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रोहिंग्या मुसलमान….

rongiyaरोहिंग्या शरणार्थी म्यांमार से भागकर बांग्लादेश आ रहे हैं. और बांग्लादेश में उनकी अच्छी खासी जनसंख्या है. हालांकि ये अलग बात है कि अब बांग्लादेश भी ये कह रहा है कि रोहिंग्या शरणार्थी उनके लिए खतरा हो सकते हैं. 1978 में म्यांमार की सरकार ने देशभर में Operation Dragon King चलाया तो लाखों की संख्या रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश चले गए. इस ऑपरेशन के तहत म्यांमार की सरकार ने अपने नागरिकों का Registration किया था.  इसके बाद म्यांमार में हिंसा हुई और करीब 2 लाख 20 हज़ार रोहिंग्या… बांग्लादेश चले गए. फिर वर्ष 1991-92 में जब म्यांमार के रखाइन राज्य में सेना की मौजूदगी बढ़ी, तब भी करीब ढाई लाख रोहिंग्या.. बांग्लादेश आ गए.  2012 में जब रोहिंग्या मुसलमानों और सेना के बीच हिंसा हुई, तब भी करीब 1 लाख 25 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश पहुंच गए.

इस वर्ष 25 अगस्त से म्यांमार के रखाइन में हिंसा हो रही है. और तब से अब तक करीब 4 लाख रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं.  इसका मतलब ये हुआ कि बांग्लादेश रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देता आया है और अभी भी दे रहा है. लेकिन हमारा सवाल ये है कि अगर रोहिंग्या मुसलमानों की जगह इतनी बड़ी आबादी हिंदुओं की होती तो क्या तब भी बांग्लादेश ऐसे ही इतनी बड़ी जनसंख्या को शरण देता?
इस सवाल का जवाब आंकड़ों में छिपा है. बांग्लादेश में हिंदू आबादी किस तरह से कम हुई है.. ये देखकर आप चौंक जाएंगे….1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त बांग्लादेश…को पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था…और वहां हिंदू आबादी करीब 28 फीसदी थी…1971 में बांग्लादेश बनने के बाद 1981 में वहां जनगणना हुई… और उसमें हिंदू आबादी सिर्फ़ 12 फीसदी रह गई…इसके बाद बांग्लादेश में वर्ष 2011 में जो जनगणना हुई…उसके मुताबिक हिंदू आबादी 9 फीसदी से भी कम रह गई है….

इस मुद्दे को समझने के लिए हम आपको इससे जुड़ा बैकग्राउंड भी बता देते हैं 1947 के बाद से बांग्लादेश में, इस्लामीकरण के नाम पर  करीब 30 लाख हिंदुओं की हत्याएं की गईं . 1971 में बांग्लादेश में आज़ादी की लड़ाई के दौरान हुए नरसंहार में पाकिस्तानी सेना और कट्टरपंथियों ने चुन – चुन कर हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया था. 1971 के दौरान पाकिस्तानी सेना और कट्टरपंथियों ने इस तरह का नरसंहार और अत्याचार किया.. जो अपने आप में एक उदाहरण है इसकी वजह से बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग भारत में शरण लेने के लिए आने लगे और इन लोगों में 60 फीसदी अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से थे हालत ये हो गई थी कि बांग्लादेश बनने के बाद जब वर्ष 1981 में बांग्लादेश की पहली जनगणना हुई…तो उस जनगणना में करीब 5 करोड़ हिंदू आबादी गायब थी… वर्ष 2013 और 2014 में इंटरनेशनल क्राइम Tribunal ने बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के नेताओं को 1971 में हिंदू अल्पसंख्यकों के नरसंहार का दोषी पाया और उन्हें सज़ा दी थी. भारत के बुद्धिजीवी…जो ख़ुद को सबसे बड़े मानवतावादी और धर्म निरपेक्षता यानी सेकुलरिज़्म के ठेकेदार बताते हैं…उन्हें बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू आबादी पर हो रहे अत्याचार कभी नहीं दिखे . क्योंकि उन्होंने धर्म और वोटबैंक का चश्मा पहना हुआ है.

भारत में करीब 40 हज़ार रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रह रहे हैं. ये लोग घुसपैठ करके बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते भारत में दाखिल हुए, और फिर देश के कई राज्यों में फैल गए. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में भी केन्द्र सरकार ने देश के उन इलाकों की जानकारी दी है, जहां रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं. ऐसा ही एक इलाक़ा है, हरियाणा का मेवात ज़िला. जहां बहुत सी जगहों पर रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं. लेकिन सवाल ये है कि इनका गुज़ारा यहां कैसे होता है? ये अपना और अपने बच्चों का पेट कैसे पालते हैं? इन्हें बिजली और पानी कहां से मिलता है? ये वो तमाम सवाल हैं, जो आपके भी मन में उठ रहे होंगे. इसीलिए हमने आज आपके लिए एक आंखें खोलने वाली Ground Report तैयार की है. जो आपके इन सभी सवालों का जवाब देगी.

हो सकता है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की मूल समस्या के बारे में आपको गहराई से जानकारी न हो. इसलिए हमने एक विशेष Lens बनाया है. जिससे आप इस मुद्दे को स्पष्ट रूप से देख पाएंगे और आपको इस पूरी समस्या की जड़ सिर्फ 1 मिनट 55 Seconds में समझ आ जाएगी. शरणार्थियों को देश में जगह दी जाए या नहीं.. ये सवाल भारत में हमेशा से उठते रहे हैं. आज रिसर्च करते हुए हमने वर्ष 1991 में प्रसारित हुए मशहूर हिंदी धारावाहिक चाणक्य के कुछ हिस्से देखे… और इस दौरान हमें एक ऐसा हिस्सा मिला.. जो अपने आप में शरणार्थियों की समस्या पर एक अच्छा संवाद है.. ये वीडियो Clip देखने के बाद आपके मन में तस्वीर कुछ और साफ हो जाएगी.

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