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किसान आंदोलन; सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस के एसएचओ पर तलवार से हमला

attack on sho delhiनई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने बताया है कि शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर प्रदर्शन स्थल पर तलवार से हमले का शिकार हुए SHO के हाथ में गंभीर चोटें आई हैं। एक अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने एसएचओ पर हमला करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारी ने बताया कि अलीपुर के एसएचओ प्रदीप पालीवाल सिंघू बॉर्डर प्रदर्शन स्थल खाली कराने को लेकर किसानों और स्थानीय निवासी होने का दावा करने वाले लोगों के बड़े समूह के दरम्यान हुई झड़प में बीच-बचाव करा रहे थे।देर शाम दिल्ली पुलिस ने बताया कि सिंघु बॉर्डर पर हिंसा के मामले में एसएचओ अलीपुर पर तलवार से हमला करने वाले सहित 44 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया।एक अधिकारी ने कहा कि किसानों और स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे पर पथराव किया । इसके बाद पुलिस ने झड़प को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल और लाठीचार्ज किया। दिल्ली पुलिस ने ट्वीट किया, ‘दिल्ली के अलीपुर के एसएचओ दंगाई प्रदर्शनकारियों (एमकेएससी धड़े) और सिंघू के उन स्थानीय ग्रामीणों के दरम्यान बीच-बचाव करा रहे थे, जो गणतंत्र दिवस पर हुई घटनाओं और दो महीने से आम जन-जीवन को हो रहे नुकसान के खिलाफ विरोध दर्ज कराने गए थे।’पुलिस ने कहा, ‘इस तरह एसएचओ पर हमला किया गया। उनके हाथ में गंभीर चोटें आई हैं… शांति बहाल कर दी गई है। कानूनी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।’स्थानीय निवासी होने का दावा करने वाले समूह ने किसानों से सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन स्थल खाली कराने की मांग की और आरोप लगाया कि उन्होंने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का ‘अपमान’ किया है।

शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर पर हुआ क्या था
दरअसल, स्थानीय निवासी होने का दावा कर रहे लोगों का समूह सिंघु बॉर्डर को खाली कराने के लिए वहां पहुंचा था। इन लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने (प्रदर्शनकारी किसानों ने) गणतंत्र दिवस पर ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। डंडों से लैस स्थानीय लोगों का समूह प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा और किसानों के खिलाफ नारे लगाते हुए उनसे वहां से जाने को कहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव भी किए। सिंघु बॉर्डर प्रदर्शन स्थल पर काफी हद तक बाहर से प्रवेश रोका गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का प्रतिरोध करने के लिए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां आ रहे थे। हालांकि, किसान यूनियन के स्वयंसेवियों ने उन्हें फौरन रोक दिया, जिससे स्थिति ज्यादा उग्र नहीं हो पाई।पंजाब के रहने वाले हरकीरत मान बेनीवाल (21) ने कहा, ‘वे स्थानीय लोग नहीं हैं, बल्कि भाड़े पर बुलाए गए गुंडे हैं। वे लोग हम पर पथराव कर रहे थे और पेट्रोल बम फेंक रहे थे। उन्होंने हमारी ट्रॉली भी जलाने की कोशिश की। हम उनका प्रतिरोध करने के लिए यहां हैं।’26 जनवरी को किसान संघों की ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। कई प्रदर्शनकारी लाल किला पहुंच गए थे और इस ऐतिहासिक स्मारक में प्रवेश कर गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसकी प्राचीर पर धार्मिक झंडा भी लगाया, जहां प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण करते हैं।

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के खिलाफ गांववालों का प्रदर्शन, राजमार्ग खाली करने की मांग की

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन निकाली गई किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान काफी हिंसा हुई। कई स्थानों पर किसानों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस के साथ झड़प की। अब इसका असर किसान आंदोलन पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। दिल्ली की सिंघु सीमा (दिल्ली-हरियाणा) पर लगभग पिछले दो महीनों से आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के खिलाफ गुरुवार को गांव वाले सड़कों पर उतर आए। उन्होंने मांग की है कि तुरंत राजमार्ग को खाली किया जाए।प्रदर्शनकारी बैरियर के नजदीक किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के स्टेज के पास जुटे हैं। भारी संख्या में दिल्ली पुलिस भी मौके पर पहुंची है जो बैरिकेडिंग कर रही है और प्रदर्शनकारियों को सड़क की दूसरी तरफ आने से रोक रही है। प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा की जा रही बैरिकेडिंग का विरोध कर रहे हैं।गांव वालों का कहना है कि वे अबतक यहां प्रदर्शन करने वाले किसानों की मदद कर रहे थे लेकिन गणतंत्र दिवस के मौके पर जो हुआ उससे वे काफी नाराज हैं। बता दें कि गणतंत्र दिवस के दौरान हुई हिंसा के बाद से ही अलग-अलग प्रदर्शनस्थल पर सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। ऐसे में जो लोग प्रदर्शन करने के लिए आए वे भी कुछ दूरी पर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय प्रदर्शनकारी कुछ समय बाद वापस लौट गए।

यूपी बॉर्डर खाली कराने की मांग, स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शन

गाजियाबाद। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को बृहस्पतिवार को दो माह बाद पहली बार स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। बृहस्पतिवार शाम को आंदोलन स्थल खाली कराने की जुगत में गाजियाबाद पुलिस-प्रशासन जुटा हुआ था। इस बीच वैशाली, सीमांत विहार सहित आसपास के लोगों ने यूपी बॉर्डर खाली कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। 26 जनवरी पर लालकिला पर हुई हिंसा और तिरंगे के अपमान को लेकर लोगों में गुस्सा दिखाई दिया। लोगों ने नारे लगाए कि तिरंगे का अपमान नहीं सहेंगे। साथ ही किसानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।बॉर्डर खाली कराने की मांग कर रहे लोगों ने किसानों पर फर्जी आंदोलन चलाने सहित कई गंभीर आरोप मड़ दिए। यूपी बॉर्डर पर जारी आंदोलन के खिलाफ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित हुए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना था कि बीते दो माह से यूपी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का कब्जा है। ऐसे में स्थानीय लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। दिल्ली जाने के लिए पांच मिनट के सफर में घंटों लग रहे हैं। ऐसे में आंदोलन के चलते पैसा और समय दोनों जाया हो रहा है।यूपी बॉर्डर पर बीते दो माह से जारी किसानों के आंदोलन में बृहस्पतिवार को समीकरण एकाएक बदल गए। पहली बार किसानों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध की आवाज उठाई।

 

 

 

 

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