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तबलीगी जमात मुस्लिम देश सऊदी अरब-ईरान में बैन ……

तबलीगी जमात से जुड़े हुए लोग दुनिया भर में फैले हुए हैं और कोरोना संक्रमण के चलते एक बार फिर सुर्खियों में हैं. दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित तबलीगी जमात के मरकज से दुनिया के 150 देशों से ज्यादा जमातें इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए जाती हैं. इतना ही नहीं दुनिया के तमाम देशों से तबलीगी जमात के लोग भारत में भी आते हैं. सऊदी अरब जहां से इस्लाम की शुरुआत हुई  वहीं पर तबलीगी जमात पूरी तरह बैन है. इसके अलावा ईरान में भी इन्हें इस्लाम के प्रचार-प्रसार करने की इजाजत नहीं है.

  • सऊदी अरब में सलफी मसलक की बहुलता
  • ईरान में शिया तो तबलीगी जमात देवबंदी
  • तबलीगी जमात और शिया संप्रदाय के बीच वैचारिक मतभेद
  • तबलीगी जमात 150 देशों में सक्रिय

jama-masjid-socialबता दें कि मौलाना इलियास कांधलवी ने 1927 में तबलीगी जमात का गठन किया था. ये देवबंदी विचारधारा से प्रेरित और मुसलमानों में हनफी संप्रदाय के मानने वाले हैं. इलियास कांधलवी पहली जमात दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात के मुस्लिम समुदाय लोगों को इस्लाम की मजहबी शिक्षा देने के लिए ले गए थे. इसके बाद से तबलीगी जमात का काम दुनिया के तमाम देशों में काफी फल-फूल रहा है, लेकिन सऊदी अरब और ईरान में तबलीगी जमात अपनी जगह नहीं बना पाई है.सऊदी अरब में सलफी मसलक (संप्रदाय) के मानने वाले लोग ज्यादा हैं. वहां की मस्जिदों के इमाम भी ज्यादातर सलफी मसलक के हैं. वहीं, तबलीगी जमात के लोग हनफी मसलक के हैं. ऐसे में इस्लाम के अंदर धार्मिक और वैचारिक मतभेद होने के चलते एक तरह से सऊदी अरब में तबलीगी जमात पर बैन है, क्योंकि सलफी मसलक में इस्लाम के प्रचार-प्रसार की इस तरह से कोई पद्यति नहीं है.

इसके अलावा सऊदी अरब में मस्जिदों की सारी जिम्मेदारियां सरकार के पास हैं. वहां पर मस्जिदों में किसी को ठहरने की इजाजत नहीं है और न ही किसी तरह की कोई धार्मिक भीड़ इकट्ठा करने की है. जबकि, तबलीगी जमात के लोग मस्जिदों में जाकर ठहरते हैं और लोगों के बीच प्रचार-प्रचार करते हैं. इसी के चलते सऊदी अरब की हुकूमत ने तबलीगी जमात को अपने देश में बैन कर रखा है. इसके अलावा अरब का एक ये भी तर्क है कि यहां से ही इस्लाम पूरी दुनिया में फैला है, ऐसे में कोई हमें क्या इस्लाम बताएगा.सऊदी अरब ने तबलीगी जमात के अलावा भी दूसरे मुस्लिम समुदायों की क्रियाकलाप को भी बैन कर रखा है. सार्वजनिक रूप से न तो किसी को अपने धार्मिक कार्य करने की इजाजत है और न ही किसी तरह के कोई चंदा इकट्ठा करने की. हाल ही में सऊदी अरब ने तबलीगी जमात को प्रतिबंधित करने के लिए बकायदा लेटर भी जारी किया है.

ईरान में भी तबलीगी जमात की एंट्री नहीं

सऊदी अरब की तरह ईरान में भी तबलीगी जमात की एंट्री नहीं है. सऊदी अरब में जहां सलफी संप्रदाय की बहुलता है तो वहीं ईरान शिया संप्रदाय बहुल है और सत्ता पर भी उनका कब्जा है. तबलीगी जमात और शिया संप्रदाय के बीच काफी वैचारिक मतभेद हैं. शिया संप्रदाय के धार्मिक क्रियाकलापों को तबलीगी जमात इस्लाम के खिलाफ बताता है. ऐसे ही तबलीगी जमात के कामकाज को भी शिया समुदाय के लोग सही नहीं मानते हैं. इसी के चलते ईरान में तबलीगी जमात की एंट्री पर प्रतिबंध है. इतना ही नहीं ईरान में तबलीगी जमात के छिप काम करने पर भी रोक है.दरअसल दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज और पाकिस्तान में लाहौर के पास रायविंड के तबलीगी जमात के मरकज से दुनिया के करीब 150 से ज्यादा देशों के लिए तमाम जमातें निकलती हैं. 40 दिन और चार महीने के लिए निकलने वाली जमातें ही विदेशों को जाती हैं. हालांकि, कुछ जमातें जो चंद दिनों के लिए निकलती हैं, उन्हें स्थानीय स्तर से ही तय किया जाता है. इस अवधि के समाप्त होने के बाद ही वे अपने घरों को लौटते हैं और रोजाना के कामों में लगते हैं.

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