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पासपोर्ट मामले में घिरीं तन्वी सेठ!

pasportतन्वी सेठ के पासपोर्ट की जांच करने के लिए सोमवार दोपहर कैसरबाग स्थित ससुराल पहुंची पुलिस व स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को उसके यहां (लखनऊ) रहने से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिले।पुलिस सूत्रों का कहना है कि दो घंटे की पड़ताल और तन्वी के ससुरालीजनों से बातचीत के बाद टीम खाली हाथ लौट आयी। कोई साक्ष्य न मिलने पर तन्वी का पासपोर्ट अटक सकता है। हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार का कहना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस ने तन्वी के मोबाइल की कॉल डिटेल के जरिए लोकेशन तलाशने का प्रयास भी किया है। बताया जा रहा है कि 14 जूने पहले तक तन्वी की लोकेशन नोएडा में देखी गई है। तन्वी ने पासपोर्ट के आवेदन में जो ब्यौरा दिया है उसके मुताबिक वह गोंडा में जन्मी हैं और कैसरबाग में नाज सिनेमाहॉल के पास चिकवाली गली झाऊलाल बाजार में रहने वाले अनस से उन्होंने शादी की है। उन्होंने अपने आवेदन में नोएडा में रहने की बात भी लिखी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के मुताबिक गोंडा से जांच करा ली गई है। जल्द ही पुलिस की एक टीम नोएडा का पता सत्यापित करने के लिए वहां भेजी जाएगी। कैसरबाग स्थित ससुराल के पते पर उनके रहने की तस्दीक की जा रही है।उन्होंने मंगलवार को इस बारे में पूरी जानकारी मिलने की बात कही। हालांकि, पुलिस सूत्रों के मुताबिक सोमवार को ही पुलिस और एलआईयू की टीम तन्वी की ससुराल गई थी जहां उसके ससुर ए. सिद्दीकी व अन्य सदस्य मिले। टीम ने दो घंटे तक तन्वी के वहां रहने के साक्ष्य व दस्तावेज मांगे, लेकिन ससुरालीजन कुछ भी नहीं दे सके। फिलहाल पुलिस और एलआईयू की टीम खाली हाथ लौट आई है।पासपोर्ट अधिनियम के मुताबिक आवेदक जो पता लिख रहा है, उस पर एक साल रहना जरूरी है। तन्वी ने कैसरबाग स्थित ससुराल का पता दिया है लेकिन वह एक साल से वहां नहीं रह रही हैं। यह आधार उनका पासपोर्ट खारिज करने के लिए पर्याप्त है।तन्वी की तरफ से पासपोर्ट के आवेदन में अगर कोई जानकारी गलत पाई गई, तो उनके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम के तहत प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती है। हालांकि, इस मामले में पुलिस खामोश है। चूंकि यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा बना हुआ है इसलिए पुलिस पासपोर्ट की जांच को लेकर भी कोई टिप्पणी नहीं कर रही।

लखनऊ में रहने का दावा झूठा

पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी होता है. तन्वी सेठ के केस में लखनऊ के कैसरबाग पुलिस थाने ने रिपोर्ट बनाई है. इसमें लखनऊ में रहने का उनका दावा झूठा निकला है. पड़ोसियों ने बताया कि वे अपने पति के साथ नोएडा में ही रहती हैं. उनकी बेटी भी उनके साथ ही पढ़ती है. जब पुलिस ने तन्वी सेठ के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकाली तो पता चला कि तन्वी 14 जून से पहले नोएडा में रह रहीं थीं. पासपोर्ट बनवाने के लिए वे यहां लखनऊ आईं थी. 19 जून को उन्होंने आवेदन किया था.

लगातार नोएडा में रहीं हैं तन्वी सेठ

तन्वी सेठ के दावे के मुताबिक 20 तारीख को पासपोर्ट ऑफिस में सीनियर सुपरिटेंडेंट विकास मिश्र से उनकी कहासुनी हुई. मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद अगले ही दिन उन्हें हाथों हाथ पासपोर्ट मिल गया. तन्वी सेठ के कॉल डिटेल से पता चला कि वे लगातार नोएडा में रहीं हैं. उन्होंने जब भी फोन किया, मोबाइल टावर नोएडा और दिल्ली के ही मिले. 14 जून से मोबाइल टावर के लोकेशन लखनऊ के बताए जाते हैं.पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के बाद पासपोर्ट विभाग पशोपेश में है. अब तन्वी का पासपोर्ट जब्त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. रीजनल पासपोर्ट ऑफिस चाहे तो तन्वी पर कार्रवाई भी हो सकता है. उनके खिलाफ झूठी जानकारी देने का मुकदमा हो सकता है.

क्या है नियम?

नियम तो ये कहता है कि जिस पते पर आप छह महीने से रहते हैं, उसी पते पर आपका पासपोर्ट बनेगा. सेना, केन्द्रीय पुलिस बल और स्टूडेंट्स को इस नियम में छूट है. इस हिसाब से नोएडा में रहने वाली तन्वी सेठ को गाजियाबाद पासपोर्ट ऑफिस में आवेदन करना चाहिए था. उनके नाम को लेकर भी पेंच है. अनस से शादी करने से पहले उन्होंने धर्म बदल लिया था. निकाहनामा में उनका नाम सादिया अनस है. लेकिन पासपोर्ट फॉर्म में उन्होंने ये जानकारी दी है कि उन्होंने कभी भी अपना नाम नहीं बदला. इसी बात पर पासपोर्ट ऑफिस के कर्मचारी विकास मिश्र से उनकी बहस हुई थी. जिस पर तन्वी ने आरोप लगाया था कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कहा गया था. उन्हें हिंदू बनने के लिए कहा गया था. जानकारों का कहना है कि निकाहनामा के बावजूद तन्वी का इसी नाम से पासपोर्ट बन सकता है. लेकिन उन्हें नाम बदलने की जानकारी नहीं छिपाना चाहिए थी.

बिना पुलिस वेरिफिकेशन के पासपोर्ट देने पर बढ़ा विवाद

21 जून को सवेरे 11 बजे तन्वी सेठ और उनके पति अनस सिद्दीकी को हाथोंहाथ पासपोर्ट दे दिया गया था. तन्वी का पासपोर्ट नया बना था जबकि अनस का पासपोर्ट रीन्यू हुआ था. बिना पुलिस वेरिफिकेशन के पासपोर्ट देने पर विवाद बढ़ गया. तब रीजनल पासपोर्ट अफसर पीयूष वर्मा ने कहा था, “हमारा ये अधिकार है हम किसी को पासपोर्ट दे सकते हैं. पुलिस वेरिफ़िकेशन बाद में भी हो जाता है”. वैसे ये नियम तत्काल कैटेगरी में है. लेकिन तन्वी ने जनरल कोटे से पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था. आज दिल्ली में रीजनल पासपोर्ट अफसरों की सालाना मीटिंग है. इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद रहेंगी. तन्वी के पासपोर्ट को लेकर उन्हें सोशल मीडिया में लगातार ट्रोल किया जा रहा है.

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