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रूस पर कंगाली का खतरा.. करेंसी 30 प्रतिशत नीचे गिरी

china russia putinयूक्रेन पर हमले के बाद रूस दुनियाभर के तमाम देशों के निशाने पर है. भले ही बड़े देशों ने रूस के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं किया हो, लेकिन उनकी तरफ से रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. जिसका सीधा असर रूस की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. अब बताया गया है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का फोकस इकॉनमी पर है. रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों का बड़ा असर. रूस की करेंसी 30 प्रतिशत नीचे गिरी. ‘अगर युद्ध 10 दिन से ज्यादा चला तो रूस कंगाली के कगार पर पहुंच जाएगा। पुतिन को समझौता वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ेगा। रूस को यूक्रेन पर जल्द कब्जे की गलतफहमी थी।’रूस को फिलहाल एक साथ कई मोर्चे पर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक और युद्ध पर हर दिन 1.12 लाख करोड़ रुपए खर्च हो रहा है, वहीं रूस की करेंसी रूबल इस महीने 10% तक कमजोर हो चुकी है। पश्चिमी देशों ने रूस के साथ डॉलर-यूरो-पाउंड में कारोबार बैन कर दिया है। ऐसे में रूबल अभी और गिर सकता है।युद्ध शुरू होने के तीन हफ्ते पहले से ही रूसी कंपनियों को नुकसान होना शुरू हो चुका था। वहां का शेयर बाजार 10 फरवरी के बाद 40% तक गिर चुका है। इससे रूस की लिस्टेट कंपनियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। रूस को यूक्रेन पर हमले के सिर्फ 4 दिन में 5 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़े हैं।रूस की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर कंपनी DNS के चीफ एग्जीक्यूटिव दमित्री एलेक्सयेव कहते हैं- ‘ये युद्ध हमें पीछे धकेलेगा। समझ नहीं आया कि युद्ध की जरूरत क्या थी?’ इसी तरह उड़ानों पर बैन लगाए जाने से प्रभावित होने जा रही दूसरी सबसे बड़ी रूसी एयरलाइंस एस7 ने कहा कि कंपनी कंगाली की ओर बढ़ सकती है।

यूक्रेन को रूसी हमले से निपटने के लिए यूरोपीय देशों में सरकार के साथ साथ आम लोग भी आगे बढ़कर मदद कर रहे हैं। यूक्रेन के बैंक ‘नेशनल बैंक ऑफ यूक्रेन’  ने मदद के लिए 4 दिन पहले एक स्पेशल अकाउंट खोला था। NBU के मल्टीकरंसी अकाउंट में महज चार दिनों में 1 अरब रुपए से ज्यादा रकम जमा हो गई है।अब सेना इससे गोला बारूद, संचार, चौकसी के लिए जरूरी सामान और वर्दी खरीदेगी। यूक्रेन के लिए जुटाई जा रही मदद, उसके एम्बेसी के जरिए यूक्रेन सेना तक पहुंचाई जा रही है। चेक रिपब्लिक में दो जगहों पर ये सामग्री एकत्रित की जा रही है। जहां लोग जरूरी चीजें दे रहे हैं। काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स, ऑफिस ऑफ डिफेंस ऑफ यूक्रेन इन प्राग भी इसमें मदद कर रहा है। चेक गणराज्य हथियार भी दे रहा है।

 इकॉनमी को लेकर पुतिन की बैठक

क्रेमलिन के प्रवक्ता की तरफ से बताया गया है कि, यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर जो भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनसे रूस बाहर निकल सकता है. जबकि इसी बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अधिकारियों के साथ अर्थव्यवस्था को लेकर एक बैठक की है. जिसमें इन तमाम प्रतिबंधों से पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा हुई. फिलहाल रूस ने यूक्रेन पर हमला लगातार जारी रखा है. पिछले पांच दिन से यूक्रेन और रूसी सेना एक दूसरे के साथ जंग लड़ रही है. इसी बीच अब बातचीत का दौर शुरू होने की चर्चा भी चल रही है. कहा जा रहा है कि जल्द दोनों देशों के डेलीगेशन आपस में बातचीत कर सकते हैं, जिसके बाद सीजफायर का ऐलान हो सकता है. रूस को जहां प्रतिबंधों से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, वहीं यूक्रेन को रूस के इस हमले से काफी ज्यादा नुकसान हुआ है.

