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पत्रकारों के नाम पर रांची में फर्जीबाडा! एनयूजे में बवाल

Nuj2 (2)रांची। ( शाहनवाज )पत्रकारों के नाम रांची में हो रहे एक विवादास्पद कार्यक्रम को लेकर फूट पड गई है। नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट इंडिया के नाम पर रांची में हो रहे हैं इस कथित कार्यक्रम से झारखंड के अधिकांश पत्रकारों ने दूरी बना ली। कारण इस कार्यक्रम के आयोजकों पर पत्रकारों के नाम पर क​​िथत रूप से उगाही करने का आरोप है। मुख्यमंत्री रघुवारदास से एनयूजे के नाम पर हो रहे इस कार्यक्रम की शिकायत की गई है। दिल्ली में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें अवगत करा चुका है।असल में चुनाव को लेकर एनयूजे आई में विवाद है।इस बीच आरोप है कि दिल्ली जंतर मंतर मुख्यालय पर एनयूजे के पूर्व अध्सक्ष रास बिहारी ने कार्यालय का दरवाजा तोडकर कर दिल्ली पत्रकार संघ के कार्यालय पर अवैध कब्जा कर लिया है। रास बिहारी के खिलाफ थाने में शिकायत की गई है।

आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष रास बिहारी और पूर्व महासचिव रतन दीक्षित ने आधा दर्जन से अधिक राज्यों को चुनाव लडने नहीं दिया और चुनाव भी समय पर नहीं कराए। इसके बाद दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार एनयूजे आई के चुनाव आयोग नंद किशोर त्रिखा जी ने रास बिहारी और रतन दीक्षित की कार्यकारिणी को भंग कर वरिष्ठ पत्रकारों की एक सात सदस्यीय समिति बना दी जिसने एनयूजे आई संविधान के मुताबिक एक माह में चुनाव करा कर नए चुनाव करा दिए। एनयूजे आई का अधिवेशन 24 —25 फरवरी को चंडीगढ में हो चुका है। एनयूजे आई के नए अध्यक्ष अशोक मलिक ने इसकी पुष्ठि भी की है। बकौल अशोक मलिक चंढीगढ में एनयूजे आई का अधिवेशन संविधान के अनुसार हुआ है जबकि रांची में जो लोग कार्यक्रम कर रहे हैं उसका एनयूजे आई से कोई लेना देना नहीं है। चंडीगढ के एनयूजे आई कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर, शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के मंत्रियों ने भाग लिया। देश भर के 300 से अधिक पत्रकारों ने इसमें भाग लिया। हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह ने सभी पत्रकारों को अपने घर चाय पर बुलाया। दूसरी झारखंड जेयूजे के संयोजक बलदेश शर्मा ने कहा है कि रांची में एनयूजे आई के नाम पर फर्जीबाडा किया जा रहा है। रास बिहारी को संगठन से निकाला जा चुका है और जो लोग झारखंड में पत्रकारों के नाम पर कार्यक्रम कर रहे हैं उसको बाहर कर दिया गया है। झारखंड में पत्रकारों के नाम पर खेलगांव में हो रहे कार्यक्रम में दूसरे राज्यों से कुछ पत्रकार हवाई जहाज से भी पहुंचे हैं। लेकिन रांची के असल पत्रकारों ने इस कार्यक्रम से खुद को दूर कर रखा है और यह कुछ पत्रकारों का कार्यक्रम बन कर रहे गया है। आयोजक खुद के ईमानदार और दूसरे को फर्जी बता रहे हैं। पर पत्रकारों के इस कार्यक्रम ने पैसे की उगाही को लेकर भी कई गंभीर सवाल खडे कर दिए है।

पत्रकारों के कार्यालय पर अवैध कब्जा, मामला थाने पहुंचा
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (एनयूजे) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी पर अवैध रूप से दिल्ली पत्रकार संघ के मुख्यालय पर कब्जा करने का आरोप लगा है। यह मुख्यालय दिल्ली के जंतर-मंतर रोड स्थित सरदार बल्लभ भाई पटेल स्मारक भवन की दूसरी मंंजिल पर स्थित है। एनयूजे और दिल्ली पत्रकार संघ ने मामले की शिकायत दिल्ली के एक थाने में की है, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच-पड़ताल की। जानकारी के मुताबिक, 9 मार्च को नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के कार्यालय में जब पदाधिकारी और पत्रकार मीटिंग के लिए पहुंचे तो पता चला कि गेट पर लगा ताला और कुंडा तोड़कर उस पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इतना ही नहीं पत्रकारों की आवाजाही रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसी के गार्ड की तैनात करवा दिए गए। यहां तक कि पत्रकारों पर नजर रखने के कैमरे भी लगवा दिए। इस घटना से पत्रकारों मे गहरा रोष है। बता दें कि यह मीटिंग 85 साल के वरिष्ठ पत्रकार और एनयूजे (आई) के संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र प्रभु ने यह बैठक बुलाई थी, क्योंकि कार्यालय से वेलफेयर फॉउंडेशन और दिल्ली जॉर्नलिस्ट एसोसिएशन के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने की उन्हें जानकारी मिली थी। इस बीच एनयूजे आई के नए निर्वाचित अध्यक्ष अपनी टीम के साथ कार्यालय का चार्ज लेने के लिए भी पहुंचे हुए थे, लेकिन सिक्योरिटी गॉर्ड ने एनयूजे के अध्यक्ष अशोक मालिक और दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोहर सिंह और अन्य पत्रकारों को कार्यालय में जाने से रोक दिया। इस पर दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को बुला लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने पड़ताल की और पत्रकार और पदाधिकारियों के बयान लिए।बता दें कि इससे पहले भी 16 जनवरी को दिल्ली में इसी तरह की एक शिकायत दर्ज करायी गई थी। मनोहर सिंह ने इसकी पुष्टि की है। मनोहर सिंह ने कहा कि डीजेए पहले रास बिहारी को संगठन से निकाल चुका है लेकिन रास बिहारी किसी न किसी तरह से संगठन के कार्याल पर अवैध रूप से कब्जा जमाए रखना चाहते हैं।

दूसरी ओर एनयूजे के नाम पर एक गुट द्वारा रांची में कराए कार्यक्रम को लेकर भी विवाद खडा हो गया है। झारखंड में अधिवेशन रास बिहारी ने कराया।लेकिन इस कार्यक्रम में झारखण्ड सरकार एंव केंद्र सरकार का एक भी मंत्री शामिल नहीं हुआ।राज्य सरकार ने कार्यक्रम से लगभग दूरी बनाए रखी। कारण पूर्व अध्यक्ष रास बिहारी के मंच पर दागी मधु कोडा और कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय ने इसका उदहरण किया। आधे से अधिक गैर पत्रकारों को बुलवाकर हॉल की कुर्सियों को भरने का किया गया प्रयास,फिर भी खाली पड़ी रही कुर्सियां।गौरतलब है मधु कोड़ा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। दूसरी ओर मंच पर कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय भी मौजूद थे जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने झारखंड के कुछ पत्रकारों को काम पर लगा रखा है इस कार्यक्रम में न तो राज्य सरकार का कोई मंत्री शामिल हुआ और ना ही केंद्र का मधु कोड़ा के कारण पत्रकारों के नाम पर बुलाया गया यह अधिवेशन पत्रकारों के बीच ही विवाद का कारण बन गया है।
आपको बता दें कि एनयूजे आई कर अधिवेशन 24 और 25 फरवरी 2018 को पहले ही हो चुका है और प्रेस काउंसिल के पूर्व सदस्य अशोक मलिक के नेतृत्व में पहले ही नई कार्यकारिणी ने कार्यभार संभाल लिया है। चंडीगढ में 18 राज्यों के पत्रकारों ने भाग लिया। जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर सहित हरियाणा,पंजाब और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मंत्रियों ने इसमें शिरक्त की।एनयूजे आई के अशोक मलिक ने कहा कि चंडीगढ में हुआ अधिवेश एनयूजे के संविधान के अनुसार हुआ है। इसलिए झारखंड में एनयूजे के नाम का दुरूपयोग किया गया है।झारखंड में पत्रकारों के नाम पर कथित कार्यक्रम हुआ है उससे एनयूजे आई का कोई लेना देना नहीं है। झारखंड में पत्रकारों के नाम पर फर्जीबाडा हुआ है।

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