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कुछ प्रावधानों से भारतीय किसान संघ भी है नाराज

modi-kisan-sangh-1488077940_835x547नई दिल्ली। भारतीय किसान संघ ने साफ कर दिया कि यदि किसानों को हितों की सुरक्षा के पुख्ता कानूनी प्रावधान नहीं कि ए गए तो वह आंदोलन का रास्ता भी अख्तियार कर सकती है। भारतीय किसान संघ के संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि हमारे लिए सारे विकल्प खुले हुए हैं और जल्द ही आगे की रणनीति का ऐलान किया जाएगा।भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी के अनुसार नए कानूनी प्रावधानों से किसानों को मंडियों में होने वाली प्रताड़ना से मुक्ति तो मिलेगी, लेकिन उन्हें लाभकारी मूल्य मिलने और धोखाधड़ी से बचाने की कोई गारंटी नहीं देता है। उनके अनुसार किसान संघ हमेशा से कृषि उत्पादों के लिए खुले बाजार और त्रिस्तरीय खरीद प्रणाली के पक्षधर रहा है। बद्रीनारायण चौधरी ने बयान जारी कर सरकार से कृषि उपज की कहीं भी होने खरीद को कम से कम समर्थन मूल्य पर खरीदने की कानूनी गारंटी देने और इसके लिए अलग से कानून लाने की मांग की।

भारतीय किसान संघ बिना पंजीकरण के व्यापारियों को कृषि उपज खरीद की छूट देने के प्रावधान से भी नाराज है। उसका कहना है कि सिर्फ पैन कार्ड के आधार पर व्यापारियों को खरीदने की अनुमति किसानों को ले डूबेगा। किसान संघ का कहना है कि व्यापारियों का केंद्र और राज्यों में बैंक सिक्यूरिटी के साथ पंजीकरण होना चाहिए ताकि किसानों के साथ धोखाधड़ी की स्थिति में उनके हितों की रक्षा की सके। ऐसे पंजीकृत व्यापारियों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध हो। इसके साथ ही किसान संघ ने खेती से संबंधित सभी विवादों के निपटारे के लिए स्वतंत्र कृषि न्यायाधिकरण की स्थापना की मांग की है।भारतीय किसान संघ ने आवश्यक वस्तु अधिनियम हटाने जाने का समर्थन किया है अब केवल अकाल, युद्ध जैसे आपात स्थिति में यह कानून लागू हो सकेगा। लेकिन आपात स्थिति में भी प्रसंस्करण और निर्यातकों को इस कानून से दी गई छूट को किसान संघ ने ‘समझ से परे’ बताया है। उसके अनुसार इसे तर्कसंगत बनाने की जरूरत है, नहीं तो उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ेगी।

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