होकर आता है. ऐसे में श्रीलंका में कोई भी सत्ता में रहे भारत उससे अपना संबंध खराब करना नहीं चाहेगा.

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