 रूस पर लगाए गए कई प्रतिबंध
यूक्रेन पर हमले के बाद दुनियाभर के तमाम देशों ने रूस को ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी थी. लेकिन रूस ने खुलकर कहा कि, इस मामले में किसी भी देश का हस्तक्षेप वो बर्दाश्त नहीं करेगा. इसके बाद अमेरिका ने बड़े रूसी बैंकों पर प्रतिबंध लगाया. साथ ही ब्रिटेन ने भी कई रूसी बैंकों और लोगों पर प्रतिबंध का ऐलान किया. इसके अलावा रूस के सरकारी कर्ज पर भी कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं. यूरोपीय संघ, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देश भी लगातार रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की तैयारी कर रहे हैं. जिसके बाद रूस की इकॉनमी पर इसका सीधा असर दिखने लगा है. इसीलिए अब पुतिन भी इसे लेकर सोचने को मजबूर हो रहे हैं.
 इन बंदिशों का मकसद?
इन प्रतिबंधों का मुख्‍य मकसद किसी देश को अलग-थलग करना होता है। इनमें भी अंतरराष्‍ट्रीय और राजनीतिक हित साधे जाते हैं। इनके नियम-कायदों का पलड़ा काफी कुछ अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर झुका हुआ है। मुख्‍य रूप से इसमें व्‍यापार को निशाना बनाया जाता है। इस तरह के आर्थिक प्रतिबंध बहुआयामी होते हैं। इनमें यात्रा और वित्तीय प्रतिबंध भी शामिल होते हैं। वित्तीय प्रतिबंधों के तहत संपत्तियों को फ्रीज किया जाता है। वित्तीय बाजारों और सेवाओं पर अलग-अलग तरह की बंदिशें लगाई जाती हैं।
क्या आर्थिक प्रतिबंध प्रभावी होते हैं?
कई देशों पर अमेरिका और उनके सहयोगी देश प्रतिबंध लगा चुके हैं। इनमें रूस के अलावा ईरान, वेनेजुएला और उत्‍तर कोरिया शामिल हैं। जिन लोगों और प्रतिष्ठानों पर बंदिशों को लगाया जाता है, उन पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि, आर्थिक प्रतिबंधों के असर के बारे में कुछ भी ठोस तरह से नहीं कहा जा सकता है। मसलन, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान, वेनेजुएला और उत्‍तर कोरिया एक-दूसरे के करीब आ गए।’यूनिवर्सिटी ऑफ मेम्फिस’ में प्रतिबंध विशेषज्ञ डुरसुन पेकसेन के अनुसार, आर्थिक प्रतिबंधों से करीब 40 फीसदी मामलों में लक्षित देशों के व्यवहार में अर्थपूर्ण बदलाव आता है। यह और बात है कि अमेरिकी सरकार की एक हालिया स्‍टडी कहती है कि यह पता करना असंभव है कि इन प्रतिबंधों से कितना प्रभाव पड़ता है। मसलन, जिस देश या व्यक्ति पर सैंक्‍शन लगाए जाते हैं, वह कई कारण से अपने व्यवहार में बदलाव करने का फैसला कर सकता है। इनमें कुछ बदलावों का प्रतिबंधों से कोई लेना देना नहीं होता।
रूस पर कौन-कौन से प्रतिबंध लगे हैं?
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने रूस पर एकतरफा और सामूहिक रूप से कई आर्थिक और राजनयिक प्रतिबंधों को लगाया है। पश्चिमी देश रूस के सेंट्रल बैंक के एसेट को फ्रीज करने जा रहे हैं। रूस का फॉरेन एक्‍सचेंज रिजर्व 630 अरब डॉलर का है। अमेरिका और ब्रिटेन ने रूस के दो सबसे बड़े बैंकों सबरबैंक और वीटीबी बैंक पर एकतरफा बंदिशें लगाई हैं। उन्होंने रूस के एलीट क्‍लास पर ट्रैवल सैंक्‍शन लगाए हैं। उनकी संपत्तियां फ्रीज कर दी हैं। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी ऐसा किया है।जर्मनी की बात करें तो उसने भी नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन परियोजना को रोकने का संकेत दिया है। पोलैंड, चेक गणराज्य, बुल्गारिया और एस्तोनिया ने रूसी विमानन कंपनियों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है।रूस की ओर से वीटो का इस्तेमाल किए जाने से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) कोई प्रतिबंध लागू नहीं कर पाएगा। लेकिन, यूरोपीय संघ ने रूस के कई लोगों और प्रतिष्ठानों पर यात्रा और वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए हैं।यूरोपीय यूनियन (EU) के सैंक्‍शंस 555 रूसी व्यक्तियों और 52 संस्थाओं पर लागू हैं। इनमें रूसी स्टेट ड्यूमा के वो 351 सदस्य भी शामिल हैं, जिन्होंने यूक्रेन के खिलाफ हमले का समर्थन किया है। स्विफ्ट (SWIFT) बैंकिंग नेटवर्क से रूसी बैंकों को बाहर करने की तैयारी है। अमेरिका और ब्रिटेन के साथ मिलकर ईयू ने इन्‍हें अलग करने पर सहमति जताई है। यही नहीं, रूस पर कई राजनयिक प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।
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