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रामायण ने बनाया नया विश्व रिकार्ड

ramayan world recordएक ऐसा नाम जिसे सुनने मात्र से असीम शांति और धैर्य का एहसास होता है | विगत कुछ समय से दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर इसका प्रसारण किया जा रहा है | रामायण का प्रसारण 24 मार्च 2020 से 18 मार्च 2020 के मध्य किया गया | उत्तर रामायण का प्रसारण 19 अप्रैल 2020 से हो रहा है आज उस प्रसारण का अंतिम दिन है | इसके पूर्व 25 जनवरी 1987 से ले करके 31 जुलाई 1988 तक रामायण का प्रसारण किया गया था | जबकि लव-कुश जिसे उत्तर रामायण के नाम से भी जाना जाता है का प्रसारण 1988-89 के बीच किया गया था | रामायण मे चुनिंदा खास बातें नहीं है बल्कि सम्पूर्ण रामायण ही शब्दों की परिभाषा और व्यक्ति की कल्पना से परे है | रामायण के प्रत्येक कलाकार का अभिनय देखकर आपको ऐसा लगेगा मानो इन सब का जन्म धरती पर इसी सीरियल मे कार्य करने को लेकर हुआ था | पहले एपिसोड से लेकर अभी तक के एपिसोड ने जिस तरह से दर्शकों को बाधे रखा है, उत्साहित किया है, ज्ञान से अभिभूत किया है, वचनों के पालन को दिखया है, हर्षित किया है, सोच मे परिवर्तन किया है और अमिट प्रभाव लोगों के मन मे पुनः डाला है उसका निसन्देह दूरगामी अच्छा परिणाम समाज को मिलना चाहिये |रामायण सीरियल ने अपना ही रिकार्ड तोड़ कर नया रिकार्ड बनाया है | वर्ष 1987-88 की अवधि के प्रसारण को 65 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा था | जबकि मार्च-अप्रैल 2020 के 25 दिनों के रामायण के प्रसारण को 255 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा है जो अपने आप मे नया रिकार्ड है | अकेले 16 अप्रैल 2020 के प्रसारण को 7.7 करोड़ लोगों ने देखा | यह अपने आप मे विश्व रिकार्ड है | रामायण की वजह से दूरदर्शन नेशनल (DD National) अपने अस्तित्व मे आने से लेकर अब तक सबसे अधिक लोगों के द्वारा देखा गया | जिससे दूरदर्शन की टीआरपी लगातार नंबर 1 पर बनी हुई है | दी वाल स्ट्रीट जर्नल ने रामायण के पुनः प्रसारण की ख्याति को स्वीकार किया है | रामायण और उत्तर रामायण सबसे अधिक देखे जाने वाले सीरियल है |
shri-ramcharitmanas-ramayana-original-imae9etv7jdxyneqकोरोना वायरस की वजह से देश में लागू लॉकडाउन के बीच सरकार ने रामानंद सागर की रामायण का दूरदर्शन पर दोबारा प्रसारण किया। अब इस शो ने विश्व रिकॉर्ड बना लिया है। राष्ट्रीय चैनल के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट के अनुसार, ‘रामायण के दोबारा प्रसारण ने दुनिया भर में दर्शकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और यह 16 अप्रैल को 7.7 करोड़ दर्शकों की संख्या के साथ दुनिया भर में सबसे अधिक देखा जाने वाला मनोरंजन धारावाहिक बन गया है।’कोरोना वायरस से देशभर के लोग इस समय अपने घर के अंदर बंद है। टीवी पर किसी भी सीरियल का कोई नया एपिसोड प्रसारित नहीं हो रहा है क्योंकि टीवी धारावाहिक, फिल्मों और वेब सीरिज की शूटिंग 17 मार्च से बंद है। इसके अलावा लंबे समय से लोगों की मांग थी कि रामायण को दोबारा प्रसारित किया जाए। जिसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन अवधि में रामायण को दोबारा प्रसारित करने का फैसला लिया।लोग रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक धारावाहिकों को काफी पसंद कर रहे हैं। रोजाना सोशल मीडिया पर इसके एपिसोड और दृश्यों की चर्चा होती है। रामायण के दोबारा प्रसारण से धारावाहिक के मुख्य किरदार अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया, सुनील लहरी और अरविंद त्रिवेदी एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं। वे लोगों से मिलने वाले प्यार और प्रतिक्रिया से काफी उत्साहित हैं।जिस दिन रामायण के पहले एपिसोड का प्रसारण हुआ था उस दिन इसे 17 मिलियन (एक करोड़, 70 लाख) लोगों ने देखा था। अन्य मशहूर धारावाहिक जैसे बुनियाद, शक्तिमान, श्रीमान श्रीमती और देख भाई देख भी टीआरपी के मामले में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं निजी चैनलों की बात करें तो वे दर्शकों को पुराने धारावाहिकों को दिखा रहे हैं।

