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अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन

modi mandirसुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक मोदी सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन कर दिया है. इस ट्रस्ट का नाम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र रखा गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इसका ऐलान किया है. साथ ही पीएम मोदी ने मस्जिद की जमीन के लिए सहमति की बात भी कही है.पीएम मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान करने के साथ ही मस्जिद के लिए जमीन का भी ऐलान किया. उन्होंने कहा, ‘सर्वोच्च अदालत के आदेश के अनुसार गहन विचार विमर्श और संवाद के बाद अयोध्या में पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटित करने का अनुरोध यूपी सरकार से किया गया, इस पर राज्य सरकार ने भी अपनी सहमति प्रदान कर दी है.’पीएम मोदी का यह ऐलान 9 नवंबर 2019 को अयोध्या केस में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 87 दिन बाद आया है. कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर के हक में फैसला देते हुए अपने फैसले में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि तीन महीने के अंदर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया जाये. साथ ही मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाये.अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के अध्यक्ष व इसके स्वरूप की घोषणा कर दी गई है। ट्रस्ट के अध्यक्ष अयोध्या विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्य वकील रहे 92 वर्षीय के परासरण होंगे।ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य होंगे। जिनमें से नौ सदस्य स्थायी जबकि छह सदस्य नामित होंगे। ट्रस्ट अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण करवाएगा।कोर्ट के इस आदेश की मियाद 9 फरवरी को यानी चार दिन बाद पूरी हो रही थी. इससे पहले की बुधवार (5 फरवरी) को मोदी कैबिनेट ने राम मंदिर ट्रस्ट पर फैसला कर दिया और लोकसभा में जाकर पीएम मोदी ने खुद इसका ऐलान किया. ये ट्रस्ट अब मंदिर बनाएगी, वहीं मस्जिद के लिए जमीन का इंतजाम योगी सरकार करेगी.

देखें ट्रस्टियों की पूरी सूची:
– के.परासरण ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे।
– शंकराचार्य वासुदेवानंद महाराज, सदस्य।
– परमानंद जीमहाराज हरिद्वार, सदस्य।
– स्वामी गोविंदगिरी जी पुणे, सदस्य।
– विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा, सदस्य
– डॉ.अनिल मिश्रा होम्योपैथिक डॉक्टर, अयोध्या, सदस्य
– डॉ. कमलेश्वर चौपाल पटना, सदस्य
– महंत धीनेंद्र दास निर्मोही अखाड़ा, सदस्य
– डीएम अयोध्या ट्रस्ट के संयोजक सदस्य
– ट्रस्ट में छह सदस्य नामित होंगे जिन्हें बोर्ड ऑफ ट्रस्ट नामित करेगा।

संसद में जयश्रीराम के नारा लगा सांसद लल्लू सिंह ने जताई खुशी॓

लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का एलान करने के एतिहासिक क्षण का साक्षी बने सांसद लल्लू सिंह ने इसे अयोध्या व पूरे विश्व के लिए हर्ष व गौरव का विषय बताया। संसद में जयश्रीराम के नारे के साथ सांसद लल्लू सिंह ने इसका समर्थन भी किया। सांसद लल्लू सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में सरकार के गठन के बाद से ही अयोध्या में विकास की अवधारणा को गति मिलना प्रारंभ हो गया था। संतों व जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सरकार ने कई परियोजनाएं अयोध्या को प्रदान की। पर्यटन की दृष्टि से आवश्यक योजनाएं वर्तमान में अयोध्या में गतिशील है।आम जनता की मंशा के अनुरुप सरकार ने हर मांग को पूरा करने का यथा संभव प्रयास भी किया है। प्रधानमंत्री ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान अयोध्या के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है। केंद्र व प्रदेश सरकार की विकास को लेकर प्राथमिकता में रही अयोध्या अपनी महिमा व गरिमा के अनुरूप विकास को प्राप्त करेगी।

अयोध्या में पांच सदी के बाद अब राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ऐलान किया. सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में फैसला दिया था और तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने की मियाद तय की थी. ऐसे में मोदी सरकार ने बुधवार को ट्रस्ट को कैबिनेट की मंजूरी दिलाने के बाद बिल संसद में पेश किया.बता दें कि माना जाता है कि बाबर के दौर में अयोध्या में राम मंदिर को तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण कराया. पिछले पांच सदी से यह विवाद था, जिसने देश की राजनीतिक दशा और दिशा को बदल दिया है. आजादी के बाद से अब तक इस विवाद ने देश की राजनीति को प्रभावित किया है. अयोध्या को लेकर देश भर में आंदोलन किए गए, कानूनी लड़ाई भी लड़ी गई और सुप्रीम कोर्ट के जरिए राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ.

