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सकट चौथ 2018: पूजा का शुभ मुहूर्त

ganeshaआज संकष्टी चतुर्थी है। गणेश चतुर्थी के दिन सकट चौथ का व्रत मनाने की परंपरा है। हिंदू पंचाग के अनुसार ये संकष्टी हर माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन आती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में महिलाएं इस पर्व को पूरे रीति-रिवाज के साथ मना रही हैं। सकट चौथ व्रत संतान की लंबी आयु हेतु किया जाता है। कृष्ण की सलाह पर धर्मराज युधिष्ठिर ने इस व्रत को किया था।

शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 22 मिनट के बाद शुरु होगा और चांद देखने के बाद ही व्रत खोला जाएगा।

शाम के समय व्रत करने वाले लोग अवश्य ही संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें। इस पूजा को शुभ मुहूर्त में करें में करने से लाभ प्राप्त होता है। भगवान गणेश का पूजन करते समय पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर अपना मुख रखना चाहिए। पूजा में गुड़, तिल, गन्ने और मूली का उपयोग करना चाहिए। इस उत्सव को वक्रतुण्डी चतुर्थी, माघी चौथ अथवा तिलकुटा चौथ भी कहते हैं।

पढ़िए व्रत कथा

कथा के अनुसार, सतयुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया पर आंवा पका ही नहीं, बर्तन कच्चे रह गए। बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक से पूछा तो उसने कहा कि बच्चे की बलि से ही तुम्हारा काम बनेगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र को पकड़ कर सकट चौथ के दिन आंवा में डाल दिया।

लेकिन बालक की माता ने उस दिन गणोश जी की पूजा की थी। बहुत तलाशने पर जब पुत्र नहीं मिला तो गणोश जी से प्रार्थना की। सबेरे कुम्हार ने देखा कि आंवा पक गया, लेकिन बालक जीवित और सुरक्षित था। डर कर उसने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार किया। राजा ने बालक की माता से इस चमत्कार का रहस्य पूछा तो उसने गणोश पूजा के विषय में बताया। तब राजा ने सकट चौथ की महिमा स्वीकार की तथा पूरे नगर में गणोश पूजा करने का आदेश दिया। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट हारिणी माना जाता है।

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