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उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड की 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान

BJP_Parliament_congressनई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की कुल 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव  की तरीख का ऐलान हो गया है. राज्यसभा की 11 सीटों पर 9 नवंबर को चुनाव होना है. इनमें उत्तर प्रदेश  से 10 और उत्तराखंड की एक सीट है. इन सीटों पर काबिज सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है. चुनाव आयोग  ने इस संबंध में मंगलवार को बयान जारी किया है. चुनाव आयोग ने बयान में कहा, “कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए मास्क, थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजर का उपयोग सुनिश्चित किया जाए. कोरोना महामारी से अब तक देश में 70 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. सरकार की ओर से अनिवार्य सोशल डिस्टेंसिंग  के नियमों का भी सख्ती से पालन किया जाएगा.” आधिकारिक बयान में कहा गया है कि “दो राज्यों में पर्यवेक्षक के रूप में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों” को नियुक्त किया गया है. दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया गया है कि चुनाव के आयोजन की व्यवस्था करते समय COVID-19 रोकथाम उपायों के बारे में निर्देशों को सुनिश्चित करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी की तैनाती की जाए.”  केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सपा नेता राम गोपाल यादव उत्तर प्रदेश के उन 10 राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जो 25 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. अभिनेता-नेता राज बब्बर का भी उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होगा.

उत्‍तर प्रदेश में नौ नवंबर को राज्‍यसभा की दस सीटों के लिए होने वाला चुनाव प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एकतरफ़ा होता दिख रहा है। राज्य में पिछले चार दशक से अधिक समय में यह पहला मौका है जब किसी एक दल के पास विधानसभा में 300 से अधिक सदस्य हैं। अपने 48 सदस्यों के साथ मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ही ऐसी स्थिति में है कि अपने एक सदस्य की जीत सुनिश्चित कर सके।आजादी के बाद प्रदेश की विधानसभा के लिये हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के 388 और 1977 में जनता पार्टी के 352 विधायक चुने गये थे। वर्ष 1977 के बाद किसी भी राजनीतिक दल को इस तरह का अवसर नहीं मिला है।

विधानसभा के एक अधिकारी के मुताबिक, ”403 सदस्‍यों वाली राज्‍य की विधानसभा में इस समय कुल 395 सदस्‍य हैं। राज्‍यसभा के एक सदस्‍य के लिए करीब 38 विधायकों का मत पाना जरूरी है।” फिलहाल भाजपा के 304, समाजवादी पार्टी के 48, बसपा के 18, अपना दल के नौ, कांग्रेस के सात, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के चार और निर्दलीय समेत छोटे दलों के पांच विधायक हैं। गौरतलब है कि राज्य विधानसभा की सात सीटों पर तीन नवंबर को उपचुनाव होने हैं, जिनके नतीजे 10 नवंबर को आएंगे।लंबे समय बाद इस तरह का चुनाव होने जा रहा है। कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के सदस्‍यों की संख्‍या इतनी सीमित है कि वे एक साथ मिल भी जाएं तो भी सीट हासिल करने की स्थिति में नहीं हैं। मानना है कि पूरा विपक्ष एकजुट हो जाए, तो भी दो सीटें जीतना आसान नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि समूचे विपक्ष के एकजुट होने की संभावना कम ही है, ऐसे में केवल समाजवादी पार्टी ही आसानी से एक सीट जीत सकेगी। भाजपा आसानी से आठ सीटें और बेहतर प्रबंधन कर ले तो नौ सीटें जीत सकती है। उन्होंने क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इन्‍कार नहीं किया। कांग्रेस के दो विधायक और बसपा के एक विधायक अपने दल के विरोध में पिछले वर्ष से ही मुखर हैं। दो वर्ष पहले हुए राज्‍यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी।

उल्‍लेखनीय है कि राज्‍यसभा में उत्‍तर प्रदेश से निर्वाचित समाजवादी पार्टी के चार सदस्‍यों राम गोपाल यादव, चंद्र पाल सिंह यादव, रवि प्रकाश वर्मा और जावेद अली खान, कांग्रेस के एक सदस्‍य पीएल पूनिया, बहुजन समाज पार्टी के दो सदस्‍यों वीर सिंह और राजाराम तथा भारतीय जनता पार्टी के तीन सदस्‍यों हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और नीरज शेखर का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। रिक्‍त होने वाली इन सीटों के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया।भारतीय जनता पार्टी का अपना दल से गठबंधन है। बाकी दलों के बीच राज्‍यसभा चुनाव को लेकर अभी किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है। उत्‍तर प्रदेश की राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखने वाले राजीव रंजन सिंह ने कहा, ”राजनीतिक समीकरण तात्‍कालिक आवश्‍यकताओं के अनुरूप बनते हैं। निश्चित तौर पर विपक्षी दल अपने लिए संभावनाओं की तलाश करेंगे लेकिन भाजपा के लिए रास्‍ता साफ है। इस चुनाव में सर्वाधिक नुकसान समाजवादी पार्टी का होगा।” राज्‍यसभा में उत्‍तर प्रदेश का 31 सीटों का कोटा है, जिसमें से इस समय भाजपा के पास 17, सपा के पास आठ, बसपा के पास चार और कांग्रेस के पास दो सीटें हैं।

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