पिछली पांच सदियों में ऐसी रही है अयोध्या आंदोलन की टाइमलाइन-

1528-29: मंदिर तोड़ कर क्या मस्जिद बनवाई?

मुगल राजा बाबर के सेनापति मीर बाकी ने यहां मस्जिद बनवाई थी, जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था. बाबर 1526 में भारत आया. 1528 तक उसका साम्राज्य अवध (वर्तमान अयोध्या) तक पहुंच गया. इसके बाद करीब तीन सदियों तक के इतिहास की जानकरी किसी भी ओपन सोर्स पर मौजूद नहीं है.

1853: …जब पहली बार अयोध्या में दंगे हुए थे

अयोध्या में इस मुद्दे को लेकर हिंदू-मुस्लिम हिंसा की पहली घटना 1853 में हुई थी. जब निर्मोही अखाड़े ने ढांचे पर दावा करते हुए कहा कि जिस स्थल पर मस्जिद खड़ा है. वहां एक मंदिर हुआ करता था. जिसे बाबर के शासनकाल में नष्ट किया गया. अगले 2 सालों तक इस मुद्दे को लेकर अवध में हिंसा भड़कती रही. फैजाबाद जिला गजट 1905 के अनुसार 1855 तक, हिंदू और मुसलमान दोनों एक ही इमारत में पूजा या इबादत करते रहे.

1859: आजादी के पहले आंदोलन के बाद ब्रिटिश शासकों ने परिसर को बांटा

लेकिन 1857 में आजादी के पहले आंदोलन के चलते माहौल थोड़ा ठंडा पड़ गया. 1859 में ब्रिटिश शासकों ने मस्जिद के सामने एक दीवार बना दी. परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी गई.

1885: पहली बार जिला अदालत में पहुंचा यह विवादित मामला

मंदिर-मस्जिद विवाद कुछ सालों में इतना गंभीर और भयावह हो गया कि मामला पहली बार अदालत में गया. हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने की इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये अपील ठुकरा दी. इसके बाद से मामला गहराता गया और सिलसिलेवार तारीखों का जिक्र मिलता है.

1934: दंगों में क्षतिग्रस्त हुई थी मस्जिद की दीवार और गुंबद

इस साल फिर सांप्रदायिक दंगे हुए. इन दंगों में मस्जिद के चारों तरफ की दीवार और गुंबदों को नुकसान पहुंचा. ब्रिटिश सरकार ने इसका पुनर्निर्माण कराया.

1949: जब हिंदुओं ने कथित तौर पर मूर्ति स्थापित की, सरकार ने लगवाया ताला

भगवान राम की मूर्ति मस्जिद में पाई गई. कहा जाता है कि मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति हिंदुओं ने रखवाई. मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और मस्जिद में नमाज पढ़ना बंद कर दिया. फिर दोनों पक्षों ने लोगों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया. इसके बाद सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगवा दिया.

1950: अदालत से भगवान राम की पूजा की इजाजत मांगी गई

गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में अपील दायर कर भगवान राम की पूजा की इजाजत मांगी. महंत रामचंद्र दास ने मस्जिद में हिंदुओं द्वारा पूजा जारी रखने के लिए याचिका लगाई. इसी दौरान मस्जिद को ‘ढांचे’ के रूप में संबोधित किया गया.

1959-61: दोनों पक्षों ने विवादित स्थल के हक के लिए मुकदमा किया

1959 में निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल के हस्तांतरण के लिए मुकदमा किया. वहीं, मुसलमानों की तरफ से उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक के लिए मुकदमा कर दिया.

