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अयोध्या में ढांचे के नीचे हिन्दू मन्दिर के अवशेष मिले थे; आर्कियॉलजिस्ट के के मोहम्मद

kk mohmad 2नई दिल्ली।  आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक के के मोहम्मद कहा है कि राम से ही भारत की पहचान है ओर अयोध्या में राम मन्दिर का निर्माण की प्रतीक्षा अब समाप्त हो रही है। मोहम्मद ने कहा है कि  ढांचे के नीचे खुदाई में हिन्दू मन्दिर के अवशेष मिले थे लेकिन वामपंथी इतिहासकारों ने मुसलमानों को गुमराह किया।आर्कियॉलजिस्ट के के मोहम्मद ने कहा कि अयोध्या हिंदुओं के लिए मक्का और मदीना की तरह है इसलिए इसे खुशी से हैंड ओवर कर देना चाहिए था। बहुत से मुसलमान मेरी बात से सहमत भी होते थे लेकिन वामपंथी इतिहासकार और कुछ अन्य लोगों ने सच का अनदेखा किया। मुसलमानों को गुमराह किया।।अब राम मन्दिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को भूमि पूजन करने जा रहे हैं तो राम मन्दिर के निर्माण में सभी को सहयोग करना चाहिए।

लोकसभा टीवी के खास कार्यक्रम संस्कृति संवाद में वरिष्ठ एंकर मनोज वर्मा के साथ बातचीत में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक के के मोहम्मद ने कहा कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि बाबरी मस्जिद से पहले वहां एक मंदिर था इसलिए उन्होंने कई बार कहा कि मुस्लिम पक्ष खुशी खुशी अयोध्या जन्मभूमि को हिन्दू पक्ष को सौंप दें पर उनकी बात को अनदेखा कर दिया गया।आर्कियॉलजिस्ट के के मोहम्मद नॉर्थ एएसआई के आंचलिक निदेशक रह चुके हैं और 1976-77 में मंदिर-मस्जिद मामले में हुई जांच के समय वह टीम का हिस्सा थे। के के मोहम्मद ने कहा था कि मुस्लिमों को अपनी इच्छा से अयोध्या की विवादित भूमि सौंप देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि विवादित बाबरी मस्जिद के नीचे मिले सबूतों से पता चलता है कि वहां एक बड़ा मंदिर था। उन्होंने बताया, ‘1976-77 में बीबी लाल की अगुआई में पहली बार उत्खनन किया गया। मैं उस टीम में था। हमने देखा कि मस्जिद के 12 स्तंभ ऐसे थे जो कि मंदिर के अवशेष थे। ये पिलर मंदिर के ही थे।kk mohmad 2के के मोहम्मद ने कहा कि 12वीं और 13वीं शताब्दी के अधिकतर मंदिरों के स्तंभों में आधार पूर्ण कलश के जैसा होता था जो कि हिंदू धर्म में समृद्धि का प्रतीक है। इसे अष्ट मंगल चिह्न के रूप में जाना जाता है जो कि आठ पवित्र चिह्नों में से एक है।खुदाई मेंअष्ट मंगल चिह्न मिले थे, जो कि मंदिरों में ही पाए जाते हैं। स्तंभों के ऊपर जो नक्काशियां मिली थीं उनका इस्लामिक शैली से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं था। मोहम्मद के मुताबिक अयोध्या की विवादित मस्जिद के 12 स्तंभ ऐसे थे जो कि मंदिर के अवशेष थे। उनके मुताबिक 12वीं और 13वीं शताब्दी के अधिकतर हिन्दू मंदिरों के स्तंभों में आधार पूर्ण कलश जैसा होता था। जिसे अष्ट मंगल चिह्न के रूप में जाना जाता है, इस चिह्न का इस्लामिक शैली से कोई भी लेना-देना नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में ये माना कि जहां विवादित ढांचा (बाबरी मस्जिद) खड़ा गया था, वह खाली जमीन नहीं थी।

उन्होंने बताया कि दूसरी बार 2003 में खुदाई हुई लेकिन तब तक मस्जिद गिराई जा चुकी थी इसलिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सर्वे किया गया। इसमें भी पता चला कि बाबरी मस्जिद के नीचे भी कई स्ट्रक्चर थे। यह खुदाई हरी मांझी और बीआर मणि की देखरेख में की गई थी। उन्होंने बताया कि दूसरी बार की खुदाई में 50 स्तंभ मिले। इसका मतलब है कि मस्जिद से पहले का स्ट्रक्चर काफी बड़ा था। उन्होंने कहा कि दूसरी बार की खुदाई में घड़ियाल के आकार की प्रणाली (जलाभिषेक के बाद पानी बहाने वाला स्ट्रक्चर) पाई गई। उन्होंने कहा कि इस खुदाई में टेराकोटा के लगभग 263 टुकड़े मिले जो कि अलग-अलग देवी देवताओं की मूर्तियों के थे। उन्होंने कहा कि मस्जिद में जीवित प्राणियों के चित्र नहीं बनाए जा सकते तो यह मस्जिद कैसे हो सकती है? उन्होंने कहा कि मस्जिद के पश्चिमी हिस्से में जब खुदाई की गई तो कई टेराकोटा मिले जो कि मानवों और जानवरों की आकृतियां थीं। मोहम्मद ने कहा कि मस्जिद में ऐसी आकृतियां नहीं हो सकती क्योंकि इन्हें इस्लाम में ‘हराम’ बताया गया है। उन्होंने कहा कि बीबी लाल ने इन बातों को हाइलाइट नहीं किया क्योंकि जांच का उद्देश्य यह बताना नहीं था कि वहां मंदिर था या नहीं बल्कि उस जगह के सांस्कृतिक विकास को जानना था।

कई इतिहासकारों ने किए झूठे दावे
केके मोहम्मद ने कहा कि 1990 के आसपास उस जगह पर रोमिला थापर, डीएन झा और आरएस शर्मा जैसे इतिहासकार पहुंचे और उन्होंने दावा किया कि मंदिर का कोई अवशेष नहीं पाया गया जो कि सरासर झूठ था। यह भी कहा गया कि रिपोर्ट में मंदिर का कोई जिक्र नहीं है।बीबी लाल ने स्पष्ट किया कि उन्हें बड़ी संख्या में मंदिर के अवशेष मिले लेकिन उन्हें मुद्दा नहीं बनाया गया। केके मोहम्मद ने कहा कि वामपंथी इतिहासकारों ने गलत व्याख्या की। इसकी वजह यह थी कि वे इतिहासकार थे आर्कियॉलजिस्ट नहीं थे। उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार चुप रहने के लिए भी कहा गया। आलोचना भी की गई पर उन्होंने अपना काम किया। एक सवाल के उत्तर में मोहम्मद ने कहा कि अयोध्या की राम से और राम से भारत की पहचान है इसलिए राम मन्दिर के निर्माण में सभी को सहयोग करना चाहिए।

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