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आतंक का सिलसिला…..

पिछले कुछ महीनों के दौरान जम्मू-कश्मीर में कई आतंकियों को मार गिराने या उनकी गिरफ्तारी से ऐसा लग रहा था कि वहां आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर काबू पाने में कामयाबी मिल रही है। लेकिन शनिवार देर रात पुलवामा जिले में जिस तरह आतंकवादियों ने आत्मघाती हमला कर पांच जवानों की जान ले ली, उससे साफ है कि अभी राज्य में सुरक्षा बलों की चुनौती कम नहीं हुई है। इस हमले के दौरान सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया। हैरानी की बात यह भी है कि साल के आखिरी दिन हुआ यह हमला एक तरह से पिछले साल नववर्ष के जश्न के बीच वायुसेना के पठानकोट ठिकाने पर हुए आतंकी हमले की तर्ज पर ही किया गया। इससे पहले बीते अगस्त में पुलवामा में ही आतंकियों ने जिला पुलिस के परिसर में हमला कर आठ सुरक्षाकर्मियों की जान ले ली थी। इसके अलावा, ऐसी कई अन्य घटनाओं से भी यही लगता है कि हाल के दिनों में बढ़ी सख्ती के बावजूद आतंकी संगठनों की सक्रियता में कोई खास फर्क नहीं आया है।

ताजा हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है, जिसके बारे में अब यह किसी से छिपा नहीं है कि वह पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित करता है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में भारत की कूटनीतिक पहलकदमी की वजह से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को पनाह देने के मसले पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत झेलनी पड़ी है। एक ओर जहां अमेरिका ने कई मौकों पर साफ लहजे में आतंकी संगठनों को शरण और बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान को चेताया, वहीं ब्रिक्स सम्मेलन में भी बाकायदा जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम लेकर उनके खिलाफ सख्त संदेश जारी किए गए। इसके बाद स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान पर इन आतंकी संगठनों पर लगाम कसने का दबाव बढ़ा है। फिर पठानकोट हमले के बाद सेना, खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के बीच तालमेल की वजह से कई आतंकी हमलों को या तो नाकाम किया गया या फिर आतंकियों को मार गिराया गया। जाहिर है, अपने इर्द-गिर्द कसते शिकंजे की वजह से जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और दूसरे आतंकी संगठनों के बीच हताशा बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में अपनी मौजूदगी दर्ज करने की कोशिश में ये संगठन और भी इस तरह की हरकतों को अंजाम दे सकते हैं।

ताजा घटना में एक चिंताजनक पहलू यह है कि इसमें हमलावरों में शामिल एक सोलह साल के लड़के ने हमले की योजना बनाने को लेकर एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर जारी कर दिया था, जिसमें उसने युवाओं से जैश-ए-मोहम्मद में शामिल होने की अपील की थी। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब सरकार, सुरक्षा बल, पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच तालमेल से स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने की कवायदें शुरू की गई हैं। इन कोशिशों के बाद कुछ लोगों के आतंकी संगठनों को छोड़ कर अपने परिवार के पास लौटने की भी खबरें आर्इं। ऐसी बदलती स्थिति में ऐसे वीडियो प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। लिहाजा, सुरक्षा बलों और तमाम खुफिया एजेंसियों को पहले के मुकाबले ज्यादा चौकस रहने की जरूरत है। कुछ समय पहले खुद पाकिस्तान के विदेशमंत्री ने कबूल किया था कि लश्कर और जैश जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित संगठन अपनी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें रोकना होगा। सवाल है कि आखिर आज भी ये संगठन किसकी शह पर भारत में आतंकी हमले करने से बाज नहीं आ रहे हैं!

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