1984: रामजन्मभूमि मुक्ति समिति का गठन किया गया

विश्व हिंदू परिषद ने भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करने और वहां राम मंदिर बनाने के लिए एक समिति का गठन किया. उसी समय गोरखपुर को गोरखनाथ धाम के महंत अवैद्यनाथ ने राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति बनाई. अवैद्यनाथ ने अपने शिष्यों और लोगों से कहा था कि उसी पार्टी को वोट देना जो हिंदुओं के पवित्र स्थानों को मुक्त कराए. बाद में इस अभियान का नेतृत्व भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया.

फरवरी 1986: ताला खोलने का आदेश, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनी

जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित स्थल के दरवाजे से ताला खोलने का आदेश दिया. मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति/बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई.

जून 1989: विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर का शिलान्यास किया

भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में विश्व हिंदू परिषद को औपचारिक समर्थन दिया. वीएचपी नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला की तरफ से मंदिर के दावे का मुकदमा किया. नवंबर में मस्जिद से थोड़ी दूर पर राम मंदिर का शिलान्यास किया गया.

25 सितंबर 1990: आडवाणी की रथ यात्रा बिहार में रोकी गई, गिरफ्तार हुए

भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली ताकि हिंदुओं को इस महत्वपूर्ण मु्द्दे से अवगत कराया जा सके. हजारों कार सेवक अयोध्या में जमा हुए. इसके नतीजे में गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए. ढेरों इलाके कर्फ्यू की चपेट में आ गए. 23 अक्टूबर को बिहार में तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद यादव ने आडवाणी की रथ यात्रा रुकवा कर उन्हें गिरफ्तार करवा लिया. लेकिन मंदिर निर्माण के लिए देशभर से लाखों ईंटें अयोध्या भेजी गईं. इसके बाद भाजपा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

30 अक्टूबर 1990: अयोध्या में पहली बार कारसेवा हुई और गोलीकांड भी

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए पहली बार कारसेवा हुई थी. कारसेवकों ने मस्जिद पर चढ़कर झंडा फहराया था. इसके बाद पुलिस की गोलीबारी में पांच कारसेवकों की मौत हो गई थी. गोली चलाने का आदेश मुलायम सिंह यादव की सरकार ने दिया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री ने विवाद सुलझाने का प्रयास भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली.

6 दिसंबर 1992: बाबरी मस्जिद ढहा दी गई, देश में दंगे शुरू

30-31 अक्टूबर 1992 को धर्मसंसद में कारसेवा की घोषणा की गई. नवंबर में यूपी के सीएम कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की हिफाजत करने का हलफनामा दिया. इसे विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दी. अस्थाई राम मंदिर बना दिया गया. इसके बाद ही पूरे देश में चारों ओर सांप्रदायिक दंगे होने लगे. इसमें करीब 2000 लोग मारे गए.

16 दिसंबर 1992: मस्जिद ढहाने की जांच के लिए लिब्रहान आयोग बना

मस्जिद को ढहाने के मामले को लेकर लिब्रहान आयोग बनाया गया. जज एमएस लिब्रहान के नेतृत्व में जांच शुरू की गई.

1994: इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस शुरू हुआ

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बाबरी मस्जिद विध्वंस से संबंधित केस चलना शुरू हुआ.

सितंबर 1997: मस्जिद ढहाने को लेकर 49 लोग दोषी करार दिए गए

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने इस मामले में 49 लोगों को दोषी करार दिया. इसमें भारतीय जनता पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं के नाम भी थे.

2001: विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर बनाने की तारीख तय की

 बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर तनाव बढ़ गया. विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि मार्च 2002 को अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा.

जनवरी-फरवरी 2002: वाजपेयी ने मामला सुलझाने के लिए अधिकारी नियुक्त किया, गोधरा कांड हुआ

अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया. वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिंदू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया गया. भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को शामिल करने से इनकार कर दिया. विश्व हिंदू परिषद ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी. सैकड़ों हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या में इकठ्ठा हुए. फरवरी अयोध्या से लौट रहे हिंदू कार्यकर्ता जिस रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे उस पर गोधरा में हुए हमले में 58 कार्यकर्ता मारे गए.

13 मार्च 2002: सुप्रीम कोर्ट ने कहा अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखें

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी. किसी को भी सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी. केंद्र सरकार ने कहा कि अदालत के फैसले का पालन किया जाएगा.

