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हिंदू महिलाओं को उठा ले गए थे रोहिंग्या आतंकी: रिपोर्ट

DQ0B3H6UEAAkBGwलाखों रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमारसे भागकर बांग्लादेश, भारत समेत कई पड़ोसी देशों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है। हालांकि इनके साथ एक काला अध्याय भी जुड़ा है। दरअसल, इसी समुदाय के कुछ आतंकियों ने कुछ समय पहले हिंदुओं का नरसंहार किया था। ऐमनेस्टी इंटरनैशनल की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों ने हत्या करने, गांवों में आग लगाने, प्रताड़ित करने के साथ ही बड़ी संख्या में महिलाओं का रेप भी किया था। ऐमनेस्टी इंटरनैशनल की रिपोर्ट के मुताबिक जान बचाकर भागने वाली कई हिंदू महिलाओं ने बताया कि 25 अगस्त 2017 को सुबह के करीब 8 बजे रोहिंग्या आतंकियों के समूह (अराकान रोहिंग्या सॉल्वेशन आर्मी, ARSA) ने अह नॉक खा गांव में हिंदुओं के घरों पर हमला बोल दिया। कुछ आतंकी काले ड्रेस में थे और कुछ सामान्य कपड़ा पहने थे। आतंकियों ने उस समय गांव में मौजूद 69 हिंदू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को उठा लिया। कुछ घंटे बाद उन्होंने ज्यादातर पुरुषों की हत्या कर दी और महिलाओं को अपने साथ लेकर चले गए।

काले कपड़ों में थे आतंकी
22 साल की बीना बाला बताती हैं कि वह उन 8 महिलाओं में से एक थीं, जिन्हें आतंकी अगवा कर बांग्लादेश ले गए। उन्होंने बताया, ‘सुबह का समय था और मैं उस समय पूजा कर रही थी। वे हमारे घर में घुस आए। उनमें से कुछ काले कपड़ों में थे। मैंने उन्हें पहचान लिया था… वे हमारे गांव के ही थे।’ बीना बताती हैं कि उन लोगों ने हमारे मोबाइल फोन जब्त कर लिए और हमें बाहर एक जगह खड़ा कर दिया, जहां और भी हिंदुओं को खड़ा किया गया था। उन्होंने ऐमनेस्टी इंटरनैशनल को बताया, ‘उनके पास धारदार हथियार और लोहे की छड़ें थीं। उन्होंने हमारे हाथों को पीछे की तरफ बांध दिया और आंखों पर पट्टी बांध दी। मैंने उनसे पूछा कि वे क्या कर रहे हैं। उनमें से एक ने कहा कि तुम दूसरे धर्म के हो, तुम यहां नहीं रह सकते हो। उन्होंने हमें पीटा और आखिरकार हमे अपने गहने और पैसे उन्हें देने पड़े।’

भागने का मौका नहीं मिला
उसी दिन हिंदुओं के दूसरे गांव ये बॉक क्यार में 46 पुरुष, महिलाएं और बच्चे गायब हो गए। उनका कुछ पता नहीं चला। हमले के समय 24 साल की रीका धर भी घर पर ही थीं। उन्होंने ऐमनेस्टी को बताया, ‘हमें भागने का कोई मौका नहीं मिला। रोहिंग्या मुसलमानों ने हमारे गहने ले लिए…हमारी आंखों पर पट्टी बांध दी गई और हाथ भी बांध दिए गए।’ दूसरे गांववालों की तरह रीका भी हमलावरों को पहचान रही थीं।

पुरुषों को मारा, महिलाओं को जंगल में ले गए
हिंदुओं को आतंकी गांव से बाहर ले गए और सबसे पहले उनके आईडी कार्ड्स को जला दिया गया, जो उन्होंने पहले ही छीन लिए थे। आतंकियों ने हिंदू पुरुषों को महिलाओं और बच्चों से अलग कर दिया। इसके बाद महिलाओं को लेकर जंगल में चले गए। इस दौरान 53 हिंदुओं की हत्या की गई थी। इनमें 20 पुरुष, 10 महिलाएं और 23 बच्चे थे, जिनमें से 14 बच्चों की उम्र 8 साल से भी कम थी।

इस्लाम कबूलने की बात पर जिंदा बचे
केवल 16 लोगों (8 महिलाएं और उनके 8 बच्चों) की जान बच सकी क्योंकि ये इस्लाम स्वीकार करने को राजी हो गए थे और उसके बाद इन्हें रोहिंग्या आतंकियों के साथ शादी करना था। 20 साल की फर्मीला ने ऐमनेस्टी को बताया, ‘मुस्लिम लोग हाथों में तलवार लेकर आए। तलवारों पर खून लगा हुआ था। उन्होंने हमसे कहा कि हमारे पतियों को उन लोगों ने मार डाला।’

18 साल की राज कुमारी ने बताया, ‘उन्होंने पुरुषों को मार डाला। हमसे कहा गया था कि उनकी तरफ न देखें… हम झाड़ियों में छिप गए थे। मेरे चाचा, मेरे पिता, मेरे भाई सभी को उन लोगों ने मार डाला। पुरुषों को मारने के बाद उन्होंने कई महिलाओं को भी मार डाला।’

फर्मीला बताती हैं, ‘मैंने देखा कि कुछ लोग महिला के सिर और बाल को पकड़े हुए थे तभी दूसरे लोगों ने छुरे से उसका गला काट दिया।’ आशंका जताई जा रही है कि रोहिंग्या मुसलमानों के साथ आतंकी भी दूसरे देशों में शरण ले सकते हैं। रोहिंग्या आतंकियों ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में हिंदुओं का कत्लेआम कैसे किया था, ऐमनेस्टी इंटरनैशनल ने अपनी रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आतंकियों ने कम से कम 99 हिंदुओं का कत्ल किया था।

झूठे बयान भी दिलवाए गए
28 अगस्त को बांग्लादेश पहुंचने पर 8 हिंदू महिलाओं से जबरन फर्जी विडियो बयान दिलवाए गए। अपहरणकर्ताओं ने उनसे कहा कि अगर कोई पूछता है तो कहना है कि रखाइन के स्थानीय लोगों और सेना ने हम पर हमला किया था। बीना बाला बताती हैं, ‘उन्होंने कहा था कि कोई पूछता है तो यही कहना है वरना मार दी जाओगी।’ कुछ समय बाद ही ये विडियो फेसबुक पर पोस्ट किए गए। इसके बाद उत्तरी रखाइन प्रांत के हिंदू समुदाय के लोगों ने बांग्लादेश में अपने दोस्तों से महिलाओं को ढूंढने को कहा। हिंदू शरणार्थियों को अलग रखा गया और बांग्लादेश के सुरक्षाबलों ने उनकी सुरक्षा की। बाद में अक्टूबर में 16 महिलाओं को म्यांमार वापस भेज दिया गया।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘अराकान रोहिंग्या सॉल्वेशन आर्मी (एआरएसए) द्वारा हिंदू ग्रामीणों की हत्या से संबद्ध ऐमनेस्टी की रिपोर्ट से हम बेहद व्यथित हैं। इस रिपोर्ट ने राखाइन प्रांत में हुई हिंसा को लेकर विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर दिया है। जांच के द्वारा ठोस आधार पर सभी तथ्यों को निर्धारित कर म्यामांर हिंसा के दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो और पीड़ितों को न्याय मिले।’

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