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बच्चों की बिक्री में घिरी मदर टेरेसा की मिशनरी

maotherरांची। करुणा, दया व सेवा की प्रतिमूर्ति सेंट मदर टेरेसा द्वारा स्थापित संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित ‘निर्मल हृदय’ आश्रम से बच्चों की बिक्री का मामला तूल पकड़ रहा है। पुलिस पूरे गिरोह को पकड़ने की तैयारी में जुट गई है। संस्था की ओर से अब तक जितने भी बच्चों की खरीद-बिक्री की गई, पुलिस उनके खरीदारों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस ने अनिमा सहित अन्य सिस्टरों के पास से 1.49 लाख रुपये जब्त किए हैं। मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम से बच्चा बेचे जाने को लेकर प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद गुरुवार को सिस्टर कोंसीलिया को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें सीजेएम स्वयंभू की अदालत में पेश किया, जहां से 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने मंगलवार को बच्चा बेचे जाने को लेकर प्राथमिकी दर्ज करायी थी.  इसके बाद कोतवाली पुलिस ने सिस्टर कोंसीलिया से पूछताछ की थी. पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया था कि तीन बच्चों को बेेचा गया है. एक बच्चे को मुफ्त में किसी व्यक्ति को दिया गया. उन्होंने स्वीकार किया था कि यूपी के सोनभद्र निवासी सौरभ कुमार अग्रवाल को 1़ 20 लाख में जो बच्चा बेचा गया था, उसमें 90 हजार रुपये उन्हें भी मिले थे. इसी बयान को सबूत मान कर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया.

इस्ट जेल रोड स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम में नवजातों की बिक्री के मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडब्ल्यूसी ने वहां मौजूद सारी बच्चियों को दूसरे शेल्टर में शिफ्ट करने का फैसला लिया है. मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम व हिनू के शेल्टर होम को सील किया जा सकता है. इसे ब्लैक लिस्टेड भी करने की कार्रवाई की जायेगी.सीडब्ल्यूसी के सदस्यों ने बताया, मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सिस्टर व कर्मचारी की मिलीभगत से बच्चा बेचे जाने का खुलासा होने के बाद बुधवार को ही सील करने की कार्रवाई हो सकती थी. लेकिन, यहां रह रहीं 75 बीमार महिलाओं के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी थी.संचिका जब्त करने के बाद मिली जानकारी  : सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष रूपा कुमारी व सदस्य तनुश्री सरकार के अनुसार, निरीक्षण के दौरान चैरिटी होम के अंदर जाने से मना किया जाता था.
कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी मुख्यालय ने घटना को स्तब्धकारी और अकल्पनीय करार दिया है. मिशनरीज ऑफ चैरिटी मुख्यालय की प्रवक्ता सिस्टर सुनीता कुमार ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा, मिशनरीज पूरे मामले की अपनी तरह से जांच करेगी.
हालांकि उन्होंने यह खुलासा करने से इनकार कर दिया कि जांच किस रूप में होगी या क्या कोई टीम रांची जायेगी. उन्होंने कहा : मिशनरीज प्रमुख सिस्टर प्रेमा को पूरे मामले की जानकारी मिली है, लेकिन फिलहाल वह कोलकाता में नहीं हैं. वह 20 जुलाई को आयेंगी. यह पूरी घटना ‘शॉकिंग’ है. यह घटना सच नहीं हो सकती है. ऐसा लगता है कि जानबूझ कर किसी ने इस घटना को रचा है और साजिश की गयी है. मिशनरीज में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है. यह पूछे जाने पर कि इस मामले में मिशनरीज की कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, उन्होंने कहा :  विस्तृत रूप से कोई जानकारी नहीं है. लेकिन यह घटना सच नहीं हो सकती है. केंद्र सरकार के निर्देश के बाद मिशनरीज में गोद देना पूरी तरह से बंद हो गया है. बच्चे को गोद देने के एवज में मिशनरीज ने कभी भी पैसे नहीं लिये हैं.

नाबालिग मां ने कहा है, पिता का नाम नहीं बता सकती
बच्चे की बिक्री के लिए उसकी नाबालिग मां से शपथ पत्र करवाया गया है। शपथ पत्र में पीड़िता ने कहा है कि मैं अपनी भूल, लोक लज्जा, सामाजिक बदनामी, आर्थिक तंगी के कारण इस बच्चे को नहीं रख सकती। लालन-पालन नहीं कर सकती और पिता का नाम नहीं दे सकती हूं। इस वजह से परिचित मधु और अनिमा के माध्यम से निस्संतान दंपती को देने का फैसला लिया है। अनिमा व मधु ने सौरभ कुमार अग्रवाल और उनकी पत्‍‌नी प्रीति अग्रवाल से मिलवाया। मैं बिना किसी भय व दबाव के अपने बच्चे को सौरभ कुमार को सौंप रही हूं। यह शपथ पत्र नॉटरी पब्लिक से कराया गया है।

सिमडेगा की दंपती के खरीदार के पास बकाया है 50 हजार
पुलिस की पूछताछ में सिस्टर कांसिलिया ने कहा है कि कई बच्चों की बिक्री की गई है। हालांकि निश्चित आंकड़ा और विस्तृत ब्योरा फाइल देखने के बाद ही दे पाऊंगी। फाइल कहां है, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। इससे पहले अनिमा इंदवार ने बताया था कि उसने सिमडेगा के एक परिवार से एक पीडि़ता के बच्चे की बिक्री की है। इससे 50 हजार में सौदा तय हुआ था, लेकिन पैसे उधार हैं। पुलिस संबंधित दंपती का पता लगा रही है। अनिमा ने रांची के मोरहाबादी और कांटाटोली में भी दो बच्चों को 50-50 हजार में बेचा है। एक अन्य मुस्लिम महिला के बच्चे को बेचा गया है। सभी बच्चों की बिक्री के पैसे को सिस्टरों व अनिमा ने मिलकर आपस में बांट लिया था।

मां अब वापस बच्चे को पाना चाहती है
सोनभद्र निवासी दंपती को बच्चा बेचने वाली मां अब अपना बच्चा वापस पाना चाहती है। उसने सीडब्ल्यूसी से कहा है कि उसे बच्चा दिला दिया जाए। वह बच्चे को पालना चाहती है। सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष रूपा कुमारी ने कहा है कि मां को कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चा वापस दिया जा सकता है। पीड़िता गुमला की है।

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