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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ; सुरेश (भैय्याजी) जोशी सरकार्यवाह

rssनागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने स्थानीय भाषाओं को बढावा देने का समर्थन करते हुए शनिवार को कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए उचित नीति बनानी चाहिए कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा या किसी अन्य भारतीय भाषा में ही होनी चाहिए।
पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक में सत्तारूढ भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण और इन्हें बढावा देने की जरूरत पर एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें कहा गया कि प्रौद्योगिकी और चिकित्सा सहित सभी संकायों की उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यर्थियों के पास स्थानीय भाषाओं का विकल्प होना चाहिए।नीट और यूपीएससी की तर्ज पर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हो भारतीय भाषाओं का विकल्प
शिक्षण एवं अध्ययन सामग्री का माध्यम भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध होनी चाहिए। आरएसएस ने नीट और यूपीएससी परीक्षाओं के अब भारतीय भाषाओं में भी शुरू होने का स्वागत किया लेकिन कहा कि सभी अन्य प्रवेश परीक्षाओं और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए भी यह विकल्प उपलब्ध होना चाहिए।अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित प्रस्ताव में संघ ने कहा कि देशभर में प्राथमिक शिक्षा केवल मातृभाषा या किसी अन्य भारतीय भाषा में होनी चाहिए। इसके लिए, अभिभावकों को भी अपना मन बनाना चाहिए और सरकार को इस संबंध में उचित नीतियां तथा जरूरी प्रावधान करने चाहिए।

सरकारी और न्यायिक कार्यों में स्थानीय भाषाओं को तरजीह दी जाए
आरएसएस ने कहा कि सभी सरकारी और न्यायिक कार्यों में स्थानीय भाषाओं को तरजीह दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी को तरजीह देने के बजाय सभी तरह के कार्यों, पदोन्नति और नियुक्तियों में स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। स्थानीय भाषाओं के प्रयोग में गिरावट पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कई भाषाएं और बोलियां विलुप्तप्राय हैं जबकि कई अन्य संकटग्रस्त हैं।संघ ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारों को सभी भाषाओं, बोलियों तथा भारत की लिपियों के संरक्षण और बढावे के लिए असरदार कदम उठाने चाहिए। संघ ने अपने कार्यकर्ताओं और समाज से अपनी मातृभाषा के संरक्षण तथा इसे बढ़ावा देने के प्रयास करने का आह्वान किया। हालांकि आरएसएस ने कहा कि वह विविध ज्ञान हासिल करने के लिए विश्व की विभिन्न भाषाएं सीखने का समर्थक है।

सुरेश (भैय्याजी) जोशी  सरकार्यवाह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर से सुरेश (भैय्याजी) जोशी को सरकार्यवाह (General Secretary) बनाया है. भैय्याजी जोशी का यह चौथा कार्यकाल होगा. इससे पहले सह सरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह बनाए जाने की अटकलें थीं, लेकिन आज नागपुर स्थित मुख्यालय में आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में भैय्याजी जोशी को चौथी बार सरकार्यवाह बनाने की घोषणा की गई. संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद भैय्याजी जोशी नंबर दो की हैसियत रखते हैं.नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय बैठक में सुरेश (भैय्याजी) जोशी को आगामी तीन वर्ष (2018-2021) के लिए सरकार्यवाह चुना गया है. बैठक में सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने अपने कार्यकाल की समाप्ति की घोषणा की और उत्तर क्षेत्र संघचालक बजरंग लाल गुप्त को सरकार्यवाह के निर्वाचन की प्रक्रिया संपन्न करने का आग्रह किया.इसके बाद बजरंग लाल ने मध्य क्षेत्र संघचालक अशोक सोहनी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया. उन्होंने उपस्थिति प्रतिनिधियों से सरकार्यवाह के लिए नाम आमंत्रित किए. पश्चिमी क्षेत्र संघचालक जयंतीभाई भडेसिया ने सरकार्यवाह पद के लिए भैय्याजी का नाम प्रस्तावित किया. इसका समर्थन पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र संघचालक वीरेन्द्र पराक्रमादित्य, दक्षिण क्षेत्र कार्यवाह राजेन्द्रन, असम क्षेत्र कार्यवाह डॉ उमेश चक्रवर्ती और कोंकण प्रांत सह कार्यवाह विठल कांवले ने किया.नए सरकार्यवाह के लिए अन्य नाम का प्रस्ताव न आने के कारण निर्वाचन अधिकारी ने सुरेशजी जोशी को आगामी तीन वर्ष (2018-2021) के लिए सरकार्यवाह फिर से घोषित कर दिया. इस बैठक में संघ और इससे जुड़े संगठनों के करीब 1500 प्रतिनिधि शामिल रहे. इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, बीजेपी के संगठन मंत्री राम लाल और बीजेपी महासचिव राम माधव भी शामिल थे.

देश भर में अपनी 60,000 से ज्यादा शाखाओं के जरिए देश के करीब 95 फीसदी भूगोल में मौजूदगी रखने वाले संघ के भीतर सबसे बड़ा पद सर संघचालक का होता जो फिलहाल मोहन भागवत के पास है. संघ में सरसंघचालक की भूमिका एक गाइडिंग फोर्स और प्रेरणा के केंद्र की ही होती है. दुनिया का सबसे बड़ा गैरसरकारी संगठन होने का दावा करने वाले संघ को चलाने और उसकी नीतियों को तय करने से लेकर अमलीजामा पहनाने की रणनीति तय करने में नंबर टू की पोजिशन वाले सरकार्यवाह का पद बेहद अहम होता है. सरकार्यवाह की मदद के लिए चार सह सरकार्यवाह होते हैं.

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