        34 सालों पहले रामायण के प्रसारण के वक्त इस कई ऐसी मिसाल कायम हुई जो दोबारा बनने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।

  • रामायण के प्रसारण के वक्त पूरे देश में लगभग लॉक डाउन सरीखा ही माहौल बन जाता था। देश के ज्यादातर हिस्सों में सड़क पर कर्फ्यू की स्थिति बन जाती थी और सड़कों पर किसी वाहन की कोई आवाजाही नहीं होती थी।
  • कई इलाकों में रामायण को टीवी पर देखने से पहले कई इलाकों में टीवी की ही आरती उतारी जाती थी। टीवी सेट कम होने के कारण जिन घरों में टेली विजन होता था उनके घरों में पड़ोसियों की भीड़ लग जाया करती थी।
  • अमूमन लोग टीवी देखने से पहले जूते-चप्पल उतार दिया करते थे। जिस कमरे में टीवी रखा होता था उस कमरे को मंदिर की तरह ही सम्मान दिया जाता था।
  • आज भी देश के कई मंदिरों में भगवान राम-सीता और लक्ष्मण की जगह रामायण धारावाहिक के कलाकार अरुण गोविल, दीपिका चिकलिया और सुनील लहरी की फोटो मिल जाती है।
  • रामायण धारावाहिक में रावण की मृत्यू के एपिसोड के बाद रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी के गांव भर में शोक मनाया गया।
  • युद्ध के एपीसोड की शूटिंक के लिए रामायण धारावाहिक में जब भी और कलाकारों की जरुरत होती थी तब गांवों में ढिंढोरा पिटवा कर लोगों को राम सेना या रावण सेना में भर्ती कर लिया जाता था।
  • रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी ने इसके बाद जीवन भर राम कथा का पाठ किया। वो आज भी रामायण धारावाहिक को देखकर भावुक हो जाते हैं।
  • रामायण में भरत, हनुमान, सुग्रीव, विभीषण, मंथरा का किरदार निभाने वाले कलाकार दूसरे प्रसारण से पहले ही इस दुनिया से जा चुके हैं।
  • शूटिंग के दौरान रामायण धारावाहिक में काम करने वाले सभी 150 कलाकारों के लिए निर्देशक रामानंद सागर पूरी तरह शाकाहारी भोजन बनवाते थे।
  • रामानंद सागर की रामायण को 2003 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज किया गया था।
  • पांचों महाद्वीप में रामायण को दुनिया में एक साथ 65 करोड़ दर्शकों ने एक साथ देखा था।
  • इस धारावाहिक में अभिनय के बाद राम का किरदार निभाने वाले कलाकार अरुण गोविल ने शराब, सिगरेट, पान मसाले के पूरी तरह त्याग कर दिया।
  • राम और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल और सुनील लहरी ने बाद में मुंबई में ही राम लक्ष्मण प्रोडक्शन हाउस नाम से अपनी कंपनी बना ली। ये असल जिंदगी में भी भाईयों की तरह ही रहने लगे थे।
  • दूसरी बार टेलिकास्ट के दौरान 16 अप्रैल में रावण के वध के एपीसोड को एक सात 7.7 करोड़ लोगों ने देखा। बीते पांच सालों में किसी भी चैनल में किसी भी धारावाहिक को आज तक इतनी लोकप्रियता नहीं मिली है।  

