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रूसी कोरोना वैक्‍सीन ‘स्पूतनिक वी’ को भारत में मंजूरी

corona vaccineनई दिल्ली देश में बेकाबू होते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की एक्सपर्ट कमेटी ने देश में कुछ शर्तों के साथ रूस के एंटी कोविड-19 वैक्सीन ‘स्पूतनिक वी’ (Sputnik V)के इमरजेंसी यूज को मंजूरी देने की सिफारिश की है। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) इस सिफारिश पर अंतिम निर्णय लेगा। यदि इस वैक्सीन को मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत में उपलब्ध तीसरी एंटी कोविड-19 वैक्सीन होगी। वैसे दुनिया में रेगुलेटरी अप्रूवल हासिल करने वाली यह पहली वैक्‍सीन थी मगर पर्याप्‍त ट्रायल डेटा न होने के चलते दूसरे देशों ने इसे उतनी तवज्जो नहीं दी।भारत में कोरोना वायरस के दो टीकों- Covishield और Covaxin को जनवरी 2021 के पहले हफ्ते में अप्रूवल मिल चुका है। आइए जानते हैं कि Sputnik V, Covishield या Covaxin से कितनी अलग है।

 

  • स्पूतनिक वैक्सीन बनाने वाली कंपनी गामलेया रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने दावा किया है कि वैक्सीन ने कोरोना वायरस के गंभीर मामलों के खिलाफ 100 प्रतिशत कारगर रही है।
  • स्पूतनिक वी वैक्सीन अब तक 1.2 अरब आबादी वाले 59 देशों में अप्रूव हो चुकी है। इसे रूस में अगस्त 2020 में ही इस्तेमाल की इजाजत मिल गई थी।
  • रूस की वैक्सीन सामान्य सर्दी जुखाम पैदा करने वाले adenovirus पर आधारित है। इस वैक्सीन को आर्टिफिशल तरीके से बनाया गया है। यह कोरोना वायरस SARS-CoV-2 में पाए जाने वाले स्ट्रक्चरल प्रोटीन की नकल करती है जिससे शरीर में ठीक वैसा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा होता है जो कोरोना वायरस इन्फेक्शन से पैदा होता है।
  • रूसी वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह एमआरएनए तकनीक पर नहीं बनी। फिर भी एमआरएनए तकनीक के फाइजर और मॉडर्ना के वैक्सीन के समान ही प्रभावी है।
  • भारत में वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी के लिए, यहां कुछ लोगों पर ट्रायल करना जरूरी है। देश में कोई भी बाहर की चीज आती है तो अपने लोगों पर इस्तेमाल होने के लिए एक ब्रीजिंग का ट्रायल करना जरूरी होता है। रूसी कंपनी ने यह ट्रायल का स्टेज पूरा किया है।
  • फाइज़र ने एक बार शुरू में यहां पर आवेदन किया था लेकिन जब उन्हें यह बताया गया कि यहां उन्हें ट्रायल करना होगा तो उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया। वहीं मॉडर्ना ने तो कभी कोई आवेदन ही नहीं किया है। इस बात की जानकारी खुद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक इंटरव्यू में दी थी।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मौजूदा समय में फाइजर या मॉडर्ना की तरफ से भारत में उनकी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए कोई एप्लिकेशन नहीं है।

कितने असरदार हैं कोरोना वायरस के ये तीनों टीके?

  • फेज 3 ट्रायल के अंतरिम नतीजों में Sputnik V वैक्‍सीन की एफेकसी 91.6% पाई गई है।
  • भारत बायोटेक की Covaxin ने फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल में 81% की एफेकसी हासिल की थी।
  • सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की Covishield की एफेकसी 62% दर्ज हुई थी। हालांकि डेढ़ डोज देने पर एफेकसी 90% तक पहुंच गई।

    क्‍या है डोज पैटर्न और स्‍टोरेज का तरीका?

    • Covishield की दो डोज 4-8 हफ्तों के अंतराल पर दी जाती हैं। इसे स्‍टोर करने के लिए सब जीरो तापमान (शून्‍य से कम) की जरूरत नहीं है।
    • Covaxin की दो डोज 4-6 हफ्तों के अंतराल पर दी जाती हैं। इसे भी 2-8 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान पर स्‍टोर कर सकते हैं।
    • Sputnik V के डिवेलपर्स के अनुसार, इसे भी 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच स्‍टोर किया जा सकता है। यह वैक्‍सीन भी दो डोज में दी जाती है।
  • कीमत और उपलब्‍धता ?

    • Covishield और Covaxin, दोनों ही सरकारी अस्‍पतालों में मुफ्त में लगाई जा रही हैं। प्राइवेट अस्‍पताल में जाने पर 250 प्रति डोज का शुल्‍क लिया जा रहा है। सरकार सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक को 150 रुपये प्रति डोज दे रही है।
    • Sputnik V की भारत में कीमत अबतक स्‍पष्‍ट नहीं है। विदेश में यह टीका 10 डॉलर प्रति डोज से कम है। RDIF का शुरुआती प्‍लान इसे रूस से आयात करने का है। ऐसे में कीमत ज्‍यादा हो सकती है।
    • एक बार इस वैक्‍सीन का प्रॉडक्‍शन भारत में शुरू हो जाए तो कीमतें काफी कम हो जाएंगी। डॉ रेड्डी लैबोरेटरीज से 10 करोड़ डोज बनाने की डील हुई है। इसके अलावा RDIF ने हेटरो बायोफार्मा, ग्‍लैंड फार्मा, स्‍टेलिस बायोफार्मा, विक्‍ट्री बायोटेक से 85 करोड़ डोज बनाने का भी करार कर रखा है।

 

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