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सुप्रीम कोर्ट ने ऑड-ईवन पर खड़े किए सवाल

supreme-court-of-indiaखुद के लिए दूसरों की जान नहीं ले सकते किसान; सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. दिल्ली और आसपास के वायु प्रदूषण पर सख्त टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण और पराली पूरी तरह से सिस्टम की नाकामी है. कोर्ट ने कहा है कि यह हालात इमरजेंसी से भी बदतर हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान लगी इमरजेंसी के दौरान के fireहालातों को अभी से बेहतर बताया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसान अपने लिए दूसरों की जान नहीं ले सकते.शीर्ष अदालत ने दिल्ली और केंद्र सरकार को प्रदूषण पर तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य मशीनरी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, केंद्र और दिल्ली को ही इस पर कुछ करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से वालों के नाम देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने के कारण पैदा हुए प्रदूषण को लेकर पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण या EPCA की रिपोर्ट पर यह सख्त टिप्पणी की. ईपीसीए ने दिल्ली-एनसीआर में कचरा जलाने और निर्माण कार्यों पर रोक लगाने का निर्देश दिया है.

दिल्ली सरकार पर SC सख्त, पूछा- 3000 बसों का क्या हुआ, ऑड-ईवन से मिलेगा क्या?

Dummies Of Delhi CM Arvind Kejriwal Installed In City To Promote Odd-Even Campaignराजधानी दिल्ली में फैले प्रदूषण के मसले पर अब देश की सर्वोच्च अदालत ने सख्ती दिखाई है. दिल्ली में फैले प्रदूषण पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर साल दिल्ली चोक हो जाती है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आज से ही लागू हुए ऑड-ईवन पर सवाल खड़े कर दिए हैं और दिल्ली सरकार से पूछा है कि आखिर इसका फायदा क्या है?सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान राज्य सरकारों को फटकार लगाई है और पराली जलाने पर एक्शन लेने की बात कही है. सुप्रीम कोर्ट सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकारों को चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी है, लेकिन यहां पर लोग मर रहे हैं. किसी भी सभ्य देश में ऐसा नहीं होता है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों को जीने का अधिकार है, एक पराली जलाता है और दूसरे के जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है. जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार करे या फिर राज्य सरकार, इससे हमें मतलब नहीं है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हर साल 10-15 दिन के लिए हमें ये देखना पड़ रहा है.उन्होंने कहा कि आज लुटियन जोन में एक बेडरुम में भी AQI 500 तक पहुंच गया है और ये दिल्ली का हाल है.

दिल्ली सरकार से SC ने पूछा- ऑड ईवन का क्या फायदा?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं. दरअसल, याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया कि दिल्ली में गाड़ी से ज्यादा टू व्हीलर्स प्रदूषण फैला रहे हैं. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ऑड ईवन से क्या फायदा हो रहा है?दिल्ली सरकार ने कहा है कि सड़क पर कम संख्या में गाड़ी होने से प्रदूषण कम फैल रहा है, लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर कर रहे हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डीजल व्हीकल बैन करना समझ आता है लेकिन ऑड ईवन क्या है? पिछले साल आपने कहा था 3000 बस आएंगी, लेकिन सिर्फ 120 ही आईं.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोग कैसे सोचते हैं, देखना होगा. आज कोई भी मेट्रो से एयरपोर्ट नहीं जाना चाहता है.

हम लोगों को मरने नहीं देंगे-सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘लोग मर रहे हैं. आगे और लोग मरेंगे. यह देखना बेहद दुखद है कि लोग कोई ठोस कदम उठाने की जगह बस राजनीतिक हथकंडों में रुचि ले रहे हैं.’ कोर्ट ने कहा, ‘हम अब यह मामला देखेंगे. पराली जलाने का काम तुरंत बंद होना चाहिए और सभी राज्य इसे रोकने के लिए हर कदम उठाएं.’

Kejriwal-Vijay-Goel-Spar_159016_730x419-m-1280x720हरियाणा-पंजाब में ठप है प्रशासनिक व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही बेहद तल्ख लहजे में कहा कि पंजाब और हरियाणा में प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो गई है. कोर्ट ने साथ ही कहा, ‘यह सामूहिक नुकसान है और इसके लिए सभी अधिकारियों से लेकर ग्राम प्रधान के स्तर तक के सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.’ सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण के इस पूरे मामले को अपने हाथ में लेते हुए न्यायमित्र से IIT के पर्यावरण विशेषज्ञ से बात करके हल निकालने का निर्देश दिया.

क्या कहता है दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, राजधानी दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रविवार शाम 4 बजे तक 494 हो गया, जो 6 नंवबर 2016 के बाद सबसे ज्यादा है. साल 2016 में एयर क्वालिटी इंडेक्स 497 हो गया था. अशोक विहार, आनंद विहार, अरबिंदो मार्ग में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रिकॉर्ड हुई. दिल्ली के अलावा फरीदाबाद का AQI 493, नोएडा में 494, गाजियाबाद में 499, ग्रेटर नोएडा में 488, गुरुग्राम में 497 रहा.अर्थ साइंस मिनिस्ट्री के एयर क्वालिटी मॉनिटर SAFAR के मुताबिक, पूरे दिल्ली-एनसीआर का AQI रविवार शाम 5 बजे तक 708 हो गया, जो सुरक्षित स्तर 0-50 से करीब 14 गुणा ज्यादा है. 0-50 के बीच के AQI को अच्छा माना जाता है, जबकि 51-100 के बीच का AQI संतोषजनक, 101-200 के बीच का AQI ठीक-ठाक, 201-300 के बीच का AQI खराब, 301-400 के बीच का AQI बहुत खराब और 401-500 के बीच का AQI गंभीर स्थिति का माना जाता है.गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से अधिकृत पैनल ने गंभीर हालात से निपटने के लिए शुक्रवार को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा करते हुए सभी निर्माण कार्यों और पटाखा जलाने पर रोक लगा दी थी.

सिर्फ बैठकों से काम नहीं होगा, एक्शन लीजिए: SC

GTY_supreme_court_cases_jef_131003_16x9_992पर्यावरण विशेषज्ञ सुनीता नारायण ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट फाइल की. उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार को एनवायरमेंट डिपार्टमेंट, IIT दिल्ली के एक्सपर्ट से राय लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को पराली जलाने पर रोक लगानी चाहिए, कोई भी देश ऐसे नहीं रह सकता है. लोग मर रहे हैं और लगातार मरते ही जा रहे हैं.केंद्र सरकार की ओर से जवाब दिया गया है कि चीफ सेक्रेटरी ने इस मामले में बैठक की है और पराली जलाने की घटना रोकने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ बैठकें काफी नहीं है, आखिर कौन जिम्मेदार है? राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं और वो सिर्फ चुनाव में बिजी हैं. वो लोग लोगों को मरने दे रहे हैं.सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ ही मंत्रालय और IIT के एक्सपर्ट को 30 मिनट में पेश होने को कहा है.गौरतलब है कि दिल्ली और उससे सटे इलाकों में दिवाली के बाद से ही स्मॉग छाया हुआ है. प्रदूषण लगातार खतरनाक हो रहा है जिसकी वजह से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं. इसी से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने राज्य में ऑड ईवन को लागू किया है. सोमवार सुबह भी दिल्ली में AQI खतरे के निशान से काफी बाहर था.

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