रामायण और महाभारत ने तोड़े टीवी TRP के सारे रिकॉर्ड

ram-darbarकोरोना वायरस के चलते देश में इन दिनों का लॉकडाउन चल रहा है। सभी लोग घरों में ही रहें इसके लिए केंद्र सरकार ने दूरदर्शन ( पर अस्सी और नब्बे के दशक के कई सीरियल शुरू किये हैं। जिसमें रामायण, महाभारत प्रमुख हैं। अब दूरदर्शन पर अस्सी और नब्बे के दशक के के ये सीरियल लोगों के बीच खूब पसंद किये जा रहे हैं। जिसके चलते नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। BARC के मुख्य कार्यकारी सुनील लुल्ला ने बताया कि इसकी मुख्य वजह राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन के दर्शकों की संख्या में वृद्धि होना है। इसी के साथ ही उन्होंने कहा कि सामान्य मनोरंजक चैनलों के दर्शकों की संख्या दूरदर्शन की वजह से काफी बढ़ी है। इतना ही नहीं परिषद ने बताया की 12 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह तक टीवी देखने का आंकड़ा कोविड-19 से पहले की तुलना में 38 प्रतिशत बढ़ गया है। ऐसा बहुत कम देखने को मिला है जब अचानक से दर्शकों का आकड़ा इतना बढ़ गया हो।इस दौरान दर्शकों की संख्या तो बहुत बढ़ी है लेकिन विज्ञापन में काफी गिरावट देखने को मिली है। वहीं रामायण के प्रसारण के शुरू होने से उसके किरदारों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर रामायण को लेकर कई तरह के memes भी वायरल हो रहे है। रामायण के एपिसोड को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा जारी है।प्रधानमंत्री मोदी ने 14 अप्रैल को देश के नाम संबोधन में 3 मई तक लॉकडाउन-2  बढ़ाने की बात कही। टीवी पर संबोधन को रिकॉर्ड 20.3 करोड़ लोगों ने देखा। प्रसारण दर्शक अनुसंधान परिषद (बार्क) ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन ने उनके ही पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा है। अपने इस संबोधन में मोदी ने राष्ट्रव्यापी बंद को 19 दिन बढ़ाने की घोषणा की। बाजार अनुसंधान एजेंसी एसी नील्सन ने कहा कि रिकॉर्ड संख्या लोगों ने संपर्क का पता लगाने के आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड किया है लेकिन इनमें से सिर्फ 10 प्रतिशत ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।रामायण को इस दौर में पसंद किए जाने पर अरुण ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा-‘रामायण एक ऐसा विषय है, जिसे कोई भी पीढ़ी रीलेट कर सकती है। यह महाकाव्य तब भी प्रासंगिक था और आज के दिन भी यह प्रासंगिक है। रामायण की बेसिक बातें कभी भी अपना मूल्य नहीं खोएंगी। ये कभी भी पुरानी नहीं हो सकती हैं। यह सब रिश्ते का बारे में हैं, जो कभी भी पुराना नहीं हो सकता। यह हमारे कल्चर का पार्ट है और सौभाग्य से लॉकडाउन में युवाओं के पास इससे जुड़ने का काफी समय है।’

