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दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल

yogiकहावत है, जहां चाह, वहां राह। कोराना के खिलाफ लड़ाई में भी यही देखने को मिल रहा है। कई राज्य ऐसे हैं जो केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने के साथ-साथ अपनी ओर से अतिरिक्त कोशिशें भी कर रहे हैं। संकट की घड़ी में किसी कल्याणकारी राज्य से जो अपेक्षाएं होती हैं, ये राज्य उन्हीं अपेक्षाओं की कसौटी पर खुद को खरा साबित करने में लगे हैं। ऐसा करते हुए ये दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन रहे हैं। तीन राज्यों की ऐसी कोशिशों के बारे में बता रहे हैं

(योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कप्तानी में टीम-11 लड़ रही है। जब कोरोना ने देश में पांव पसारने शुरू ही किए थे, तो योगी आदित्यनाथ के जेहन में यह बात चलनी शुरू हो गई थी कि कोराना से मुकाबला कुछ हटकर सोचने से ही हो सकता है। उसी सोच से निकली टीम-11। उन्होंने राज्य के 11 वरिष्ठतम अधिकारियों के नेतृत्व में 11 टीमें बनाईं। हर टीम के दायित्व अलग और बिल्कुल स्पष्ट हैं। मुख्य सचिव की टीम केंद्र और दूसरे राज्यों से कोऑर्डिनेट करती है। दूसरे राज्यों में यूपी के जो लोग फंसे हैं, उनकी निगरानी का जिम्मा इसी टीम पर है। औद्योगिक विकास आयुक्त की टीम को यह देखना होता है कि श्रमिकों और गरीबों को भरण-पोषण अच्छे से हो रहा है या नहीं। कृषि उत्पादन आयुक्त की टीम डोर-स्टेप-डिलिवरी सुनिश्चित कर रही है। अपर मुख्य सचिव की टीम लॉ एंड ऑर्डर के साथ-साथ तब्लीगी जमात के लोगों को तलाश कर उन्हें आइसोलेट कराने का काम देख रही है। अपर मुख्य सचिव राजस्व की टीम पर सभी जिलों में बने कंट्रोल रूम की निगरानी का जिम्मा है। प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य की टीम के जिम्मे संक्रमित व्यक्तियों का इलाज और देखभाल है। प्रमुख सचिव, पशुपालन की टीम चारे की व्यवस्था देख रही है। डीजीपी की टीम का काम जेलों को सैनिटाइज कराना है। अपर मुख्य सचिव की टीम लॉकडाउन के आर्थिक प्रभावों पर काम कर रही है। प्रमुख सचिव कृषि की टीम के जिम्मे फसल के प्रभावी प्रोक्योरमेंट की व्यवस्था है। प्रमुख सचिव पंचायती राज की टीम पर गांव- शहर में पेयजल और सैनिटाइजेशन का जिम्मा है।

भीलवाड़ा ने दी नई उम्मीद
(अशोक गहलोत, राजस्थान)

cm_ashok_gehlot_1590222877_618x347हालात चाहे कितने भी खराब क्यों न हो जाएं, मजबूत हौसलों और कड़े फैसलों की बदौलत लड़ाई जीती जा सकती है। राजस्थान ने अपने भीलवाड़ा जिले के जरिए यह दिखाकर सबको नई उम्मीद दी है। एक समय आया था कि भीलवाड़ा की तुलना इटली से की जाने लगी थी। वहां कोराना पॉजिटिव मरीजों की चेन बनती जा रही थी। ऐसे में 20 मार्च को ही पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। घर से बाहर निकलने की इजाजत किसी को भी नहीं थी। देश का यह पहला शहर था, जहां कोरोना को लेकर इस तरह का कदम उठाया गया। तब तक कोरोना को लेकर देश में कहीं लॉकडाउन की चर्चा भी नहीं शुरू हुई थी। शहर के सभी कारखानों को बंद करा दिया गया। सारे रास्ते सील हो गए। जो जहां था, उसे वहीं रोक दिया गया। होटलों, निजी अस्पतालों, सामुदायिक केंद्रों को क्वारंटाइन के लिए रिजर्व कर लिया गया। जिनमें जरा भी लक्षण दिखा, उनके साथ कोई भी रियायत नहीं की गई। नौ दिनों में 24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को जरूरी सामानों की कोई कमी न होने पाए। जरूरी सामानों का घर तक पहुंचना सुनिश्चित किया गया। इन सबका नतीजा यह रहा कि शहर में संक्रमण बढ़ना रुक गया। जो मरीज पॉजिटिव पाए गए थे, उन्हें भी नेगेटिव करने में कामयाबी पाई गई। राजस्थान सरकार अब राज्य के दूसरे जिलों में भीलवाड़ा मॉडल को अपनाने पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी भीलवाड़ा मॉडल को पेश किया गया। देश के कई दूसरे राज्यों ने अपने यहां भी भीलवाड़ा मॉडल को अपनाने की बात कही है।

डैशबोर्ड बना हथियार
(विजय रुपाणी, गुजरात)

vijay-rupani-1588231132‘हैलो, मैं विजय रुपाणी बोल रहा हूं, कैसे हैं आप? आप अच्छे से दवाई ले रहे हैं या नहीं? मैं जानता हूं आप क्वारंटाइंड हैं। इसको लेकर आपको कोई समस्या तो नहीं आ रही? आपको मुझसे कोई मदद चाहिए या आपकी कोई शिकायत है तो आप मुझसे सीधे बोल सकते हैं, मैंने आपकी समस्या सुनने के लिए ही आपको फोन किया है।’ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी नियमित रूप क्वारंटाइन किए गए लोगों और डॉक्टरों-नर्सों से रोज अपने आवास पर बने डैशबोर्ड के जरिए संवाद कर रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री निवास में स्थापित किया गया सीएम डैशबोर्ड शासन व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। यह कोरोना संकट शुरू होने से पहले से अस्तित्व में है। डैशबोर्ड के माध्यम से मुख्यमंत्री की नजर पूरे राज्य पर होती है। सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरे हों, ड्रोन के माध्यम से निगरानी हो, नवीनतम आंकड़ों की बात हो या हॉटस्पॉट्स पर कड़ी नजर बनाए रखने की बात हो, सीएम डैशबोर्ड का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित कर रहे हैं। कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से देते हैं। कहा जा सकता है कि राज्य के कोने-कोने में घट रही हर एक महत्वपूर्ण घटना में नवीनतम हालात के अनुसार दिशा-निर्देश देने के लिए सीएम डैशबोर्ड का उपयोग कर रहे हैं। राज्य के अधिकारियों को चौकन्ना रखने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री किसी भी वक्त डैशबोर्ड पर आकर किसी भी जिले से जुड़ जाते हैं। इन दिनों मुख्यमंत्री का ज्यादा समय डैशबोर्ड पर ही गुजरता है।

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