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दत्तात्रेय होसबोले बने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह

Dattatreya-Hosabale1बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की हुई बैठक में दत्तात्रेय होसबोले को नई जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया। उन्हें भैया जी जोशी की जगह पर संघ का सरकार्यवाह बनाया गया है। इससे पहले 2009 से लगातार वह संघ के सह सरकार्यवाह का दायित्व निर्वहन कर रहे थे। जोशी इस पद पर पिछले करीब 12 साल से थे. होसबले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक नया सरकार्यवाह बनाया गया. बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में बड़े बदलाव को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थी. चुनाव को लेकर संघ के इतिहास में आज तक कभी भी वोटिंग की नौबत नहीं आई है. हर बार सरकार्यवाह का चुनाव निर्विरोध ही हुआ है. इस बार भी ऐसा ही हुआ. ऊं की ध्वनि के साथ दत्तात्रेय होसबले के नाम पर संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने मुहर लगा दी.बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से इस बार अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक काफी छोटी रखी गई है. इस बार की बैठक में देश भर से सिर्फ 500 से लेकर 550 वरिष्ठ स्वयंसेवकों को ही इसमें आमंत्रित किया गया . वर्तमान में मोहन भागवत सरसंघचालक हैं।आमतौर पर प्रतिनिधी सभा की बैठक में तीन हजार से ज्यादा वरिष्ठ पदाधिकारी भाग लेते है. आरएसएस के हर प्रांत से भी सिर्फ सात-आठ पदाधिकारियों को ही इस बार आमंत्रित किया गया है.

कौन हैं दत्तात्रेय होसबले?
 dattatreya_hosabale_mar1-sixteen_nineकर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के सोरबा तालुक के एक छोटे से गाँव होसाबले से हैं। उनका जन्म 1 दिसंबर 1954 को हुआ। स्कूली शिक्षा उनके जन्म स्थान होसाबले और सागर (तालुक मुख्यालय) में हुई। अपनी कॉलेज की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए वे बेंगलुरु गए और प्रसिद्ध नेशनल कॉलेज में दाखिला लिया। बाद में, होसबाले ने साहित्य को अपना लिया और बेंगलुरु विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एमए किया उन्होंने 1968 में आरएसएस और फिर 1972 में छात्र संगठन एबीवीपी ज्वाइन किया। वे 1978 में एबीवीपी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। वह 15 साल तक एबीवीपी के महासचिव रहे थे और उनका मुख्यालय मुंबई था। वह एक कन्नड़ मासिक असीमा के संस्थापक संपादक थे। 2004 में वह आरएसएस के बौद्धिक विंग के सेकेंड इन कमांड साह-बौधिक प्रमुख के रूप में रह चुके हैं। वह कन्नड़, हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और संस्कृत में निपुण हैं। होसबले संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में हिंदू स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक गतिविधियों के संरक्षक भी थे। फुटबॉल विभिन्न सभ्यताओं, महाद्वीपों और सीमाओं से परे जाकर प्रशंसकों, शौकीनों, अनुयायियों और निष्णातों को एकसूत्र में जोड़ने वाला खेल रहा है। वर्षों से प्राचीन भारत और प्राचीन ग्रीस में शासक एवं सामान्य वर्ग का बड़ा भाग इस पसंदीदा खेल का आनंद लेता रहा है। इस खेल में गेंद को पैर से बल के साथ उछाला जाता है। उनका कहना है कि यह युगों से चला आ रहा है – प्राचीन भारत में, जैसा कि प्राचीन ग्रीस में गेंद को पैर से मारने का खेल था, एक विशाल लोकप्रिय खेल था जिसे बहुत सारे लोग पसंद करते थे।

प्रतिनिधी सभा की बैठक में कई पदों के लिए निर्णय लिए गए और नई कार्यकारिणी गठित की गई। आपको बताते है कि नई कार्यकारिणी के सदस्य कौन-कौन हैं। 

सह सरकार्यवाह –

डॉ. मनमोहन वैद्य

कृष्ण गोपाल

सी. आर. मुकुंद

अरुण कुमार

राम दत्त चक्रधर

शारीरिक प्रमुख –

सुनील कुलकर्णी

सह शारीरिक प्रमुख –

जगदीश प्रसाद

बौद्धिक प्रमुख –

स्वांथ रंजन

सह बौद्धिक प्रमुख

सुनील भाई मेहता

सेवा प्रमुख 

पराग अभ्यंकर

सह सेवा प्रमुख-

राजकुमार मथाले

संपर्क प्रमुख-

रामलाल

सह संपर्क प्रमुख-

रमेश पप्पा

सुनील देशपांडे

प्रचार प्रमुख –

सुनील अम्बेकर

सह प्रचार प्रमुख 

नरेंद्र ठाकुर

आलोक कुमार

आरएसएस को जानने में समाज की उत्सुकता बढ़ी है : मनमोहन वैद्य

RSSराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह-सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने शुक्रवार को कहा कि संघ को जानने में समाज की उत्सुकता बढ़ी है। उन्होंने संघ में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की यहां दो दिवसीय वार्षिक बैठक शुरू होने के अवसर पर यह बात कही। वैद्य ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान सेवा और राम मंदिर अभियान ने भारतीय समाज की जीवटता और सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित किया है।वैद्य ने कहा, ‘‘कोरोना काल में और श्रीराम मंदिर के लिए जनसंपर्क अभियान में ध्यान में आया कि संघ को जानने की समाज में उत्सुकता बढ़ी है। ’’ उन्होंने यहां एबीपीएस से अलग संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि संघ से जुड़ना चाह रहे लोगों की संख्या बढ़ रही है। बैठक की शुरूआत होने के अवसर पर आरएसएस सर संघचालक मोहन भागवत और इसके मौजूदा सर कार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी भी उपस्थित थे। बैठक में करीब 450 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इसमें शनिवार को सरकार्यवाह का चुनाव भी होना है।

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