हरि अनंत हरि कथा अनंता

दूरदर्शन के डीडी नेशनल चैनल पर प्रसारित हुए धारावाहिक रामायण ने दुनिया में सबसे अधिक देखे जाने वाले शो का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके लिए भारत के उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने दूरदर्शन को बधाई दी । उप राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किये गये ट्वीट में कहा गया- हरि अनंत, हरि कथा अनंता… यह जानकर प्रसन्नता हुई कि दूरदर्शन द्वारा फिर से प्रसारित की गई रामायण ने लोकप्रियता में विश्व रिकॉर्ड कायम किया है, और यह दुनिया का सबसे अधिक देखा जाने वाला कार्यक्रम बन गया है। एक अन्य ट्वीट में नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के क़रीब ले जाने के दूरदर्शन का अभिनंदन किया गया। इस ट्वीट में लिखा गया- भारतीय महाकाव्यों पर आधारित अस्सी के दशक के लोकप्रिय धारावाहिकों का दूरदर्शन द्वारा पुन: प्रसारण स्वागत योग्य व सराहनीय पहल है। नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और लोक परम्परा से परिचि कराने में दूरदर्शन के इन प्रयासों का अभिनंदन करता हूं।रामायण का पहली बार प्रसारण दूरदर्शन पर अस्सी के दशक के आख़िरी सालों में किया गया था। उस वक़्त भी इस शो ने बेहद लोकप्रियता हासिल की थी। आज मिडिल एज में पहुंच चुकी पीढ़ी की इस शो से कई यादें जुड़ी हैं। इसीलिए शो का प्रसारण शुरू होते ही इसे दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया। टीवी रेटिंग्स में यह शो नम्बर वन बना रहा। शो की बदौलत दूरदर्शन को अपना पुराना खोया हुआ मुकाम हासिल हुआ। रामायण के प्रसारण के दौरान दूरदर्शन नम्बर वन चैनल बना रहा।

टेलीविजन दर्शकों की संख्या और विज्ञापन राजस्व में बढ़ोतरी

Union Minister Prakash Javadekar Addresses Press Conference In Indoreप्रसारण दर्शक अनुसंधान परिषद (बार्क) ने कहा कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक कार्यक्रमों के प्रसारण से एक और सप्ताह के दौरान टेलीविजन दर्शकों की संख्या और विज्ञापन राजस्व में बढ़ोतरी हुई है।बार्क की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन के पहले से अब में तुलना करें तो कुल मिलाकर टीवी देखने में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान 11 से 17 अप्रैल के बीच 1,240 अरब मिनट का कंटेंट दर्शकों की तरफ से देखा गया है। परिषद ने कहा कि भारत के लगभग आधे लोग रोजाना टीवी देख रहे हैं। जबकि, लॉकडाउन के पहले ये आंकड़ा 32 फीसदी था।देश में टीवी दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बीच लोग समाचार और फिल्में भी खूब देख रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन ने पौराणिक धारावाहिकों को फिर से दिखाना शुरू किया, जिससे पिछले तीन सप्ताह से उसके दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बार्क ने कहा, ‘‘हिंदी सामान्य मनोरंजन चैनलों (जीईसी) में पौराणिक कार्यक्रम मनोरंजन का मुख्य जरिया बन गए हैं। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम कुल हिंदी जीईसी में 43 फीसदी का योगदान कर रहे हैं।’’परिषद की तरफ से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक पौराणिक कार्यक्रम (कई बार दिन में दो बार प्रसारित होते हैं) को एक सप्ताह के दौरान 35.3 करोड़ दर्शकों ने कुल 109 अरब मिनट तक देखा। बार्क ने कहा कि ऐसे समय में जब विज्ञापनों में कमी आ रही है, रामायण और महाभारत के दौरान विज्ञापन हर दिन 2,000 सेकेंड तक बढ़े हैं।आंकड़ों के मुताबिक मार्च के अंत में रामायण की शुरुआत तीन विज्ञापनदाताओं के साथ हुई थी और इस समय उसके पास प्रतिदिन करीब 42 विज्ञापनदाता हैं। इसी तरह महाभारत के लिए करीब 25 विज्ञापनदाता हैं। इसमें कहा गया है कि ‘भक्ति’ के तहत आने वाले चैनलों के दर्शकों की संख्या पांच प्रतिशत बढ़ी है। बार्क के मुताबिक समाचार चैनलों में 195 फीसदी, कारोबारी न्यूज चैनलों में 82 फीसदी और फिल्मी चैनलों में 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