15 मार्च 2002: सरकार को सौंपी गई शिलाएं

विश्व हिंदू परिषद और केंद्र सरकार के बीच इस बात पर समझौता हुआ कि विहिप के नेता सरकार को मंदिर परिसर से बाहर शिलाएं सौंपेंगे. रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास और विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल के नेतृत्व में लगभग 800 कार्यकर्ताओं ने सरकारी अधिकारी को अखाड़े में शिलाएं सौंपीं.

अप्रैल 2002: हाईकोर्ट में मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू की

हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर सुनवाई आरंभ की.

मार्च-अगस्त 2003: पुरातत्व विभाग ने विवादित स्थल के नीचे खुदाई की

हाई कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. पुरातत्वविदों ने कहा कि मस्जिद के नीचे मंदिर से मिलते-जुलते अवशेष के प्रमाण मिले हैं. हालांकि इसे लेकर भी अलग-अलग मत थे. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजापाठ की अनुमति देने का अनुरोध किया, जिसे ठुकरा दिया गया.

मई 2003: सीबीआई ने आडवाणी समेत 8 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया

सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किए.

जून 2003: शंकराचार्य ने मध्यस्थता का प्रयास किया, पर विफल

कांची पीठ के शंकराचार्य ने जयेंद्र सरस्वती ने मामला सुलझाने के लिए मध्यस्थता की. उन्होंने उम्मीद जताई थी कि एक महीने में इस मामले का हल निकाल लिया जाएगा. लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पाया.

अगस्त 2003: मंदिर निर्माण के लिए विशेष विधेयक लाने का प्रस्ताव ठुकराया

भाजपा नेता और उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने विहिप के इस अनुरोध को ठुकराया कि राम मंदिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए.

अप्रैल-जुलाई 2004: आडवाणी ने अस्थाई मंदिर में पूजा की

आडवाणी ने अयोध्या में अस्थाई राम मंदिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण जरूर किया जाएगा. जुलाई में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सुझाव दिया कि विवादित स्थल पर मंगल पांडे के नाम पर कोई राष्ट्रीय स्मारक बना दिया जाए.

जनवरी-जुलाई 2005: आडवाणी अदालत में तलब, अयोध्या में आतंकी हमला

लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया. इसी साल जुलाई में अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में आतंकी हमले हुए, जिसमें पांचों आतंकियों सहित छह लोग मारे गए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के दौरान भड़काऊ भाषण देने के मामने में आडवाणी को तलब किया. इससे पहले उन्हें बरी कर दिया गया था. 28 जुलाई को आडवाणी इसी मामले में रायबरेली की एक अदालत में पेश हुए. कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय किए.

4 अगस्त 2005: चार लोग न्यायिक हिरासत में भेजा

फैजाबाद की अदालत ने अयोध्या के विवादित परिसर के पास हुए हमले में कथित रूप से शामिल चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा.

20 अप्रैल 2006: सरकार ने लिब्रहान आयोग से कहा- यह मिलीभगत थी

कांग्रेस के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष लिखित बयान में आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था. इसमें भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल और शिवसेना की मिलीभगत थी.

जुलाई 2006: बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाने का प्रस्ताव खारिज

सरकार ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बने अस्थाई राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव किया. इस प्रस्ताव का मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया और कहा कि यह अदालत के उस आदेश के ख़िलाफ़ है जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे.

19 मार्च 2007: राहुल गांधी बोले- नेहरू-गांधी परिवार का पीएम होता तो मस्जिद न गिरती

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनावी दौरे के बीच कहा कि अगर नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती. उनके इस बयान पर पूरे देश की राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

30 जून-नवंबर 2009: लिब्रहान आयोग ने रिपोर्ट पीएम मनमोहन सिंह को सौंपी

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी. इसी साल, 7 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफनामे में स्वीकार किया कि अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 जरूरी फाइलें सचिवालय से गायब हो गई हैं. 24 नवंबर को लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश. आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया. नरसिंहराव को क्लीन चिट दी.

20 मई 2010: हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका खारिज हो गई

बाबरी विध्वंस के मामले में लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका हाईकोर्ट में खारिज हो गई.

26 जुलाई 2010: अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हुई.

सितंबर 2010: 8 सितंबर को हाईकोर्ट ने अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फैसला सुनाने की घोषणा की. 28 सितंबर को हाईकोर्ट ने फैसला टालने की अर्जी खारिज की.

30 सितंबर 2010: कोर्ट का फैसला- तीन हिस्सों में बांट दिया गया विवादित स्थल

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इसके तहत विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा दिया गया. इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े को मिला.

9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपील दाखिल हुई.

मार्च-अप्रैल 2017: 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही. सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया.

नवंबर-दिसंबर 2017: रिजवी बोले- विवादित स्थल पर राम मंदिर बने

8 नवंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने बड़ा बयान दिया था. रिजवी ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनना चाहिए, वहां से दूर हटके मस्जिद का निर्माण किया जाए. 16 नवंबर को आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने की कोशिश की, उन्होंने कई पक्षों से मुलाकात की. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने 8 फरवरी तक सभी दस्तावेजों को पूरा करने के लिए कहा.

फरवरी-जुलाई 2018: नियमित सुनवाई की अपील खारिज

8 फरवरी को सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर नियमित सुनवाई करने की अपील की. लेकिन पीठ ने उनकी अपील खारिज कर दी. राजीव धवन ने कोर्ट से मांग की कि साल 1994 के इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के फैसले को पुर्नविचार के लिए बड़ी बेंच के पास भेजा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा.

27 सितंबर 2018: ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ मामला बड़ी बेंच को भेजने से इनकार

कोर्ट ने इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के 1994 का फैसला, जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ को बड़ी बेंच को भेजने से इनकार करते हुए कहा था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला सिर्फ भूमि आधिग्रहण के केस में ही लागू होगा.

29 अक्टूबर 2018: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनाई पर इनकार करते हुए केस जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया.

24 नवंबर 2018: शिवसेना का अयोध्या में कार्यक्रम हुआ

अयोध्या में शिवसेना ने कार्यक्रम किया. इस सभा के दौरान उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में बीजेपी को जमकर खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने मोदी सरकार की तुलना कुंभकरण से करते हुए कहा कि मैं यहां कोई लड़ाई लड़ने नहीं आया हूं. आज तो मैं सिर्फ सोए हुए कुंभकरण को जगाने आया हूं. कुंभकरण 6 महीने सोते थे, आज के कुंभकरण पिछले 4 सालों से सोए हुए हैं. मैं उनको जगाने आया हूं. जो वादा करते हैं, जो वचन देते हैं, उसे निभाना चाहिए. चलो सब लोग मिलकर मंदिर बनाते हैं.

25 नवंबर 2018: विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में धर्म सभा हुई

अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में धर्म सभा हुई. धर्म सभा में हिंदू संत रामभद्राचार्य ने कहा कि बहुत जल्द ही भव्य राम मंदिर का निर्माण करना होगा. बीजेपी पर आरोप लगाया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की वजह से तारीख का ऐलान नहीं किया जा रहा है. इसके साथ ही विश्व हिंदू परिषद का कहना था कि अब करो या मरो का वक्त है, देश का बहुसंख्यक समाज अब इस मामले का हल होते हुए देखना चाहता है.

1 जनवरी 2019: पीएम मोदी ने कहा- फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद

पीएम नरेंद्र मोदी ने 2019 के अपने पहले इंटरव्यू में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश पर फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जा सकता है. राम मंदिर पर अध्यादेश लाने के बारे पीएम ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, और संभवत: अपने अंतिम चरण में है. उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने दीजिए, इसके बाद जो भी सरकार की जिम्मेदारी होगी उसे पूरा किया जाएगा.

8 मार्च 2019: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा. पैनल को 8 सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा.

अगस्त 2019: मध्यस्थता पैनल समाधान निकालने में विफल रहा

1 अगस्त को मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की. 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान निकालने में विफल रहा. 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई.

16 अक्टूबर 2019: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले में सुनवाई पूरी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त को अपना फैसला सुनाया. इसके तहत कोर्ट ने विवावित जगह को राम मंदिर को देने और मस्जिद के लिए अलग पांच एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि मंदिर निर्माण के लिए सरकार एक ट्रस्ट बनाए.

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