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2019; भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ेगी शिवसेना

shiv senaनई दिल्ली। भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने 2019 में होने वाला लोकसभा चुनाव एनडीए गठबंधन से अलग हो अकेले लड़ने का फैसला किया है।शिवसेना ने यह फैसला मुंबई में आयोजित पार्टी कार्यकारिणी में लिया। सूत्रों के अनुसार बैठक में इस संबंध में संजय राउत ने प्रस्ताव रखा जिसका पार्टी ने समर्थन किया। शिवसेना की कार्यकारिणी की बैठक में  उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी हिंदुत्व की रक्षा के लिए हर राज्य में चुनाव लड़ेगी।उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी पर जोरदार हमले करते हुए कहा कि वह सिर्फ विदेश घूमते रहते हैं। उद्धव ने सवाल किया कि मोदी इजरायली PM को अहमदाबाद की जगह श्रीनगर के लाल चौक क्यों नहीं ले गए। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सबसे लंबे साय तक गठबंधन पार्टनर रहे भाजपा और शिवसेना के रिश्ते खराब होते गए। बृहन्न मुंबई के मेयर पद को लेकर दोनों दलों के संबंधों में इतनी कटुता आ गई कि गठबंधन टूटने की नौबत आ गई थी। बता दें कि शिवसेना महाराष्ट्र और केंद्र में बीजेपी की अहम सहयोगी है। महाराष्ट्र में दोनों दलों की मिलीजुली सरकार है।

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना की दोस्ती टूट गई है. दरअसल शिवसेना ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग होने का फैसला कर लिया है. आज शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ये ऐलान किया गया. शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि शिवसेना 2019 में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अकेले उतरेगी और बीजेपी गठबंधन के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी. इस बैठक में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को नेता पद के लिए चुना गया है.

महाराष्ट्र विधानसभा में सीटों की स्थिति

अगर महाराष्ट्र विधानसभा में सीटों की बात करें, तो फिलहाल राज्य में भाजपा और शिवसेना गठबंधन साथ सरकार चला रही है और भाजपा के देवेंद्र फडणवीस यहां मुख्यमंत्री हैं. महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं. फिलहाल बीजेपी के पास 122 सीटें, शिवसेना के पास 63, कांग्रेस के पास 42 और एनसीपी के पास 41 सीटें हैं. राज्य में सरकार बनाने के लिए 145 सीटों का आंकड़ा होना जरूरी है.

एक बार और अलग हो चुकी है बीजेपी-शिवसेना

बता दें कि साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भी सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना और भाजपा के बीच विवाद हो गया था और तब दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई थीं. बाद में शिवसेना और भाजपा ने गठबंधन करके सरकार बनाई थी.

पिछले कई महीनों से शिवसेना विभिन्न मुद्दों पर कर रही है भाजपा का विरोध

पिछले कई महीनों से देखने को मिल रहा है कि शिवसेना भाजपा के कई फैसलों पर सवाल उठा चुकी है. चाहे महाराष्ट्र में कर्ज माफी का मुद्दा हो, नोटबंदी का मामला हो या फिर जीएसटी का, इन सभी मुद्दों पर शिवसेना ने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर तीर चलाए हैं.

महाराष्ट्र में दोनों दलों की मिलीजुली सरकार है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी हिंदुत्व की रक्षा के लिए हर राज्य में चुनाव लड़ेगी. इस बयान से ही पता चल जाता है कि हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेना भाजपा से अलग राय रखती है और दोनों पार्टियों के बीच तल्खी किस कदर बढ़ चुकी है.सीमा पर पाकिस्तानी गोलाबारी को लेकर भी शिवसेना केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है. बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी शिवसेना ने केंद्र सरकार की आलोचना की थी. वहीं गुजरात चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के लिए उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी की तारीफ भी की थी. बता दें कि महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में 39 सदस्यीय मंत्रिमंडल में शिवसेना के 12 मंत्री हैं. इनमें 5 कैबिनेट स्तर के मंत्री शामिल हैं. केंद्र में एनडीए सरकार में शिवसेना के एक मंत्री अनंत गीते हैं.

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