दुनियाभर में दो दर्जन से ज्‍यादा भाषाओं में लिखी गई है रामायण

इस धारावाहिक को बनाने के लिए निर्देशक रामानंद सागर  और उनकी रिसर्च टीम ने 25 से ज्‍यादा रामकथाओं का अध्‍ययन किया. बता दें कि भारत समेत 10 देशों में दो दर्जन से ज्‍यादा भाषाओं  में 300 से ज्‍यादा रामकथाओं के 3,000 से ज्‍यादा संस्‍करण  उपलब्‍ध हैं.बेल्जियम से भारत आए मिशनरी फादर कामिल बुल्‍के (Camille Bulcke) ने रामकथाओं पर काफी शोध किया. यहां आने के बाद वह हिंदी, तुलसी और वाल्मीकि के भक्त बन गए. फादर कामिल को 1974 में साहित्य व शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. उन्‍होंने अपनी किताब ‘रामकथा: उत्‍पत्ति और विकास’ में दुनियाभर में उपलब्‍ध रामकथाओं का विश्‍लेषण किया. वह लिखते हैं, ‘ये माना जाता है कि राम के जीवन पर सबसे पहला ग्रंथ महर्षि वाल्मीकि की लिखी रामायण है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि राम का पहली बार उल्लेख वाल्मीकि ने अपने ग्रंथ में किया था. ऋग्वेद में एक स्थान पर राम नाम के एक प्रतापी और धर्मात्मा राजा का उल्लेख है.फादर कामिल लिखते हैं क‍ि रामकथा का सबसे पहला बीज दशरथ जातक कथा में मिलता है, जो ईसा से 400 साल पहले लिखी गई थी. इसके बाद ईसा से 300 साल पहले का काल वाल्मीकि रामायण का है. वाल्मीकि रामायण को सबसे ज्यादा प्रमाणिक इसलिए भी माना जाता है क्योंकि वह भगवान राम के समकालीन ही थे और सीता ने उनके आश्रम में ही लव-कुश को जन्म दिया था. बाद में लव-कुश ने ही राम को दरबार में वाल्मीकि की लिखी रामायण सुनाई थी.ऋग्वेद में सीता का भी जिक्र है.

दुनिया में रामकथाओं के 3,000 से ज्‍यादा संस्‍करण हैं. वहीं, अलग-अलग 300 से ज्‍यादा रामायण लिखी जा चुकी हैं. भारत के अलावा 9 देशों की अपनी रामायण  हैं. वाल्‍मीकि रामायण पहली रामकथा नहीं है. वहीं, गोस्‍वामी तुलसीदास की लिखी रामचरित मानस  भारत में सबसे ज्‍यादा प्रचलित है.

