Pages Navigation Menu

Breaking News

लव जेहाद: उत्तर प्रदेश में 10 साल की सजा का प्रावधान

पाकिस्तान संसद ने माना, हिंदुओं का कराया जा रहा जबरन धर्मातरण

जम्‍मू-कश्‍मीर में 25 हजार करोड़ का भूमि घोटाला

दिल्ली में 24% आबादी कोरोना की चपेट में….सीरो सर्वे

coronavirus_1_5710711_835x547-mनई दिल्‍ली: दिल्ली में हुए सीरो सर्वे के मुताबिक 24% आबादी के कोरोना से संक्रमित होने के संकेत मिले हैं. सीरो सर्वे में ब्लड सैंपल के जरिए यह देखा जाता है कि वास्तव में लोगों का कौन सा खंड या अंश संक्रमित हो गया है. क्या आम जनता में कोरोना वायरस से आने वाली एंटीबॉडी मौजूद है? इससे यह पता लगाया जाता है कि ऐसे लोग जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, क्‍या उनमें भी कोरोना वायरस ठीक हो चुका है और उनके शरीर में एंटीबॉडी बनी है?

इस लिहाज से देखें तो सीरो सर्वे के नतीजे बताते हैं कि राजधानी में किस हद तक कोरोना फैल चुका है. अब तक दिल्‍ली में तकरीबन 24 फीसद आबादी कोरोना के संक्रमण के चपेट में आई. मतलब उनमें कोरोना एंटीबॉडीज मिली हैं. ज्‍यादातर लोगों में लक्षण नहीं मिले. यानी इनके शरीर में कोरोना से लड़ने की क्षमता विकसित हो गई. इसका कारण ये है कि 24 प्रतिशत आबादी के कोरोना के संपर्क में आने के बावजूद उस स्‍तर पर ना मौतें हुईं और ना ही सामुदायिक संक्रमण हुआ. यानी सर्वे के नतीजे बताते हैं कि ये लोग कोरोना से सुरक्षित हुए और कोरोना का वैसा फैलाव भी नहीं हुआ, जितनी आशंका व्‍यक्‍त की जा रही थी.इसका आशय ये भी है कि इन 24 फीसद लोगों में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज तैयार हो गई हैं और ये लोग इस महामारी से पूरी तरह सुरक्षित हैं. शरीर में कोरोना एंटीबॉडीज का मतलब ये भी हुआ कि भविष्‍य में भी कोरोना इन पर प्रभाव नहीं डाल पाएगा.

सीरो सर्वे का मकसद ये जानने के लिए किया गया था कि कितने लोगों का शरीर कोरोना से लड़ने के लिए तैयार हो चुका है. यानी कितने लोगों में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनी हैं या नहीं. इसके लिए सर्वे में एंटीबॉडीज का रैपिड टेस्‍ट किया गया.  इस सर्वे के तहत दिल्ली के 11 जिलों में 27 जून से 10 जुलाई तक किया गया सर्वे. 21387 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए. 10 शहरों में सर्वे हुआ है. मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, सूरत, इंदौर, कोलकाता, ठाणे, जयपुर, चेन्नई और दिल्‍ली में ये सर्वे हुआ.

लॉकडाउन, नियंत्रण एवं निगरानी के उपाय
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली के सीरो-प्रीवलेंस अध्ययन में पाया गया कि शहर के 23.48 प्रतिशत लोग कोविड-19 से प्रभावित हुए हैं. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “सीरो-प्रीवलेंस अध्ययन के परिणाम दिखाते हैं कि औसतन, पूरी दिल्ली में आईजीजी एंटीबॉडी की मौजूदगी 23.48 प्रतिशत है. यह अध्ययन यह भी दिखाता है कि कई संक्रमित लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं थे.” मंत्रालय ने कहा, “इसका अर्थ है कि वैश्विक महामारी के करीब छह माह के प्रसार के दौरान, दिल्ली में केवल 23.48 प्रतिशत लोग ही प्रभावित हुए जबकि शहर में घनी आबादी वाले कई इलाके हैं.”

मंत्रालय ने इसका श्रेय संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन, नियंत्रण एवं निगरानी के उपाय, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने समेत सरकार द्वारा किए गए अन्य प्रयासों तथा कोविड के संदर्भ में नागरिकों के उचित व्यवहार को दिया. हालांकि, इसने कहा कि अब भी आबादी का बड़ा हिस्सा संवेदनशील बना हुआ है और इसलिए नियंत्रण के कदम समान कठोरता से जारी रखने होंगे.

मंत्रालय ने कहा कि शारीरिक दूरी, फेस मास्क या कवर का इस्तेमाल, हाथों की स्वच्छता, खांसी करने की तमीज और भीड़-भाड़ वाली जगह से बचने जैसे कदमों का सख्ती से पालन करना होगा.दिल्ली के सभी 11 जिलों के लिए सर्वेक्षण टीमें गठित की गई थीं. चयनित व्यक्तियों से उनकी लिखित सहमति लेने के बाद रक्त के नमूने लिए गए और उनके सीरम में आईजीजी एंटीबॉडी तथा संक्रमण की जांच की गई. इसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा स्वीकृत कोविड कवच एलिसा का इस्तेमाल किया गया.

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *