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क्या NDA का अब भी वास्तव में कोई वजूद है ?

nda vs bjpमुंबई: कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA से शिरोमणि अकाली दल के निकलने के बाद शिवसेना ने  आश्चर्य जताया कि क्या NDA का अब भी वास्तव में कोई वजूद है? उसने साथ ही सवाल किया कि अब इसमें और कौन बाकी हैं. शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि यह अजीब है कि NDA के ‘अंतिम स्तंभ’ अकाली दल को गठबंधन से हटने से नहीं रोका गया.

संपादकीय में कहा गया है, ‘जब बादल (NDA से) हटे तो उन्हें रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई. इससे पहले शिवसेना भी NDA से हटी. इन दोनों हटने के बाद NDA में अब बचा क्या है? जो अब भी गठबंधन में हैं उनका क्या हिंदुत्व से क्या कोई लेना देना है?’ संपादकीय में कहा गया है, ‘पंजाब और महाराष्ट्र वीरता का प्रतिनिधित्व करते हैं और शिअद व शिवसेना इस वीरता एवं बहादुरी का चेहरा हैं.’ सामना ने लिखा है, ‘अब जब कुछ ने इस गठबंधन को ‘राम-राम’ (अलविदा) कह दिया है और इसलिए NDA में अब राम नहीं बचे हैं जिसने अपने दो शेर (शिवसेना और शिअद) खो दिए हैं.’

संसद में कृषि विधेयकों के पारित किए जाने के विरोध में अकाली दल ने शनिवार को NDA से नाता तोड़ लिया. शिवसेना और तेलुगु देशम पार्टी के बाद हाल के समय में NDA से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल तीसरा बड़ा घटक है. महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के पद को लेकर विवाद के बाद शिवसेना ने पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद NDA को अलविदा कह दिया था.संपादकीय में कहा गया है, ‘पहले शिवसेना को NDA से अलग होना पड़ा. अब अकाली दल ने छोड़ा. दो मुख्य स्तंभों के बाहर निकलने के बाद क्या वास्तव में NDA अब भी बचा हुआ है?’संपादकीय के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के खिलाफ मजबूत गठबंधन बनाने के लिए NDA का गठन किया गया था. पिछले कुछ साल में इस गठबंधन ने बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई अन्य दल भी गठबंधन छोड़ चुके हैं. शिवसेना ने कहा कि महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार अच्छा काम कर रही है और मौजूदा गठबंधन सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी.

शिवसेना नेता संजय राउत और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने रविवार (28 सितंबर) को मुंबई के एक होटल में एक दूसरे से मुलाकात की. दोनों के मिलने के बाद लगता है कि महाराष्ट्र में महागठबंधन (MAV) सरकार के बीच कलह की स्थिति बन चुकी है. संजय राउत और देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में तमाम तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है. दोनों दलों के नेता पिछले साल हुए चुनावों के बाद पहली बार एक दूसरे से मिले हैं. होटल में दोनों के बीत 2 घंटे की मीटिंग चली.

सूत्रों के अनुसार, राउत-फडणवीस मुलाकात को लेकर कांग्रेस और एनसीपी के बीच नाराजगी है. इन दोनों नेताओं की मुलाकात के अलावा रविवार को ही महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोराट, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच भी मुंबई में एक मीटिंग हुई. राउत और फडणवीस की मीटिंग से नाराज कांग्रेस और एनसीपी के बड़े नेताओं ने सीएम उद्धव ठाकरे के आधिकारिक आवास वर्षा में करीब 2 घंटे तक एक बैठक की. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि दोनों नेताओं के बीच यह बैठक किस मुद्दे को लेकर हुई और उनके बीच क्या-क्या बातचीत हुई. इन मुलाकातों से महाराष्ट्र सत्ता के गलियारों में सियासी अटकलों का दौर तेज चल पड़ा है. गौरतलब है कि पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद साझा करने के मुद्दे को लेकर शिवसेना ने भाजपा से अपना नाता तोड़ लिया था. इसके बाद उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने राज्य में गठबंधन सरकार बनाने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया था.  सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने इस मुलाकात से यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि तीनों दलों के नेताओं को किसी भी ऐसी कार्रवाई में खुद को शामिल नहीं करना चाहिए, जो अघाड़ी गठबंधन को प्रभावित करे या महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठाए. थोराट ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस कृषि बिल का विरोध कर रही है लिहाजा यह बिल महाराष्ट्र में लागू नहीं होना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन सहयोगी के रूप में, शिवसेना को इस मुद्दे पर पार्टी का खुलकर साथ देना चाहिए. राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने कहा, ‘शिवसेना से हाथ मिलाने या (राज्य में) सरकार गिराने का हमारा कोई इरादा नहीं है. जब यह खुद ब खुद गिरेगी, तब हम देखेंगे.” उन्होंने  यह भी कहा कि यह मीटिंग शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के एक इंटरव्यू से संबंधित थी.

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