ऋग्वेद ने सीता को कृषि की देवी माना है. बेहतर कृषि उत्पादन और भूमि के दोहन के लिए सीता की स्तुतियां भी मिलती हैं. ऋग्वेद के 10वें मंडल में ये सूक्त मिलता है जो कृषि के देवताओं की प्रार्थना के लिए लिखा गया है. वायु, इंद्र आदि के साथ सीता की भी स्तुति की गई है. काठक ग्राह्यसूत्र में भी उत्तम कृषि के लिए यज्ञ विधि दी गई है. इसमें सीता का जिक्र है. इसमें यज्ञ विधान के लिए सुगंधित घास से सीता देवी की मूर्ति बनाने का जिक्र किया गया है.लक्ष्मण रेखा का जि‍क्र वाल्मीकि रामायण में नहीं है. तुलसीकृत रामचरित मानस में भी इसका जिक्र नहीं है. लक्ष्‍मण रेखा के बारे में बाद के प्रसंगों में मंदोदरी एक जगह लक्ष्‍मण रेखा का इशारा करती हैं. दक्षिण की कम्ब रामायण में भी रावण पूरी झोपड़ी ही उठा ले जाता है. बंगाल के काले जादू वाले दौर में कृतिवास रामायण में तंत्रमंत्र के प्रभाव में लक्ष्मण रेखा की बात हुई. वहीं, वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस में राम शबरी के यहां जाकर बेर जरूर खाते हैं लेकिन वे जूठे नहीं हैं. जूठे बेर की चर्चा सबसे पहले 18वीं सदी के भक्त कवि प्रियदास के काव्य में है. गीता प्रेस से निकलने वाली कल्याण के 1952 में छपे अंक से ये धारणा लोकप्रिय हुई और रामकथाओं का हिस्सा बन गई.हनुमान का लंका में जाकर सीता से मिलना, अशोक वाटिका उजाड़ना और लंका को जलाने वाला प्रसंग तो लगभग सभी को पता है, लेकिन कुछ रामकथाओं में इसमें भी अंतर है. आनंद रामायण 14वीं शताब्दी में लिखी गई थी. इसमें लिखा गया है कि जब सीताजी से अशोकवाटिका में मिलने के बाद हनुमान को भूख लगी तो उन्‍होंने अपने हाथ के कंगन उतारकर कहा कि लंका की दुकानों में इन्‍हें बेचकर फल खरीदकर अपनी भूख मिटा लो. सीताजी ने अपने पास रखे दो आम भी हनुमान को दे दिए. हनुमान के पूछने पर सीताजी ने बताया कि ये फल इसी अशोक वाटिका के हैं. तब हनुमान ने कहा कि वे इसी वाटिका से फल लेकर खाएंगे.जावा की सैरीराम रामायण में लिखा गया है कि रावण ने विभीषण को समुद्र में फिंकवा दिया था. वह एक मगरमच्‍छ की पीठ पर चढ़ गया. बाद में हनुमान ने उसे बचाया और राम से मिलवाया. राम से मुलाकात के समय विभीषण के साथ रावण का एक भाई इंद्रजीत और बेटा चैत्रकुमार भी था. राम ने विभीषण को युद्ध के पहले ही लंका का अगला राजा घोषित कर दिया था. रंगनाथ रामायण में जिक्र है कि विभीषण के राज्याभिषेक के लिए हनुमान ने एक बालूरेत की लंका बनाई थी, जिसे हनुमत्लंका के नाम से जाना गया. वहीं, हनुमान के सागर को लांघने का जिक्र वाल्‍मीकि रामायण में नहीं है. वाल्‍मीकि रामायण में हनुमान के सागर को तैरकर पार करने का जिक्र है. समुद्र के ऊपर से उडकर जाने का जिक्र तुलसीकृत मानस में है. जैन परंपरा में देवात्मा कभी हिंसा नहीं कर सकता. इसलिए पउमंचरिय (जैन रामायण) में राम रावण का वध नहीं करते बल्कि लक्ष्मण से करवाते हैं. लक्ष्मण भी लक्ष्मण नहीं, वासुदेव हैं जो रावण का उद्धार करते हैं. इसके बाद राम निर्वाण को प्राप्त होते हैं और लक्ष्मण नर्क में जाते हैं. इस रामायण में सीता रावण की बेटी हैं, जिन्हें उसने छोड़ दिया था और वो ये बात नहीं जानता है. ऐसे ही अलग-अलग रामकथाओं में कुछ अंतर हैं. बता दें कि संस्कृत में करीब 17 तरह की छोटी-बड़ी रामकथाएं हैं, जिनमें वाल्मीकि, वशिष्ठ, अगस्त्य और कालिदास की रचनाएं हैं. वहीं, उड़िया भाषा में करीब 14 तरह की रामकथाएं हैं. हालांकि, सभी के कथानक वाल्मीकि रामायण से ही प्रेरित हैं. नेपाल में तीन रामायण प्रचलित हैं. दुनिया में सबसे ज्‍यादा मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया में ककबिन रामायण गाई जाती है.

manoj verma

श्री मनोज वर्मा वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं। 
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